अस्मिता डे
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उन्होंने अपनी मानसिकता को लेकर कहा कि आज मेरी मानसिकता बस यही थी कि 48 किलोग्राम वर्ग में मैं सर्वश्रेष्ठ हूं और मुझे अपने देश, खुद के लिए, अपने कोच, माता-पिता और रिश्तेदारों के लिए हर हाल में स्वर्ण जीतना है। यूपी पुलिस में नौकरी मिलने से मेरे परिवार को जो आर्थिक मदद मिली, उसी वजह से मैं यहां आकर गोल्ड मेडल जीतने में सफल रही।