फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Asmita Dey: भूखे पेट खेलीं, गोल्ड जीतकर बोलीं- योगी जी का शुक्रिया, त्रिपुरा की अस्मिता डे के संघर्ष की कहानी

Fri, 31 Jul 2026 10:56 PM IST
विकास कुमार आईएएनएस, नोएडा

सार

जीत के तुरंत बाद अस्मिता ने कहा कि मैं इस गोल्ड मेडल से बहुत खुश हूं। यह उन सभी के लिए है जिन्होंने मेरा समर्थन किया। मैं योगी जी को भी धन्यवाद देना चाहती हूं क्योंकि उन्होंने मुझे यूपी पुलिस में नौकरी दी।
विज्ञापन
1 of 6
अस्मिता डे - फोटो : अमर उजाला
2026 राष्ट्रमंडल खेलों में अपने करियर की अब तक की सबसे बड़ी सफलता हासिल करने के बाद, भारतीय जूडोका अस्मिता डे ने अपना स्वर्ण पदक उन सभी लोगों को समर्पित किया जो उनके सफर में साथ खड़े रहे। इसके साथ ही, उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस में नौकरी देने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 6
अस्मिता डे - फोटो : PTI
कड़े मुकाबले में कनाडा की खिलाड़ी को दी मात
मूल रूप से त्रिपुरा की रहने वालीं लेकिन अब वाराणसी में बसीं अस्मिता ने गुरुवार को महिला 48 किग्रा जूडो के फाइनल में शानदार और संयमित प्रदर्शन किया। उन्होंने कड़े खिताबी मुकाबले में कनाडा की हेइडी क्वाच को 2-1 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मैच के अहम पलों में अस्मिता ने खुद को शांत रखा और बेहतरीन रणनीति के साथ मजबूत डिफेंस का मुजाहिरा करते हुए जीत सुनिश्चित की। पूरे टूर्नामेंट में उनका दबदबा देखने को मिला।
 
विज्ञापन

3 of 6
अस्मिता डे - फोटो : PTI
'योगी जी के समर्थन से परिवार को मिला संबल'
जीत के तुरंत बाद अस्मिता ने कहा कि मैं इस गोल्ड मेडल से बहुत खुश हूं। यह उन सभी के लिए है जिन्होंने मेरा समर्थन किया। मैं योगी जी को भी धन्यवाद देना चाहती हूं क्योंकि उन्होंने मुझे यूपी पुलिस में नौकरी दी। 

4 of 6
अस्मिता डे - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने अपनी मानसिकता को लेकर कहा कि आज मेरी मानसिकता बस यही थी कि 48 किलोग्राम वर्ग में मैं सर्वश्रेष्ठ हूं और मुझे अपने देश, खुद के लिए, अपने कोच, माता-पिता और रिश्तेदारों के लिए हर हाल में स्वर्ण जीतना है। यूपी पुलिस में नौकरी मिलने से मेरे परिवार को जो आर्थिक मदद मिली, उसी वजह से मैं यहां आकर गोल्ड मेडल जीतने में सफल रही।
विज्ञापन

5 of 6
अस्मिता डे - फोटो : PTI
वजन बनाए रखने के लिए रहना पड़ा भूखा 
अस्मिता ने खिताबी मुकाबले से पहले रैंडम वेट-इन (वजन जांच) के संघर्ष को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्हें सुबह भूखा रहना पड़ा था। मैं ज्यादा कुछ नहीं खा सकती थी क्योंकि रैंडम वेट-इन में आपका वजन 50 किलो से कम होना चाहिए। जब मैं सुबह उठी, तो मेरा वजन 50 किलो 300 ग्राम था, इसलिए मैंने कुछ नहीं खाया। जब मेरा नाम रैंडम वेट-इन के लिए आया, तब जाकर मैंने औपचारिकता पूरी होने के बाद खाया-पिया और उसके एक घंटे बाद ही मेरी फाइट थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
अस्मिता डे - फोटो : PTI
इस स्वर्णिम जीत ने ग्लासगो में भारत के पदकों की संख्या में इज़ाफा किया है और राष्ट्रमंडल स्तर पर जूडो में देश के निरंतर सुधार को भी रेखांकित किया है। अस्मिता की यह उपलब्धि भारतीय जूडो की वैश्विक प्रगति का प्रमाण है और यह आने वाली पीढ़ी के एथलीटों के लिए एक बड़ी प्रेरणा साबित होगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें