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अमर उजाला शिक्षक सम्मान: बच्चों के वोट से जीते गुरु जी, कहीं हंसी तो कहीं दिखे भावुक; देखें यादगार तस्वीरें

Sat, 12 Sep 2026 07:46 PM IST
अनुज कुमार माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा

सार

Amar Ujala Teacher Award: शनिवार को अमर उजाला शिक्षक सम्मान समारोह के चौथे संस्करण में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शिक्षकों को संबोधित किया। नोएडा, ग्रेटर नोएडा व गाजियाबाद के 210 स्कूलों के 211 शिक्षकों को सेक्टर-125 स्थित एमिटी विश्वविद्यालय में सम्मानित किया गया।
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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : अमर उजाला/लाल सिंह
शिक्षकों पर कल का भारत बनाने की जिम्मेदारी है। शिक्षक साधारण व्यक्तित्व नहीं है कल का भारत कैसा होगा यह आज का शिक्षक तय करेगा। शिक्षक में सृजन की शक्ति होती है। इसलिए बेहतर भविष्य गढ़ने की जिम्मेदारी भी आप पर है। यह बातें शनिवार को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अमर उजाला शिक्षक सम्मान समारोह के चौथे संस्करण के मौके पर शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहीं।
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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
सेक्टर-125 स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी के ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में नोएडा, ग्रेटर नोएडा व गाजियाबाद के 210 स्कूलों के 211 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। हर स्कूल से उत्कृष्ट शिक्षक का चयन 95 हजार से ज्यादा छात्रों ने मतदान के जरिए किया था। शिक्षक व उनके परिजनों से भरे ऑडिटोरियम में उपमुख्यमंत्री ने मौजूदा परिदृश्य को लेकर कहा कि आज वैश्विक चुनौती खड़ी है। इंटरनेट ने दुनिया मुट्ठी में कर दी है।
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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
आने वाली पीढ़ी सिर्फ नौकरी करने के लिए ही तैयार न की जाए यह देखना होगा। आज छात्रों में फर्स्ट क्लास से पास होने की खुशी नहीं है। 99 के बाद भी दशमलव में प्रतिशत कम होने का अफसोस दिखता है। डीयू में एडमिशन की होड़ दिख रही है। ऐसे एडमिशन का मकसद कैंपस प्लेसमेंट रहता है। शिक्षकों की यह जिम्मेदारी है कि बच्चों के अंदर ऐसी प्रतिभा गढ़ें कि वह नौकरी लेने वाले नहीं देने वाले बनें। यह जिम्मेदारी है कि बच्चों को ऐसे निखारें कि दुनिया उनको फॉलो करे। 

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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
शिक्षक को बच्चों को पढ़ाना ही नहीं होता है, माता-पिता का प्यार भी देना होता है। बच्चा माता-पिता से ज्यादा समय शिक्षक के साथ रहता है। बच्चा शिक्षकों से संस्कार सीखता है। शिक्षक पर बड़ी जिम्मेदारी है और इस जिम्मेदारी का इतिहास गौरवशाली रहा है। भारत सबकुछ कर सकता है अगर शिक्षक चाह लें। इसलिए शिक्षकों पर बड़ी जिम्मेदारी है।
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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
वोट लेना कितना मुश्किल है यह सभी को समझ में आया होगा
शिक्षकों को सम्मानित करने के साथ उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वोट लेना कितना मुश्किल है ये आप सभी को समझ में आ गया होगा। बच्चों का वोट लेना और भी कठिन है। सबसे ज्यादा वोट हासिल करने वाले शिक्षकों ने अपना सर्वोत्तम दिया होगा। सभी ने वोट के लिए बहुत मेहनत की होगी। सम्मान के लिए मतदान की पारदर्शी मोबाइल व कंप्यूटर आधारित व्यवस्था को सराहते हुए कहा कि इसमें बैलेट पेपर की तरह कोई गुंजाइश भी नहीं रही होगी।
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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
जन-जन का अखबार बन चुका है अमर उजाला
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि अमर उजाला केवल एक अखबार नहीं है। हर परिस्थिति में जनता के साथ खड़े होकर आवाज सरकार के सामने अमर उजाला ने उठाने का काम किया। आज अमर उजाला जन-जन का अखबार बन चुका है। इस अखबार ने आपातकाल में भी जनता की आवाज उठाई।

 
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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
हम असुरक्षा की भावना से घिरे हुए हैं
मौजूदा समाज की स्थिति को लेकर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हम असुरक्षा की भावना से घिरे हुए हैं। हर आदमी एक-दूसरे को गिराकर आगे बढ़ना चाह रहा है। भारत की यह संस्कृति कभी नहीं रही है। बेहतर समाज के लिए हमें दूरी खत्म करनी होगी। दूरी बनाने वालों को मिटाना है। पद, उपलब्धियां हासिल करने का वहम छोड़ना होगा। किसी भी एक चीज को देखने का नजरिया अलग-अलग हो सकता है। लेकिन जरूरत अपने अहम को समाप्त करना है।

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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
शब्दभेदी बाण आज की गाइडेड मिसाइल
ब्रजेश पाठक ने कहा कि भारत बड़ी ज्ञान की परंपरा का वाहक रहा है। प्राचीन काल में जो शब्दभेदी बाण का जिक्र आता है वो आज की गाइडेड मिसाइल हैं। नालंदा और विक्रमशिला जैसे भारतीय शिक्षा के प्रमुख केंद्रों को कई बार निशाना बनाया गया लेकिन हमारी ज्ञान परंपरा नहीं डिगी।

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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
शिक्षकों को उनका अधिकतम मिले
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वह हमेशा इस पक्ष में रहते हैं कि शिक्षकों को उनका अधिकतम मिले। गुरु द्रोणाचार्य के जीवन यापन से जुड़ा उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज भी शिक्षकों का बड़ा तबका न्यूनतम व्यवस्था में जिंदगी चला रहा है। शिक्षक चिंतामुक्त होंगे तो अभिभावक भी चिंतामुक्त रहेंगे।

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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
चार साल में बढ़ा शिक्षकों को सम्मान देने का मंच
शिक्षकों के समर्पण और योगदान को पहचान देने के लिए अमर उजाला की ओर से आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह-2026 में इस बार भागीदारी का दायरा और बढ़ा है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के स्कूलों की बढ़ती संख्या इस पहल के प्रति शिक्षा जगत के बढ़ते विश्वास को दर्शा रही है। चार वर्षों में समारोह से जुड़ने वाले स्कूलों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है।

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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
2023 में 104 स्कूलों से शुरू हुआ सफर, 2026 में 210 स्कूलों तक पहुंचा दायरा
शिक्षक सम्मान समारोह की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी। उस समय नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के 104 स्कूल इसमें शामिल हुए थे। इसके बाद वर्ष 2024 में स्कूलों की भागीदारी बढ़कर 143 हो गई। वर्ष 2025 में 176 स्कूलों ने शिक्षकों को सम्मान दिलाने के लिए इस पहल में हिस्सा लिया, जबकि वर्ष 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 210 स्कूलों तक पहुंच गया।

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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
समारोह के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान भी स्कूलों में खासा उत्साह देखने को मिला। पंजीकरण की अंतिम तिथि तक कई स्कूलों ने अपने शिक्षकों के नाम भेजे। अंतिम दिनों में भी बड़ी संख्या में स्कूलों ने संपर्क कर इस पहल का हिस्सा बनने की इच्छा जताई।शिक्षक सम्मान समारोह के माध्यम से शिक्षकों के नवाचार, विद्यार्थियों के प्रति उनकी जिम्मेदारी और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को पहचान मिल रही है। चार वर्षों में बढ़ता यह दायरा शिक्षकों के प्रति बढ़ते सम्मान का प्रमाण बन रहा है।

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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
गुरु चुनने के बहाने बच्चों ने समझी वोट की ताकत, 210 स्कूलों में हुआ मतदान
उंगली पर लगी स्याही की एक लकीर... चेहरे पर मतदान करने का उत्साह और मन में अपने पसंदीदा शिक्षक को चुनने का गर्व। अमर उजाला शिक्षक सम्मान समारोह-2026 में बच्चों ने शिक्षक चुनने के साथ लोकतंत्र का अपना पहला व्यावहारिक पाठ भी पढ़ा। अभी 18 वर्ष की उम्र पूरी न करने वाले इन विद्यार्थियों ने मतदान केंद्र के रूप में तैयार स्कूल की कंप्यूटर लैब पर पहुंचकर जाना कि लोकतंत्र में हर वोट की अपनी ताकत होती है और हर मत की अपनी अहमियत।

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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
विद्यार्थियों ने कतार में लगकर अपने पसंदीदा शिक्षक के पक्ष में मतदान किया। मतदान के बाद उंगली पर लगी स्याही बच्चों के लिए उत्साह का विषय बनी। यह स्याही उनके लिए केवल मतदान की पहचान नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पहली भागीदारी की याद भी बन गई। इस पूरी प्रक्रिया में बच्चों ने मतदान की गोपनीयता, पारदर्शिता और अपनी पसंद से प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया को करीब से समझा।
 

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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
श्याम सिंह स्मारक इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य गीता शर्मा ने कहा कि इस समारोह से बच्चों को महसूस हुआ कि लोकतंत्र केवल किताबों में पढ़ी जाने वाली व्यवस्था नहीं, बल्कि अपनी पसंद और निर्णय के अधिकार से जुड़ी व्यवस्था है। अपने एक वोट के जरिए शिक्षक का चुनाव करने का अनुभव बच्चों के लिए खास रहा। ग्रीन वैली अकादमी से जुड़ी सुमन शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों को कम उम्र में ही लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ना भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। आज शिक्षक चुनने के लिए वोट करने वाले यही बच्चे कल देश के मतदाता बनेंगे। मतदान की यह प्रक्रिया उनमें जिम्मेदारी, निर्णय लेने की क्षमता और अपने मताधिकार के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद करेगी।

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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
हर शिक्षक ने बच्चों को कहा धन्यवाद मानव रचना इंटरनेशनल स्कूल से विजेता शिक्षक स्तुति शर्मा ने कहा कि बच्चें उन्हें चुनेंगे यह उम्मीद नहीं थी। उन्होंने पिछले कुछ साल अपने जीवन के सिर्फ बच्चों को पढ़ाने और दूसरी तरफ घर संभालने में गए। बच्चों में कैसे उनके प्रति विश्वास कायम हुआ और उन्हें चुना, पता ही नहीं चला। लोकतंत्र का यह अहसास सिर्फ बच्चों ने ही नहीं, बल्कि शिक्षकों ने भी अच्छे से समझा और उसका हिस्सा बनने का अवसर मिला। इसके लिए बच्चों का भी धन्यवाद, जिन्होंने यह अवसर अपने लोकप्रिय शिक्षक को दिया।

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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
रिपोर्ट कार्ड देखकर खुद पास होकर मुस्कुराए गुरु जी
लाल स्याही से बच्चों की कॉपियां जांचने, गलतियों पर टोकने और रिपोर्ट कार्ड पर ग्रेड तय करने वाले गुरुजी शनिवार को उसी बेचैनी से गुजर रहे थे जिससे हर बच्चा परीक्षा हॉल से लेकर परिणाम जारी होने तक महसूस करता है। फर्क सिर्फ इतना था कि आज वह परीक्षक नहीं परीक्षार्थी थे। उनका इम्तिहान किसी शिक्षा बोर्ड ने नहीं बल्कि उनकी कक्षाओं के बच्चों ने लिया था। जिन्होंने अपने पसंदीदा शिक्षक से बिना बताए वोट किया था।
 

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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
शिक्षक सम्मान समारोह के सभागार के बाहर भारी-भरकम वीआईपी सुरक्षा, पुलिस के हूटर और डिप्टी सीएम के प्रोटोकॉल का सख्त पहरा था लेकिन हॉल के भीतर की हवा चॉक और डस्टर से बुने गए रिश्तों की खुशबू से महक रही थी।

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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
यही वजह रही कि मंच से नाम पुकारे जाने के बाद एक 45 वर्षीय शिक्षक की आंखें छलक आईं। मंच से उतरते ही उन्होंने अपनी जेब से चश्मा निकाला, रुमाल से पोछा और धीरे से बोले, जिंदगी में कई सम्मान पत्र मिले पर जब सुबह स्कूल के एक बच्चे ने फोन करके कहा कि सर, हमने जीता दिया, ट्रॉफी लेकर ही लौटना... तो लगा कि 22 साल की नौकरी आज सफल हुई।
 

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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
गणित के खौफ को चुटकुलों में उड़ाना सिखाया
शिक्षक सम्मान समारोह का सम्मान पाने के बाद वहां पर कोई पाठ्यक्रम, वेतन या ट्रांसफर की बात नहीं कर रहा था। एक ओर खड़ी विज्ञान की शिक्षिका फोन पर अपने क्लास मॉनिटर को वीडियो कॉल पर ट्रॉफी दिखा रही थीं और दूसरी तरफ से बच्चों के शोर और तालियों की गूंज मोबाइल पर सुनाई दे रही थी।

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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
अधिकतर शिक्षक सम्मान समारोहों में चयन का आधार अनुभव के साल, फाइलों का वजन या मैनेजमेंट की सिफारिश होती है, लेकिन यहां बच्चों की मासूमियत ने दिल जीत लिया था। किसी शिक्षक को इसलिए सबसे ज्यादा वोट मिले थे क्योंकि वह लंच बॉक्स नहीं लाने वाले बच्चे को अपनी रोटी खिलाते थे तो किसी को इसलिए क्योंकि उन्होंने गणित के खौफ को चुटकुलों में उड़ाना सिखाया था।
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अमर उजाला शिक्षक सम्मान - फोटो : लाल सिंह
बच्चों ने कहा... यू आर द बेस्ट सर
समारोह खत्म होने के बाद जब डिप्टी सीएम का काफिला सायरन बजाते हुए निकल गया, तब भी सभागार की सीढ़ियों पर शिक्षक खड़े थे, हाथ में शील्ड थामे, लेकिन नजरें अपने फोन के उन व्हाट्सएप मैसेज पर थीं, जहां बच्चे लिख रहे थे... यू आर द बेस्ट सर। इसके साथ ही सम्मान पाकर शिक्षकों ने जब बच्चों को फोटो भेजी, तो बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
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