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निर्भया का भाई बना पायलट, राहुल गांधी ने की थी मदद

Fri, 03 Nov 2017 09:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की बयानबाजी अक्सर मीडिया की सुर्खियां बनती है, लेकिन वे कितने उदार दिल हैं, इसकी बानगी राजधानी के वसंतकुंज इलाके में चलती बस में गैंग रेप की शिकार हुई निर्भया की मां के मुंह से सुनी जा सकती हैं।
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राहुल गांधी - फोटो : SELF
राहुल न केवल उस विभत्स घटनाक्रम के बाद निर्भया के परिजनों को हाल जानते रहे बल्कि उसके भाई को पायलट बनने में भी मदद की ताकि वह परिवार का सहारा बन सके। राहुल की ओर से उसकी पढ़ाई में की गई मदद का नतीजा है कि आज वह पायलट ट्रेनिंग पूूरी करने के अंतिम पड़ाव पर है। निर्भया की मां आशा देवी ने बेटे की पढ़ाई के लिए दिए गए सहयोग के लिए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का आभार व्यक्त किया है।
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राहुल गांधी - फोटो : SELF
उन्होंने कहा कि राहुल ने निर्भया के भाई की पढ़ाई में बहुत मदद की, जिस कारण वह अब पायलट बनने जा रहा है और जल्द ही प्लेन उड़ाने की तैयारी कर रहा है। इतना ही नहीं प्रियंका गांधी भी फोन कर उनके परिवार का हालचाल पूछती रहती हैं।

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राहुल गांधी - फोटो : SOCIAL MEDIA
निर्भया की मां ने कहा कि उनकी बेटी के साथ हुई दर्दनाक घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इसके बाद निर्भया के छोटे भाइयों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही थी। उसी दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष ने उनके बेटे अमन (परिवर्तित नाम) की पायलट बनने की पढ़ाई में मदद की। अमन ने उत्तर-प्रदेश के रायबरेली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी से पढ़ाई पूरी की है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की वजह से ही उनका बेटा वर्तमान में गुरुग्राम स्थित एक व्यावसायिक एयरलाइंस में पायलेट की ट्रेनिंग के अंतिम पड़ाव में है और जल्द ही प्लेन भी उड़ाएगा। 
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rahul gandhi
ट्रेनिंग के दौरान भी संपर्क में रहे राहुल
उन्होंने कहा कि 18 महीने के पायलेट ट्रेनिंग कोर्स के दौरान राहुल लगातार उसके बेटे के संपर्क में रहे और वह अक्सर फोन करके परिवार के हालात के बारे में पूछते थे। उन्होंने कहा कि राहुल की बहन प्रियंका गांधी भी फोन करके उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछती रहती हैं।  गौरतलब है कि 29 दिसम्बर 2012 को छह दरिंदों ने निर्भया कांड को अंजाम दिया था। इस वारदात के एक आरोपी ने गिरफ्तारी के बाद तिहाड़ जेल में मार्च 2013 में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी, जबकि एक आरोपी नाबालिग था, जिसे तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेजा गया था, जो 2015 में छूट गया। इस मामले के चार आरोपियों मुकेश (29), पवन (22), विनय शर्मा (23) और अक्षय कुमार (31) को सुप्रीम कोर्ट द्वारा फांसी की सजा सुनाई गई थी। चारों आरोपी वर्तमान में तिहाड़ जेल में बंद हैं।
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