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क्या है फॉर्म 42 जिसमें दर्ज है निर्भया के गुनहगारों के मौत का फरमान, फांसी के लिए अहम दस्तावेज

Wed, 08 Jan 2020 11:25 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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निर्भया के दोषियों को होगी फांसी - फोटो : Amar Ujala
निर्भया गैंगरेप के चारों दोषियों को फंदे पर लटकाए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को ब्लैक वारंट यानि डेथ वारंट जारी कर दिया। इसके अनुसार दोषियों को 22 जनवरी को सुबह सात बजे फांसी दी जाएगी। डेथ वारंट के फार्म नंबर 42 में दोषियों की फांसी की सजा की जानकारी विस्तार से लिखी है। जानिए क्या है फार्म 42 जिसमें दोषियों का कच्चा चिट्ठा मौजूद होता है और कई महत्वपूर्ण जानकारियां होती हैं...
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फार्म नंबर 42 - फोटो : अमर उजाला
फार्म के पहले कॉलम में उस जेल का नंबर लिखा है, जिसमें दोषियों को फांसी दी जाएगी। अगले कॉलम में दोषियों के नाम लिखे हैं। इसी फार्म पर एफआईआर नंबर लिखा है और उस तारीख का जिक्र है जिस दिन ब्लैक वारंट जारी हुआ है।
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निर्भया के दोषी - फोटो : अमर उजाला
इसके अगले कॉलम में फांसी के दिन की तारीख, समय और किस जगह फांसी दी जाएगी यह सब लिखा है। फार्म में साफ-साफ लिखा है कि जिन दोषियों को फांसी दी जा रही है उन्हें तब तक फंदे पर लटकाया जाए जब तक उनकी मौत न हो जाए। सबसे नीचे समय, दिन और ब्लैक वारंट जारी करने वाले जज के हस्ताक्षर हैं। दोषियों को फांसी देने के बाद जेल प्रशासन को उनकी मौत से जुड़े कागजात और फांसी हो गई है इसकी जानकारी लिखित रूप से कोर्ट को देता है। 

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इसी बस में हुई थी हैवानियत - फोटो : अमर उजाला
दोषियों के पास अभी भी है क्यूरेटिव और दया याचिका का विकल्प
निर्भया के दोषियों को फांसी देने की तारीख और समय तय हो गया है, लेकिन दोषी पक्ष सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दाखिल करने की बात कह रहा है। अगर क्यूरेटिव याचिका को स्वीकार कर लिया जाता है, तो दोषियों की फांसी का फैसला स्थगित हो सकता, लेकिन अगर क्यूरेटिव याचिका खारिज कर दी जाती है तो दोषियों के पास राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर करने का भी विकल्प है। हालांकि निर्भया के वकील ने दोषियों की क्यूरेटिव याचिका खारिज होने की संभावना जताई है।
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nirbhaya case - फोटो : अमर उजाला
पटियाला हाउस कोर्ट ने जब निर्भया के चारों दोषियों मुकेश, विनय, पवन और अक्षय को फांसी देने का फैसला सुनाया तो कोर्ट रूम में मौजूद अधिकतर चेहरों पर खुशी दिखाई दी, लेकिन दोषियों के पक्ष के चेहरों का रंग उड़ गया। इसके बाद दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा कि उन्होंने क्यूरेटिव याचिका तैयार कर ली है। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किलों के परिवारों की आर्थिक हालत को देखते हुए उन्हें फांसी से राहत मिलनी चाहिए, क्यूंकि सभी दोषियों के परिवार इस वक्त बेहद खराब स्थिति से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दायर करके वह पटियाला हाउस कोर्ट के इस फैसले का चुनौती देंगे। कानूनी प्रक्रिया के तहत अभी उनके पास दो विकल्प बाकी हैं।
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वसंत विहार बस स्टॉप - फोटो : अमर उजाला
सरकारी वकील राजीव मोहन के मुताबिक क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने के लिए जरूरी है कि दोषियों की पुनर्विचार याचिका सर्कुलेशन में खारिज हुई हो, लेकिन इस मामले में याचिका ओपन कोर्ट में सुनवाई होकर खारिज हुई है। डेथ वारंट जारी होने के बाद मामला खत्म नहीं होता, फांसी के लिए दोषियों को 14 सप्ताह का समय दिया जाता है। दिए गए समय का उपयोग क्यूरेटिव याचिका व दया याचिका के लिए किया जा सकता है, अगर याचिका पेंडिंग रहती है तो अगला फैसला आने तक फांसी वैसे ही रूक जाएगी। 
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शुरूआत के कुछ दिनों तक सतर्क रही पुलिस - फोटो : अमर उजाला
निर्भया के वकील जितेन्द्र झा ने शत्रुघ्न चौहान मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि 14 दिन का समय दोषियों को दिया गया है, लेकिन इस बीच उनकी क्यूरेटिव याचिका स्वीकार नहीं होगी, क्यूंकि दोषी के वकील सिर्फ समय खराब कर रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले को सुनकर ही पुनर्विचार याचिका खारिज की थी। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट भी इस केस में दोषियों को फांसी देने में देरी नहीं चाहते।
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