फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निर्भया केसः क्या 20 मार्च को भी नहीं होगी दोषियों को फांसी, ये हो सकता है कारण

Thu, 19 Mar 2020 12:00 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
- फोटो : सोशल मीडिया
निर्भया के दोषियों को 20 मार्च को सुबह 5.30 बजे फांसी होनी है। 7 जनवरी के दिन जब पहली बार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी तब से अब तक उनकी फांसी तीन बार टल चुकी है। अब चौथी बार इनकी फांसी की तारीख नजदीक आ चुकी है, ऐसे में आज दिन निर्णायक है कि दोषियों को कल फांसी होगी या नहीं। दोषियों ने पिछले 14 दिनों में खुद को बचाने के लिए कई याचिकाएं डाली हैं। यही नहीं दोषी अक्षय की पत्नी ने तो तलाक की अर्जी डाल दी है। इस तरह कई ऐसे केस हैं जो कल होने वाली दोषियों की फांसी में बाधा बन सकते हैं, पढ़ें पूरा मामला...
विज्ञापन

2 of 6
nirbhaya case - फोटो : अमर उजाला
फांसी टलवाने के लिए निर्भया के दोषी लगातार दांव चल रहे हैं। बुधवार को दोषियों ने विभिन्न याचिकाएं और अपील लंबित होने को आधार बना कर फांसी टलवाने के लिए पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने इस पर तिहाड़ जेल प्रशासन और पुलिस से जवाब मांगा है। अब गुरुवार की सुनवाई में तय होगा कि दोषियों को 20 को फांसी होगी या नहीं।
विज्ञापन

3 of 6
निर्भया की मां और पिता - फोटो : PTI
निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए पहले जारी किए गए तीन डेथ वारंट पर कानूनी विकल्पों के तहत रोक लग चुकी है और अब चौथे डेथ वारंट पर भी रोक की आशंका पैदा हो गई है। दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए पहला डेथ वारंट 7 जनवरी को जारी किया गया था और तब से लेकर अब तक देशभर के लोगों को दोषियों की फांसी का इंतजार है। उल्लेखनीय है कि 16-17 दिसंबर 2012 की रात फिथिजियोरेपी की 23 वर्षीय छात्रा से दक्षिणी दिल्ली के वसंत विहार इलाके में चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया था।

4 of 6
निर्भया केस के दोषियों को प्रतीकात्मक रूप से फांसी पर लटकाया। - फोटो : अमर उजाला।
इस घटना के दौरान पीड़िता को गंभीर हालत में चलती बस से फेंक दिया गया था। इस घटना के बाद उपचार के दौरान करीब 15 दिन बाद छात्रा की सिंगापुर के अस्पताल में मौत हो गई थी। इस नृशंस घटना के बाद में मृतका को देश में निर्भया का नाम दिया गया था। इस मामले में छठे आरोपी राम सिंह ने मामले की सुनवाई शुरू होने के बाद कथित रूप से तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी। वह दोषी मुकेश रामसिंह का सगा भाई था। इसके अलावा पांचवें नाबालिग आरोपी को सुधार गृह में तीन साल रखने के बाद 2015 में छोड़ दिया गया था।
विज्ञापन

5 of 6
Nirbhaya case - फोटो : अमर उजाला
पहला डेथ वारंट
पहला डेथ वारंट 7 जनवरी को जारी किया गया था। इसके मुताबिक दोषियों को 22 फरवरी को सुबह 7 बजे फांसी होनी थी, लेकिन दोषियों के कानूनी विकल्पों के चलते इस डेथ वारंट पर रोक लग गई थी।

दूसरा डेथ वारंट
दूसरा डेथ वारंट 17 जनवरी को जारी किया गया था। इसके अनुसार दोषियों को एक फरवरी 2020 को फांसी होनी थी, लेकिन यह डेथ वारंट भी कानूनी विकल्पों चलते स्थगित हो गया।

तीसरा डेथ वारंट
तीसरा डेथ वारंट 17 फरवरी को जारी कर दोषियों को 3 मार्च की सुबह 6 बजे फांसी देने का आदेश दिया गया था, लेकिन 2 मार्च को कोर्ट ने दोषी की दया याचिका लंबित होने के कारण वारंट पर पर रोक लगा दी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
nirbhaya case - फोटो : अमर उजाला
दोषियों के क्यूरेटिव और दया याचिका विकल्प हो चुके हैं समाप्त
दोषियों की क्यूरेटिव याचिका और दया याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। क्यूरेटिव याचिका और दया याचिकाएं ही दोषियों के पास फांसी को टलवाने के लिए आखिरी उपचार था। अब यह दोषी दोबारा क्यूरेटिव और दया याचिकाएं दायर कर अपनी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलवाने की कोशिशें कर रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें