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निर्भया केसः संयुक्त राष्ट्र हुआ राजी तो दोषियों की मौत की तारीख को मनाया जाएगा ये दिवस

Sat, 07 Mar 2020 12:32 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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निर्भया केस - फोटो : अमर उजाला
महिला कार्यकर्ता और गैर सरकारी संगठन पीपल अगेंस्ट रेप्स इन इंडिया (परी) की संस्थापक योगिता भयाना ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) को पत्र लिखकर मांग की है कि 20 मार्च, 2020 को निर्भया के दोषियों को फांसी दी जानी है। इसके साथ ही उन्होंने यूएन से यह मांग की है कि दोषियों की फांसी की तारीख को हर साल एक खास दिवस के रूप में मनाया जाए। अगर यूएन इसके राजी होता है हर साल दोषियों की फांसी की तारीख को इस रूप में मनाया जाएगा, इसके साथ ही जानिए कि दोषी मुकेश ने दया याचिका टालने के लिए अब क्या नया पैंतरा चला है...
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- फोटो : अमर उजाला
एनजीओ ने मांग की है कि यूएन दोषियों की फांसी की तारीख को 'दुष्कर्म रोकथाम दिवस' के तौर मनाने का एलान करे। इससे हर भारतीय को निर्भया और उसके परिवार ने जो सहा, उसे ध्यान में रखते हुए भारत को दुष्कर्म मुक्त होने की दिशा में कदम उठाने की प्रेरणा मिलेगी।
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- फोटो : अमर उजाला/सोशल मीडिया
उन्होंने यह पत्र यूएन वूमन इंडिया की डिप्टी प्रतिनिधि निष्ठा सत्यम को लिखा है। उन्होंने कहा है कि जिस तरह से गांधी जयंती को महज गांधी के जन्म दिवस के तौर पर नहीं मनाया जाता, बल्कि गांधी के विचारों और उनकी शख्सियत के रूप में मनाया जाता है। उसी तरह यह दिवस भी दुष्कर्म रोकथाम दिवस के रूप में मनाया जाए।

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- फोटो : अमर उजाला
इस बीच दरिंदे मुकेश ने फांसी टालने को चली नई चाल
निर्भया के दरिंदे मुकेश कुमार सिंह ने 20 मार्च को होने वाली फांसी टालने के लिए फिर नया पैंतरा चला है। उसने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर फिर सुधारात्मक याचिका (क्यूरेटिव पिटीशन) और राष्ट्रपति के समक्ष दया अर्जी लगाने की अनुमति मांगी। उसने पूर्व वकील व न्याय मित्र वृंदा ग्रोवर पर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए अपने सभी कानूनी उपायों की बहाली की मांग की। मुकेश समेत चारों दरिंदे सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल पहले ही कर चुके हैं। इस आधार पर पटियाला हाउस कोर्ट ने गुरुवार को चौथी बार डेथ वारंट जारी करते हुए चारों को फांसी पर लटकाने की तारीख 20 मार्च तय की है।
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- फोटो : सोशल मीडिया
वकील मनोहर लाल शर्मा के जरिये दायर याचिका में मुकेश ने इस मामले में न्याय मित्र ग्रोवर, दिल्ली और केंद्र सरकार द्वारा की गई कथित आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी की सीबीआई से जांच की मांग की। साथ ही कहा कि छह दिसंबर 2019 से लेकर तीन मार्च 2020 के बीच के निर्भया मामले में दिए गए सभी आदेशों को रद्द किया जाना चाहिए। याचिका में उसने ग्रोवर पर आरोप लगाया कि उन्होंने उसे बताया ही नहीं कि सुधारात्मक याचिका दायर करने के लिए तीन वर्ष का वक्त होता है। 
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- फोटो : अमर उजाला
याचिका में कहा गया है कि लिमिटेशन एक्ट की धारा-137 के तहत याचिका दायर करने की सीमा तय है। वहीं, जिनमें याचिका दायर करने की समय सीमा तय नहीं है, उसमें तीन वर्ष का वक्त होता है। ऐसे में मुकेश के लिए सुधारात्मक याचिका की सीमा जुलाई 2021 तक है। मुकेश ने आरोप लगाया कि न्याय मित्र ने जबरन दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवा कर याचिका दायर की। लिहाजा उसे दोबारा याचिका दायर करने की इजाजत दी जाए। उसने कहा कि उसके खिलाफ साजिश हुई और सही जानकारी नहीं दी गई। इससे उसके मौलिक अधिकार का हनन हुआ।
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