निर्भया के चारों दोषी
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अगर राष्ट्रपति ने इनकी दया याचिका खारिज कर दी, तो इन दोनों की फांसी तय है। लेकिन अगर राष्ट्रपति इस मामले में 22 जनवरी से पहले कोई फैसला नहीं लेते हैं, तो फांसी में अड़चन आ सकती है। मालूम हो कि राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद-72 के तहत दया याचिका पर सुनवाई करते हैं। इस दौरान राष्ट्रपति गृह मंत्रालय से रिपोर्ट मांगते हैं। सरकार अपनी सिफारिश राष्ट्रपति को भेजती है और फिर राष्ट्रपति दया याचिका का निपटारा करते हैं। अगर राष्ट्रपति दया याचिका खारिज कर देते हैं तो उसके बाद मुजरिम को फांसी पर लटकाने का रास्ता साफ हो जाता है।