निर्भया केस
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फांसी से दो दिन पहले जल्लाद पहुंचता है जेल और वहीं रहता है
कैदी को एक स्पेशल वॉर्ड की सेल में अलग रखा जाता है। फांसी की तैयारी की पूरी जिम्मेदारी जेल अधीक्षक की होती है। वो सुनिश्चित करते हैं कि फांसी का तख्ता, रस्सी, नकाब समेत सभी चीजें तैयार हों। उन्हें देखना होता है कि फांसी का तख्ता ठीक से लगा हुआ है, लीवर में तेल डला हुआ है, सफाई करवानी होती है, रस्सी ठीक हालत में है। फांसी के एक दिन पहले शाम को, फांसी के तख्ते और रस्सियों की फिर से जांच की जाती है। रस्सी पर रेत के बोरे को लटकाकर देखा जाता है, जिसका वजन कैदी के वजन से डेढ़ गुना ज्यादा होता है। जल्लाद फांसी वाले दिन से दो दिन पहले ही जेल आ जाता है और वहीं रहता है।