फरीदाबाद में सोमवार को निकिता के साथ हुई दिल दहला देने वाली घटना को लेकर लोगों में आक्रोश जरूर नजर आ रहा है। यह गुस्सा कोई नया नहीं है। हर बार जब कोई बेटी ऐसे राक्षसों की बली चढ़ जाती है तो लोगों का खून उबलता है, इंसाफ की मांग उठती है, आवाजें बुलंद होती हैं, लेकिन विडंबना है कि यह सब महज ढोंग भर है।
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क्या इन्हें नहीं सुनाई दी होंगी निकिता की चीखें
- फोटो : अमर उजाला
वाकई अगर बेटियों की रक्षा को लेकर हमारे समाज के लोग सजग होते तो किसी तौसीफ की हिम्मत न होती कि सड़क किनारे कार खड़ी करके पहले निकिता के साथ जबरदस्ती करे और फिर उसे गोली मारकर वहां से चला जाए। आज हम आपको तस्वीरों के माध्यम से दिखा रहे हैं निकिता की हत्या के बाद चीख-चीखकर इंसाफ और सुरक्षा की दुहाई देने वाले समाज की सच्चाई।
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क्या इन्होंने भी नहीं देखा निकिता के साथ वारदात होते हुए
- फोटो : अमर उजाला
निकिता की हत्या तब की गई जब वह कॉलेज से परीक्षा देकर लौट रही थी। इस बीच दो युवक कार से आए। उनमें से एक ने छात्रा को कार में जबरदस्ती बैठाने की कोशिश की। वह छात्रा को हर कोशिश कर पीछे की सीट पर बैठाने का प्रयास करता रहा। छात्रा भी पूरी ताकत से उसका मुकाबला करती रही। तौसीफ ने तो जुर्म को अंजाम देने का दुस्साहस किया, लेकिन इस जुर्म को होते देख जिन लोगों ने आवाज उठाने के बजाय नजरें नीचे कर लीं, क्या वो निकिता के गुनहगार नहीं हैं?
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क्या इनकी भी नजर नहीं गई होगी तौसीफ पर?
- फोटो : अमर उजाला
बीच-बीच में छात्रा की सहेली युवक को रोकती नजर आई। जब युवक ने देखा कि छात्रा आपे से बाहर हो रही है और किसी तरह वह उसे कार में नहीं बैठा पा रहा तो उसने अपनी बंदूक निकाल ली। उसने पहले तो बंदूक से छात्रा को डराया, फिर देखते ही देखते गोली मार दी। यह सब छात्रा के कॉलेज के सामने ही हुआ। ऐसा नहीं था कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान तौसीफ की हरकत पर किसी की नजर नहीं पड़ी। आने-जाने वाले लोगों ने सबकुछ देखा, लेकिन चुप रहना और नजरअंदाज करना बेहतर समझा।
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क्या ये नहीं रोक सकते थे तौसीफ को?
- फोटो : अमर उजाला
अब जब मामला सुर्खियों में आ गया है तो लंबी-लंबी बहसें हो रही हैं। निकिता को इंसाफ और देश की बेटियों को सुरक्षा देने की बातें कही जा रहीं हैं। यह आवाज अगर उस समय उठाई गई होती जब तौसीफ निकिता को जबरदस्ती कार में बिठाने की कोशिश कर रहा था, तो क्या आज निकिता की जान नहीं बच गई होती? ऐसे समय पर आवाज उठाने की जिम्मेदारी किसकी है?
क्या ये निकिता की जान बचाने के लिए कुछ नहीं कर सकती थीं?
- फोटो : अमर उजाला
जब तौसीफ सड़क किनारे निकिता को बंदूक दिखाकर डरा रहा था, उस समय क्या उसकी चीखें किसी ने नहीं सुनी होंगी? यह तस्वीरें गवाह हैं कि कैसे असंवेदनशील और भयभीत लोगों ने आंखें झुकाकर निकिता की हत्या होने की और किस तरह इस गूंगे, बहरे और अंधे समाज में सरेआम एक सनकी युवक ने एक होनहार छात्रा की जान ले ली। इन तस्वीरों को देखिए और सोचिए कि क्या निकिता की हत्या के लिए केवल तौसीफ ही जिम्मेदार है...?