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सालों पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के पिता ने कही थी जो बात आज हुई सच, पढ़ें उनके अनसुने किस्से

Wed, 03 Oct 2018 12:08 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ranjan gogoi - फोटो : पीटीआई
आज देश को जस्टिस रंजन गोगोई के रूप में नया चीफ जस्टिस मिल गया है। जस्टिस रंजन गोगोई भारत के 46वें चीफ जस्टिस बन गए हैं। ऐसे में उनके पिता केसब गोगोई की कही एक बात भी सच हो गई है जो उन्होंने सालों पहले बेटे के बारे में कही थी। जिस विश्वास और दृढ़ता के साथ वो बात कही गई थी, उसी तरह वह सच भी हुई है। जानिए क्या है वो बात, ये कब कही गई थी। साथ ही ये भी पढ़ें कि आखिर उनके साथी जज उनके बारे में कैसी राय रखते हैं और दिल्ली से उनका क्या रिश्ता रहा है।
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बीते 25 अगस्त को गुवाहाटी में 'गुहाटी हाईकोर्ट, हिस्ट्री एंड हेरिटेज' नाम की किताब का लोकार्पण सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीष जस्टिस एसए बोबडे ने किया। इस किताब की रिलीज के दौरान हाईकोर्ट के कई जज वहां मौजूद थे जिन्होंने कई मजेदार किस्से सुनाए। इस किताब के अंदर एक हिस्सा है जिसे 'प्रोफेटिक कमेंट' नाम दिया गया है। इसके बारे में बताते हुए एक जज ने छोटी सी कहानी सुनाई कि असम के पूर्व कानून मंत्री अब्दुल मुहीब मजूमदार ने एक बार केसब गोगोई(गोगोई असम के मुख्यमंत्री रह चुके हैं) से पूछा था कि क्या उनका बेटा रंजन गोगोई कभी राजनीति में जाएगा और फिर क्या असम का मुख्यमंत्री बनेगा।
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गोगोई उस वक्त गुवाहाटी में एक बहुत सफल वकील थे। उनके पिता केसब चंद्र गोगोई ने बेटे के बारे में पूछे गए सवाल पर कहा था कि, 'नहीं, उनका बेटा राजनीति में नहीं आएगा और इसलिए वह असम का मुख्यमंत्री भी नहीं बनेगा लेकिन उसमें इतनी काबिलियत है कि एक दिन वो जरूर भारत का मुख्य न्यायाधीश बनेगा।' आज जब जस्टिस रंजन गोगोई भारत के नए मुख्य न्यायाधीष के रूप में शपथ ले चुके हैं तो उनके बारे में पिता की कही बात भी सच हो गई है।

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जस्टिस रंजन गोगोई के सुप्रीम कोर्ट के साथी जज कहते हैं, 'गोगोई बहुत कम बोलने वाले, दृढ़ निश्चय वाले और काम करने में विश्वास रखने वाले शख्स हैं। वह कम बोलते हैं पर काम करके दिखाते हैं। ' दक्षिण दिल्ली में स्थित एक सरकारी ग्रॉसरी की दुकान चलाने वाले शख्स भी जस्टिस रंजन गोगोई की सादगी का कायल है। वह बताता है कि जस्टिस रंजन गोगोई अक्सर उस दुकान पर अपने लिए मछली खरीदने आते रहे हैं। उसका कहना है कि इतना बड़ा जज खुद अपने लिए सामान लेने आए ये बहुत बड़ी बात है। जस्टिस रंजन गोगोई को काम के लिए पूरी तरह समर्पित होने के लिए जाना जाता है।
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वह हर केस की छोटी से छोटी बारीकी को पढ़ने और फाइल को बारीकी से देखकर वकीलों को चौंकाने के लिए जाने जाते हैं। जितनी जानकारी उनको होती है उतनी तो कई बार वकीलों को भी नहीं होती जिसके चलते वकील भी हैरान रह जाते हैं। जस्टिस गोगोई ने अपना करियर गुवाहाटी हाईकोर्ट में परमानेंट जज के तौर पर फरवरी 2001 में शुरू किया था। 2010 में उनका ट्रांसफर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में कर दिया गया जहां 2011 में उन्हें हाईकोर्ट चीफ जस्टिस बना दिया गया। 23 अप्रैल 2012 से वह सुप्रीम कोर्ट के जज हो गए और अब नॉर्थ-ईस्ट भारत से देश के चीफ जस्टिस बनने वाले वो पहले शख्स होंगे।
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जस्टिस गोगोई के पास अपनी कोई कार नहीं है और अभी हाल ही में उनकी मां शांति गोगोई जो असम में एक सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता हैं ने अपना एक पुराना घर उनके नाम किया है। जस्टिस गोगोई सुप्रीम के उन 11 जजों में शामिल हैं जिन्होंने अपनी सभी संपत्ति को सार्वजनिक किया है। दरअसल मई 1997 में एक प्रस्ताव पास किया था जिसमें न्यायपालिका को पारदर्शी बनाने के लिए जजों को अपनी संपत्ति घोषित करने की बात कही गई थी।
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जस्टिस गोगोई को जूनियर जज के रूप में जानने वाले उनके बारे में कहते हैं कि जस्टिस गोगोई, 'बड़े दिलवाले हैं लेकिन वो अपने विवेक से काम लेते हैं।' स्कूल की पढ़ाई के बाद जस्टिस गोगोई कॉलेज की पढ़ाई के लिए दिल्ली आ गए और डीयू के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में हिस्ट्री से ग्रैजुएशन पूरा किया। उन्होंने लॉ की पढ़ाई शुरू करने से पहले यहीं से एमए भी किया। उनके कई साथी छात्र जो अब कानून के ही क्षेत्र में हैं कहते हैं कि रंजन गोगोई पढ़ाई को लेकर काफी सीरियस थे और पढ़ाई के दौरान हमेशा ही बिना ज्यादा लाइमलाइट में आए अपनी पढ़ाई की। एक वरिष्ठ वकील का रंजन गोगोई के बारे में कहना है कि वह अपने ट्रेनिंग के दिनों से ही अनुशासन और कायदे में काम करते रहे हैं। वह सुबह 11:30 बजे ही ही बहुत से केस की सुनवाई करते हैं ताकि दिन बढ़ने के साथ ही भीड़ भी छंटती जाए।

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ranjan gogoi - फोटो : अमर उजाला
भारत में ये नियम है कि चीफ जस्टिस ही अपने उत्तराधिकारी का नाम सुझाता है। यह पहले से ही तय हो जाता है कि कौन चीफ जस्टिस बनेगा और कौन नहीं। आज तक के इतिहास में सिर्फ एक बार प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासन काल में ही इस प्रक्रिया में बाधा आई थी वरना हमेशा यह प्रक्रिया नियमानुसार चली। लेकिन 2018 सुप्रीम कोर्ट के इतिहास का सबसे अलग साल रहा है।

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जब 12 जनवरी 2018 के दिन सुप्रीम के 4 वरिष्ठ जजों ने मीडिया के सामने आकर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को लिखे खत को साझा कर दिया और गंभीर सवाल उठाए कि किस गलत तरीके से जजों को केस आवंटित किए जा रहे हैं। जो चार जज मीडिया के सामने आए थे उनमें जस्टिस रंजन गोगोई का नाम भी शामिल है।
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ranjan gogoi - फोटो : अमर उजाला
उनकी मौजूदगी से एक तरह की सनसनी फैल गई कि वो नए चीफ जस्टिस बनने वाले हैं और इस तरह सामने आकर वह मुख्य न्यायाधीश की कुर्सी भी गंवा सकते हैं। जस्टिस गोगोई इस समय नेशनल रजिस्टर फॉर सिटिजेन फॉर असम मामले की सुनवाई कर रहे हैं।
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