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नीमका जेल में बंद मासूमों के सपने को साकार करेगा जेल प्रशासन

Sun, 21 Aug 2016 08:24 AM IST
गौरव चौधरी/अमर उजाला, फरीदाबाद
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नीमका जेल - फोटो : अमर उजाला
‘मंजिल उनको मिलती है जिनके सपनों में जान होती है।’ यह पंक्तियों सहीं मायने में जेल में पिछले पांच साल से अपना बचपन काट रहे बच्चों पर सटीक बैठती है, इन होनहार बच्चों की प्रतिभा को जेल प्रशासन ने पहचाना और इनके हौसले को उड़ान देने की ठानी।   अपनी मां के साथ जेल में सजा काट रहे दो बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के मकसद से जेल प्रशासन ने मदद के हाथ बढ़ाए हैं। इन बच्चों की प्रतिभा को ध्यान में रख बोर्डिंग स्कूल में दाखिला दिलाया गया है।
जेल प्रशासन ने बच्चों की पढ़ाई के लिए एक निजी संस्था से संपर्क किया और बच्चों की उच्च स्तरीय शिक्षा का बीड़ा उठाने के लिए सहयोग मांगा। संस्था ने भी इस नई पहल के लिए हाथ बढ़ाने में देरी नहीं की। दोनों बच्चों की मां से रजामंदी मिलने के बाद उन्हें पढ़ाई के लिए जेल से बाहर भेजा गया है।   आमतौर पर जब बच्चे 6 साल के हो जाते है तो जेल प्रशासन बच्चों को उसके रिश्तेदारों के पास या फिर  अनाथ आश्रम में भेजे दिया करता है, लेकिन फरीदाबाद जिले की नीमका जेल ने मां के गुनाहों की सजा काटने वाले बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए उम्मीद की किरण जगाई है। नीमका जेल में ऐसा पहली बार किया गया है।
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संसाधनों के अभाव में भी मन लगाकर की पढ़ाई 

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- फोटो : अमर उजाला
जेल में पिछले पांच साल से अपनी मां के साथ रह रही पांच वर्षीय बच्ची महक और ऋषभ संसाधनों के अभाव में भी मन लगाकर पढ़ाई करते रहे। जब इस बारे में जेल अधिकारियों को पता चला तो वे बच्चों के साथ रूबरू हुए। इस पर बच्चों ने आगे की पढ़ाई करने की बात कही। बच्चों के इसी सपने साकार करने के लिए जेल प्रशासन ने चाईल्ड वेलफेयर कमेटी से और बच्चों की मां से अनुमति लेकर उन्हें पढ़ाई के लिए जेल से बाहर भेजा है।

बच्चों के बेहतर भविष्य की आस से मां खुश
महक का जन्म नीमका जेल में 2011 में हुआ था। उसकी मां हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा काट रही है। वहीं, 2012 में एक अन्य महिला को हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। महिला के साथ उसके एक वर्षीय मासूम बेटे ऋषभ को भी जेल की सलाखों के पीछे आना पड़ा। लेकिन अब जेल  प्रशासन ने जो बच्चों का भविष्य संवारने की ठानी है इसको लेकर दोनों मां बेहद खुश हैं।
 
जेल से पहली बार दो बच्चों को पढ़ाई के लिए हॉस्टल भेजा गया है। हमनें बच्चों की पढ़ाई का खर्चा वहन करने के लिए काफी संस्थाओं से संपर्क किया। जिसके बाद एक संस्था ने जिम्मा उठाया। बच्चों को अच्छे स्कूल और कॉलेज तक की पढ़ाई कराने की हामी भरी। अभी जेल मेें हमारे पास 4 बच्चे हैं। जैसे ही वह बच्चे पांच साल के हो जाएंगे, उनकी भी बेहतर शिक्षा के लिए प्रयास किए जाएंगे।-दीपक शर्मा, अधीक्षक-नीमका जेल
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