रोहित मां उज्जवला के साथ
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इसमें मेडिकल क्षेत्र के तकनीकी शब्दों का भी इस्तेमाल है। रिपोर्ट पर डिफेंस कॉलोनी थाना पुलिस अधिकारी मेडिकल विशेषज्ञों से देर रात तक राय लेकर मौत के कारणों तक पहुंचने की कोशिश करते रहे। पुलिस अधिकारियों ने सोमवार सुबह सीसीटीवी फुटेज व जांच रिपोर्ट की एक कापी मेडिकल बोर्ड की मांग पर उन्हें भिजवा दी थी।
पुलिस ने रोहित के घर की सीसीटीवी फुटेज को देखा भी था। कुछ लोगों ने छाती (सीपीसीआर) को दबा कर रोहित को बचाने की कोशिश की थी। ये सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दे रहा है। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर को जब्त कर लिया है।
हालांकि, रोहित तिवारी के परिवार के सदस्य ने रोहित की मौत को लेकर किसी पर संदेह व्यक्त नहीं किया है। सीसीटीवी कैमरों की रिपोर्ट से भी ये साफ हो गया है कि कोई बाहरी व्यक्ति घर में नहीं गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार रोहित काठगोदाम, उत्तराखंड में वोट डालकर पांच दिन में सोमवार को दिल्ली लौटा था। रात में रोहित ने शराब पी थी। घर पर आकर उसने चिकन, दाल व चावल खाए थे। जब रोहित का पोस्टमार्टम हुआ तो रोहित के पेट में दाल-चावल मिले थे। ऐसे में पुलिस अधिकारी कह रहे हैं कि रोहित की मौत रात के समय ही हो गई थी। दाल व चावल पचे नहीं थे।
नौकर गोलू उर्फ भोगिन्दर का कहना है कि रोहित रात 11:30 बजे सो गए थे, जबकि पत्नी अपूर्वा का कहना है कि रोहित रात करीब दो से ढाई बजे के बीच सोए थे। एफएसएल टीम ने मौके से तकिया, चादर व दवाइयों का सैंपल उठाया था। ताकिए पर खून के धब्बे थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रोहित को नींद न आने की बीमारी थी और पांच वर्ष से उनका इलाज चल रहा था। रोहित कई बार नींद की गोलियां लेते थे। रोहित हर रोज सुबह हार्ट की गोली लेने के लिए सुबह नौ बजे उठते थे और फिर सो जाते थे।
रोहित को नींद न आने की बीमारी थी। रोहित को जब नींद नहीं आती थी तो वह गिटार व हारमोनिया बजाते थे। इसके अलावा वह पुस्तकें भी पढ़ते थे। रोहित के कमरे से बहुत सारी पुस्तकें मिली हैं। रोहित अपने कमरे में अकेले सोते थे।
मां सरकारी आवास में चली गई थीं
मां उज्जवला रात करीब साढ़े बारह बजे अपने घर चली गई थीं। वह तिलक लेन स्थित सरकारी आवास पर रहती हैं। ये बंगला एनडी तिवारी को मिला हुआ था। सीसीटीवी फुटेज में मां घर से बाहर निकलती हुई दिखाई दे रही है।