एक तरफ धर्म के नाम पर कुछ जगहों पर लोग लड़ रहे हैं, सियासत कर रहे हैं तो दूसरी ओर मेवात और गुड़गांव में आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में सांप्रदायिक एकता की मिसाल कायम की जा रही है। (स्टोरी: ओम प्रकाश/अमर उजाला, गुड़गांव)
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PHOTOS: 1902 से इस रामलीला को संवार रहे हैं मुस्लिम परिवार
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फिरोजपुर झिरका में मुस्लिमों का जलसा हुआ तो हिंदुओं ने सेवा भाव दिखाया तो गऊपालक सम्मेलन में मुस्लिमों ने बढ़-चढ़कर शिरकत की। अब मेवात और गुड़गांव की रामलीलाओं में शिरकत कर रहे मुस्लिम कलाकार और पदाधिकारी भाईचारा बढ़ा रहे हैं।
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तावडू के जयभारत रामलीला क्लब में युनूस खान लक्ष्मण की भूमिका अदा कर रहे हैं। वह यहां 18 साल से रावण, भरत और लक्ष्मण सहित कई भूमिकाएं निभाते चले आ रहे हैं।
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वह कहते हैं कि रामलीला के दौरान सात्विक रहना होता है, यह भूमिका भी निभानी होती है। इस काम से हिंदू-मुस्लिम एकता मजबूत होती है। इसी मंच पर श्रीराम की लीला में धुन पैदा करने का काम हारमोनियम मास्टर इलियास करते हैं। फिरोजपुर झिरका की रामलीला में तो आजीवन संरक्षक के रूप मुस्लिम व्यक्ति भूमिका निभा रहा है।
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इनका नाम है आजाद मोहम्मद, जो विधानसभा के डिप्टी स्पीकर रह चुके हैं। वह न सिर्फ लीला प्रेमी हैं, बल्कि इसके लिए दानदाता भी।
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इसी प्रकार पटौदी में वहां के छठे नवाब मोहम्मद मुमताज अली खान उर्फ मुट्टन मियां ने हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के तौर पर 1902 में रामलीला की शुरूआत करवाई थी। जो आज तक जारी है।
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मुस्लिम राष्ट्रीय मंच में हरियाणा प्रांत के संयोजक खुर्शीद राजाका का कहना है कि यहां की सांप्रदायिक एकता से हिंदू-मुस्लिम दोनों धर्मों के कट्टरपंथियों को सीख लेनी चाहिए।
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फिरोजपुर झिरका की रामलीला के संरक्षक आजाद मोहम्मद का कहना है कि जब मुस्लिम हज पर जाते हैं तो उन्हें विदा करने वालों में हिंदू भाई भी होते हैं।
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ईद मिलन में हिंदू भाई आते हैं तो हमने भी राम बारात का स्वागत करने और मुस्लिम औरतों द्वारा श्रीराम की आरती उतारने की परंपरा शुरू की।