शपथ ग्रहण के इंतजार में बैठे नवनिर्वाचित पार्षदों की उम्मीदों पर बृहस्पतिवार को पानी फिर गया। शहर की नई सरकार राजनीति का शिकार हो गई। शपथ ग्रहण समारोह को स्थगित कर दिया गया और इसका कारण मंडलायुक्त (गुरुग्राम) का अचानक बीमार होना बताया गया। सुबह 11 बजे दो पार्षद निगम सभागार पहुंचे थे बाकी 30 पार्षद मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा के घर बैठक करने में जुटे रहे। अभी अगली तिथि की घोषणा नहीं की गई है। कानून के जानकारों का कहना है कि आगामी 9 फरवरी तक सदन का गठन हो जाना चाहिए।
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- फोटो : amar ujala
ज्ञात हो कि मंडलायुक्त डी सुरेश ने गत 27 जनवरी को सभी पार्षदों को पत्र लिखकर दो फरवरी की सुबह 11 बजे शपथ ग्रहण करने की सूचना भेजी थी। इसके लिए नगर निगम अधिकारियों ने तैयारियां भी पूरी कर ली थीं। मेयर कार्यालय से लेकर सदन तक सब कुछ तैयार कर लिया गया, लेकिन शपथ ग्रहण के दिन ही सुबह बताया गया कि मंडलायुक्त अचानक बीमार होने के कारण छुट्टी पर चले गए हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
इसलिए दो फरवरी हो होने वाला शपथ ग्रहण समारोह स्थगित कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि कई पार्षदों को इसकी कोई सूचना भी नहीं दी गई। खासकर विपक्षी और निर्दलीय पार्षद इंतजार करते रहे। वार्ड-35 के पार्षद राकेश कुमार उर्फ कपिल डागर और वार्ड 5 की पार्षद ललिता यादव सुबह 11 बजे के पहले ही निगम सभागार पहुंच गए थे, उन्हें शपथ ग्रहण स्थगित होने की सूचना नहीं दी गई थी। घंटों इंतजार करने के बाद दोनों अपने समर्थकों के साथ घर लौट गए।
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डेढ़ साल से शहर की नई सरकार के लिए सदन इंतजार करता रहा लेकिन आखिर में निराशा ही हाथ लगी। घंटों इंतजार के बाद निगम सदन में ताला लगाना ही पड़ा। सदन को सजाकर सभी पार्षदों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। गेट के बाहर शपथ ग्रहण समारोह का बोर्ड भी लगा दिया गया था। नगर निगम के अधिकारी सुबह से ही वहां डटे रहे लेकिन अंत में निगम प्रशासन द्वारा की गई सभी तैयारियां धरी रह गईं।
बता दें कि निगम सदन मई 2015 से स्थगित है। डेढ़ साल बाद नई वार्डबंदी से निगम चुनाव कराया गया। आठ जनवरी को हुए चुनाव में परिणाम की घोषणा की गई जिसमें 40 वार्डों में से 29 सीटों पर भाजपा प्रत्याशी विजयी हुए हैं। चुनाव परिणाम के बाद 12 जनवरी को अधिसूचना जारी की जा चुकी है। कानून के जानकारों का कहना है कि हरियाणा म्यूनिस्पल कारपोरेशन इलेक्शन रूल्स की धारा 71 के तहत अधिसूचना जारी होने के 30 दिन के अंदर सदन का गठन हो जाना चाहिए। ऐसे में गठन के लिए आगामी 9 फरवरी तक का समय शेष है।