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मदर्स डेः बेटी ईरा की शारीरिक कमजोरी को मानसिक मजबूती देकर बनाया UPSC टॉपर

Mon, 14 May 2018 10:25 AM IST
सीमा शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
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ira singhal - फोटो : अमर उजाला
हर मुश्किल, हर उलझन और हर एक चुनौती उसके आंचल की छांव में सुलझ जाती थी, वो मां ही थीं, जिसने मंजिल तक पंहुचने की राह के कांटे को फूल बना दिया।
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ira singhal - फोटो : अमर उजाला
मां के हौंसले व मार्गदर्शन ने 60 फीसदी स्कोलियोसिस डिसेबल बेटी ईरा की शारीरिक कमजोरी नहीं, बल्कि क्षमता को समझते हुए मानसिक मजबूती देकर यूपीएससी टॉप तक पहुंचाया और नौकरी से लेकर जिंदगी के हर उतार-चढ़ाव में सारथी की तरह साथ है। ईरा कहती हैं कि मां मेरी स्पोर्ट सिस्टम है, वो नहीं होती तो मेरी सफलता की कहानी व पहचान अधूरी रह जाती।
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ira singhal
मदर्स डे की पूर्व संध्या पर अमर उजाला से विशेष बातचीत में ईरा (यूपीएससी टॉपर 2014, यूपीएससी परीक्षा में सामान्य श्रेणी में पहला रैंक) अपनी सफलता का सारा श्रेय अपनी मां अनीता सिंघल को देती हैं। वे कहती हैं कि बचपन से आज तक मां का हौंसला और मार्गदर्शन मुझे आगे बढने की प्रेरणा देता हैं।

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ira singhal
मां ने बचपन से मुझे आजादी का मतलब समझाया और कहा कि सच के साथ जो सही लगे, वही करो। मेरी शारीरिक क्षमता को कमजोरी नहीं, बल्कि मेरी हिम्मत बनाया और आम दोस्तों संग जीने का मतलब समझाया। ईरा कहती हैं कि टॉप बेशक मैंने किया था, लेकिन उसकी हकदार मेरी मां थी, क्योंकि किताब और पढ़ायी में मदद से लेकर मेरी डाइट आदि का सारा इंतजाम खुद किया।
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ira singhal
ईरा के जन्म के साथ ही मुझे उसकी बीमारी का पता लगा पर मैंने हौंसले के साथ उसकी कमी को कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाने का फैसला लिया। उसे आम बच्चों की तरह ही पाला और दोस्तों संग देर रात तक घूमने की आजादी भी दी। मेरी शिक्षा पानीपत तो शादी मेरठ के परिवार में हुई। पति के बिजनेस में हाथ बंटाने के साथ मैं ईरा की परवरिश में हर चीज का ख्याल रखती थी।
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ira singhal
उसे कभी एहसास नहीं होने दिया कि वो आम बच्चों की तरह हर काम नहीं कर सकती हूं। बल्कि उसे मानसिक रूप से हर काम खुद करने की आदत डाली। हर व्यक्ति में एक कमी तो दस खासियत होती हैं। वो शारीरिक रूप से कमजोर थी पर मानसिक रूप से मजबूत। इसी के चलते 2014 में यूपीएससी टॉपर बनीं। ईरा इन दिनों दिल्ली के अलीपुर में एसडीएम के रूप में सेवाएं दे रही है। मानसिक मजबूती के चलते ही वो कभी अपने काम में किसी की मदद नहीं लेती है।
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