ira singhal
मां ने बचपन से मुझे आजादी का मतलब समझाया और कहा कि सच के साथ जो सही लगे, वही करो। मेरी शारीरिक क्षमता को कमजोरी नहीं, बल्कि मेरी हिम्मत बनाया और आम दोस्तों संग जीने का मतलब समझाया। ईरा कहती हैं कि टॉप बेशक मैंने किया था, लेकिन उसकी हकदार मेरी मां थी, क्योंकि किताब और पढ़ायी में मदद से लेकर मेरी डाइट आदि का सारा इंतजाम खुद किया।