पटौदी खंड के हजारीलाल कपूरी देवी राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बृहस्पतिवार को फॉगिंग के बाद अचानक 12 छात्राएं बेहोश हो गईं। स्कूल के आसपास मच्छर मारने के लिए फॉगिंग की जा रही थी, इसी दौरान कुछ छात्राओं ने चक्कर आने और सिर में दर्द की शिकायत की। कुछ देर बाद ही छात्राएं निढाल होकर कक्षा में गिरना शुरू हो गईं।
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फॉगिंग में बेहोश हुई छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
यह देख कर अन्य छात्राएं चीखने-चिल्लाने लगीं और भगदड़ मच गई। इस घटना से स्कूल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में स्कूल के कुछ अध्यापकों ने अपनी गाड़ियों से छात्राओं को पटौदी के सरकारी अस्पताल पहुंचाया। छात्राओं को देखकर अस्पताल प्रबंधन को भी माजरा समझ नहीं आया। एसएमओ डॉ. डीपी मलिक और डॉ. सुनील ने सभी छात्राओं का उपचार किया।
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फॉगिंग में बेहोश हुई छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
घटना के बाद स्कूल की छुट्टी भी कर दी गई। सूचना मिलने पर अभिभावक भी स्कूल और अस्पताल पहुंचे। अभिभावकों को समझ नहीं आ रहा था कि उनके बच्चों को अचानक क्या हो गया। घटना के बाद पटौदी एसडीएम रविंद्र यादव, नायब तहसीलदार सुरेश कुमार सहित पटौदी पुलिस भी मौके पर पहुंची। सिविल सर्जन डॉ. रमेश धनखड़ के मुताबिक स्कूल के आसपास फॉगिंग की गई थी।
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फॉगिंग में बेहोश हुई छात्राएं
- फोटो : ANI
धुआं अधिक मात्रा में स्कूल परिसर में जाने से छात्राओं को परेशानी हुई है। सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं, प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इस मामले में पालिका चेयरमैन चमनलाल का कहना है कि पालिका के कर्मचारियों द्वारा स्कूल और पास में लगे कांवड़ शिविर को देखते हुए फॉगिंग कराई गई थी। पालिका के सचिव संदीप मलिक का कहना है कि फॉगिंग के लिए दवाई गुड़गांव मलेरिया विभाग ने और उपकरण पटौदी स्वास्थ्य विभाग ने मुहैया कराए थे।
पटौदी अस्पताल ने 11 छात्राओं को उपचार के लिए लाए जाने की पुष्टि की है। एसएमओ डॉ. डीपी मलिक के मुताबिक उपचार के बाद पीड़ित छात्राओं को डिस्चार्ज कर दिया गया है। इसमें 8वीं की काजल, 9वीं की रितिका, राधिका, वैलिशा, मिनाक्षी, 12वीं की शशि, ज्योति, निशा, मोनिका, सरिता और रेखा शामिल हैं।