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मोदीनगर अग्निकांडः कोई पढ़ाई के खर्च के लिए तो कोई भाई की जमानत के लिए कर रहा था नौकरी, चढ़े हादसे की भेंट

Tue, 07 Jul 2020 10:37 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, मोदीनगर(गाजियाबाद)
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मोदीनगर अग्निकांड - फोटो : अमर उजाला
बखरवा गांव में रविवार को हुई हृदयविदारक घटना में आठ लोगों की दर्दनाक मौत के बाद पूरे गांव में सन्नाटा पसरा रहा। गांव छावनी में तब्दील कर दिया गया। एसपी देहात नीरज कुमार जौदान, एसपी ट्रैफिक रामानंद कुशवाह और तहसीलदार समेत तमाम अधिकारी दिन भर मौके पर डटे रहे। ग्रामीण घटना को याद कर सिहरते नजर आए। उनकी नम आंखों में गुस्से का इजहार कर रही थीं। इस हादसे की भेंट चढ़ने वाले कई लोगों की कहानी इतनी दर्दभरी है कि किसी की भी आंखें भर आए। इसमें मरे कुछ लोग अपनी पढ़ाई के लिए यहां नौकरी करने आए थे तो कोई बहन अपने भाई को जमानत दिलाने के लिए पैसे इकट्ठे करने आई थी, पढ़ें ऐसी ही दर्दनाक कहानियां.....
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ghaziabad factory fire - फोटो : अमर उजाला
गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार, गांव में मचा रुदन 
फैक्टरी में आठ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इसमें से पांच लोग बखरवा गांव और तीन पड़ोसी बस्ती के थे। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शवों के गांव में पहुंचने का सिलसिला जैसे ही शुरू हुआ तो रुदन मच गया। पसरे सन्नाटे के बीच रुदन से हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। देर शाम गमगीन माहौल में शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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- फोटो : अमर उजाला
भाई की जमानत को कमा रही थी पैसा, हादसे की भेंट चढ़ी......
दर्दनाक हादसे में मौत का शिकार हुई शाहिनूर मजबूरी में ही करीब 20 दिन पहले इस फैक्टरी में नौकरी करने आई थी। पता चला है कि उसका भाई मेरठ पुलिस ने किसी मामले में गिरफ्तार करके जेल भेजा है। शाहिनूर उसकी जमानत कराने के लिए पैसों का बंदोबस्त कर रही थी। जिसके लिए उसने प्रतिदिन डेढ़ सौ रुपए मजदूरी पर इस फैक्टरी में काम शुरू किया था। शाहिनूर को काम करते हुए मात्र 20 ही दिन हुए थे कि वह रविवार को हुए हादसे का शिकार हो गई। हादसे का शिकार हुईं चिंकी और मुनेश देवी के घर की कहानी भी मजबूरियों से भरी हुई है।

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ghaziabad factory fire - फोटो : अमर उजाला
मजदूरी कर पढ़ाई के लिए जुटाने थे पैसे
बखरवा में अवैध फैक्टरी में हुए धमाके से हुई तीन मृतकों की पहचान घटना के 12 घंटे बाद हुई। परिजन देर रात तक अपने जिगर के टुकड़ों की तलाश में भटक रहे। परिजनों ने बाल आदि से अपनों की शिनाख्त की। तीनों मृतक विजयनगर कॉलोनी के रहने वाले थे और पढ़ाई पूरी करने के लिए मजदूरी शुरू की थी। बताया गया कि विजय नगर कॉलोनी निवासी ईशु ,पारुल व अक्षित आसपास ही रहते थे। परिजनों के अनुसार तीनों छात्र थे। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते तीनों ने कुछ समय पहले ही गांव बखरवा स्थित अवैध फैक्टरी में पांच हजार रुपये महीने वेतन पर का शुरू किया था। रविवार को तीनों ड्यूटी करने के लिए फैक्टरी में आए थे। देर शाम तक घर नहीं लौटने के बाद परिजनों को चिंता हुई तो फैक्टरी पहुंचकर वहां का मंजर देख बेसुध हो गए। देर रात तक भटकने के बाद उन्हें तीनों की मौत की जानकारी मिली।
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ghaziabad factory fire - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन ने मृतकों की सूची की संशोधित 
प्रशासन ने बीते दिन बताए गए मृतकों के नामों की संशोधित सूची जारी की है। मृतकों में शाहनूर पुत्री शहाबुद्दीन, बेबी पत्नी नरेश कश्यप, चिंकी पुत्री परमानंद, पूनम पत्नी पप्पू, मुनेश पत्नी राधे सभी बखरवा गांव निवासी तथा अक्षित पुत्र सुनील, ईशु पुत्री अनिल कुमार और पारुल पुत्री शीशपाल हैं। संशोधित सूची के तीनों मृतक विजय नगर के रहने वाले थे। बीते दिन पुलिस की ओर से मृतकों में जागो पत्नी अजब सिंह और लक्ष्मी पुत्री नरेश और रोहित पुत्र रामवीर को भी मृत बताया गया था। सोमवार को पुलिस अधीक्षक ग्रामीण नीरज कुमार जादौन ने बताया कि जागो और लक्ष्मी घायल हैं और इनका इलाज मेरठ के एक अस्पताल में चल रहा है। जबकि रोहित नाम का कोई व्यक्ति सामने नहीं आया है। 
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ghaziabad factory fire - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को दिए मुआवजे के चेक   
सोमवार को एसपी देहात व तहसीलदार उमाकांत तिवारी ने मृतकों के घर-घर जाकर परिजनों को चार-चार लाख रुपये के मुआवजे के चेक दिए। घायलों को अभी राहत राशि नहीं दी गई है। हादसे में पूनम देवी ,बेबी ,मुनेश चिंकी ,शाहनूर निवासी गांव बखरवा और अक्षित ,ईशू, पारुल  निवासी विजय नगर कॉलोनी की मौत हो गई थी। जबकि कई लोग घायल हो गए थे। सोमवार को एसपी देहात नीरज कुमार जादौन, तहसीलदार उमाकांत तिवारी  मृतकों के घर घर जाकर आश्रितों को चार-चार लाख रुपये का चेक दिया। तहसीलदार ने बताया कि घायलों के परिजनों से आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज मांगे गए हैं। जल्द ही घायलों की सूची तैयार कर उन्हें भी आर्थिक मदद की राशि दे दी जाएगी।
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