पुलिस डेढ़ माह के भीतर चार्जशीट दाखिल करेगी। वहीं, कानूनी जानकारों का कहना है कि जघन्य अपराध में नाबालिग के दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन वर्ष की सजा हो सकती है। बाल सुधार गृह में किशोर की काउंसलिंग भी की जाएगी।
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पुलिस का कहना है कि वह मामले में साक्ष्य एकत्रित कर कोर्ट में पेश करेंगी। इसमें फोरेंसिक जांच को भेजे गए नमूने की रिपोर्ट को भी न्यायालय में पेश किया जाएगा। इसके बाद सबूत व गवाहों के आधार पर मामला आगे चलेगा।
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वारदात का चश्मदीद गवाह न होने के कारण मामले में यह भी देखने वाली बात होगी कि परिजन इस केस की पैरवी करते हैं या नहीं। बिसरख कोतवाली प्रभारी अजय कुमार शर्मा ने बताया कि डेढ़ माह के भीतर इस केस की चार्जशीट पेश कर दी जाएगी।
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अधिकतम तीन साल की हो सकती है सजा: किसी भी जघन्य अपराध में दोषी साबित होने पर नाबालिग को अधिकतम तीन साल तक की सजा दी जा सकती है। परिजन इस केस की पैरवी करें या न करें यह केस पुलिस के जुटाए साक्ष्यों के आधार पर चलेगा। देश में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे को नाबालिग माना जाता है। दिल्ली के निर्भया केस के बाद नाबालिग माने जाने की आयु 16 वर्ष करने पर मंथन चल रहा है, लेकिन मामले में आरोपी की आयु 16 वर्ष से कम है।- रामसरन नागर, वरिष्ठ अधिवक्ता
बिखर गया परिवार, टूट गया सपना: सोसायटी के लोगों का कहना है कि कारोबारी परिवार के साथ सहारनपुर से नोएडा आया था। यहां कारोबार जमाकर उनका मकसद बच्चों को पढ़ा लिखाकर बड़े मुकाम तक पहुंचाना था, लेकिन वारदात के बाद परिवार बिखर गया और कारोबारी का सपना टूट गया। किशोर की मां भी उससे हमेशा बेहतर करने की उम्मीद करती थी। यही कारण था कि वह पढ़ाई को लेकर उस पर दबाव बनाती थी।