अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप हैपिनेस क्लास के एक सत्र में हिस्सा लेने के लिए मंगलवार को दक्षिण दिल्ली के एक सरकारी स्कूल पहुंचीं। उत्साहित छात्रों ने मेलानिया को माला पहनाकर और उनके माथे पर टीका लगाकर पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।
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Melania Trump in Happiness Class
- फोटो : PTI
स्कूल के छात्र-छात्राओं और टीचरों ने मेलानिया का शानदार स्वागत किया गया। मेलानिया के पहुंचने से पहले स्कूल को खास तरीके से सजाया गया। पुलिस की ओर से यहां की सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाली गई। स्कूल के गेट से लेकर अंदर-बाहर सभी जगह साज-सज्जा की गई।
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स्कूल के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ सभी शिक्षक शिक्षिकाएं मेलानिया ट्रंप के दौरे के लिए उत्साहित दिखे। स्कूल में उनके स्वागत के लिए बेहद आकर्षक तरीके से इंतजाम किए गए। सोमवार को भी सजावट की तैयारियों को अंतिम रुप दिया जाता रहा।
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- फोटो : ANI
नानकपुरा में सर्वोदय को-एड सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्रों से अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने मुलाकात की और उनके साथ समय बिताया। स्कूल में ‘हैपिनेस क्लास’ में शामिल होने के बाद उन्होंने कहा, मंगलवार को कहा कि वह हैपिनेस पाठ्यक्रम से प्रेरित हैं। मेलानिया ने कहा, ‘मेरा स्वागत करने के लिए शुक्रिया। यह भारत की मेरी पहली यात्रा है। यहां के लोग गर्मजोशी से भरे हुए हैं और अच्छे हैं।’
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उन्होंने कहा कि यह बेहद प्रेरणादायक है कि विद्यार्थी प्रकृति से स्वयं को जोड़ने वाली क्रियाओं के साथ अपने दिन की शुरुआत करते हैं। उन्होंने कहा, उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों के समक्ष एक स्वस्थ, सकारात्मक उदाहरण पेश किया गया है।
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सरकारी स्कूल के आसपास की दीवारों पर आकर्षक पेंटिंग की गई जबकि स्कूल के बाहर की बाउंड्री को इस तरह से ढक दिया गया जिससे बाहर से स्कूल के अंदर कुछ भी ना दिखाई दे।
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बताया जा रहा है कि मेलानिया दो साल पहले शुरू की गई इस क्लास को जानना और समझना चाहती थीं। बच्चों की संख्या, शिक्षकों की संख्या व अन्य जानकारी पहले ही अमेरिकी दूतावास को भेजी जा चुकी थी।
दिल्ली सरकार ने हैपिनेस क्लास को दो साल पहले नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के लिए शुरू किया था। इसका मकसद बच्चों के तनाव को कम करना और हंसी-खुशी वाले माहौल में पढ़ाई करवाना है। इस कक्षा के बाद लिखित परीक्षा नहीं होती बल्कि बच्चे का मूल्यांकन हैपिनेस इंडेक्स से किया जाता है। इस कक्षा में बच्चों को कहानियों व खेल-खेल से सीख दी जाती है।