ऑल इंडिया किसान संघर्ष कोर्डिनेशन कमेटी के बैनर तले किसानों के संसद कूच के चलते शुक्रवार सुबह नई दिल्ली व मध्य दिल्ली जाम हो गई। किसानों की भीड़ को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को कई मार्गों को बंद करना पड़ा। इससे वाहनों की लंबी लाइनें लग गई थीं। कई जगह ट्रैफिक को परिवर्तित करना पड़ा।
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हालांकि ट्रैफिक पुलिस सुबह से ही फेसबुक, ट्विटर हैंडलर और ट्रैफिक हेल्पलाइन के जरिए लोगों को ट्रैफिक परिवर्तन व जाम के बारे में बताती रही। किसानों के जंतर-मंतर पहुंचने के समय ट्रैफिक कुछ सामान्य रहा, मगर शाम को फिर जाम लग गया।
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सुबह नौ बजे ही हजारों की संख्या में किसानों ने रामलीला मैदान से संसद मार्ग पर तक कूच किया। किसान गुरु नानक चौक, रणजीत सिंह फ्लाईओवर, टॉलस्टाय मार्ग होकर 11.30 बजे तक संसद मार्ग पहुंच गए थे। मार्च के कारण सबसे ज्यादा असर नई दिल्ली व मध्य दिल्ली के कुछ मार्गों पर पड़ा।
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जवाहरलाल नेहरू मार्ग, गुरु नानक आईज अस्पताल, महाराजा रणजीत सिंह फ्लाईओवर और बाराखंभा चौक पर ट्रैफिक बड़े पैमाने पर प्रभावित रहा। इसके अलावा नई दिल्ली में केजी मार्ग, फिरोजशाह रोड, जनपथ, मंदिर मार्ग, पंचकुईया मार्ग, अशोक रोड, बाबा खड़क सिंह मार्ग, जयसिंह, कनॉट प्लेस के आउटर व इनर सर्किल में भी ट्रैफिक बाधित हुआ।
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दिल्ली पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार ने बताया कि रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक किसानों को कोई परेशानी न हो इसके लिए एक हजार से ज्यादा ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। गुरुनानक अस्पताल चौक, रणजीत सिंह फ्लाईओवर, टॉलस्टाय मार्ग और केजी मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया था।
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ये मार्ग दोपहर तक आम जनता के लिए खोले गए थे। दोपहर के समय ट्रैफिक सामान्य हो गया था। शाम को जब किसान जंतर-मंतर से अपने-अपने राज्यों को जाने के लिए निकले तो पूरी नई दिल्ली, कनॉट प्लेस, निजामुद्दीन, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, सरायकालेखां, मथुरा रोड डव धौला कुंआ पर बड़े स्तर पर जाम लग गया। ह
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नेताओं के चौपाल से पहले किसान संगठनों की संसद
किसान रैली में विपक्षी दलों के नेताओं के शामिल होने से पहले किसानों की संसद लगी। इसमें देश भर के किसान नेताओं ने अपनी बात रखी। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की तरफ से लगाई किसान संसद में केंद्र सरकार से पूर्ण कर्ज माफी व लागत का डेढ़ गुना मुनाफा देने की मांग की गई। साथ ही 21 सूत्री मांग पत्र भी पेश किया गया।
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स्वराज इंडिया के योगेन्द्र यादव ने कहा कि किसानों को अपनी मांगों को तो मनवाना ही है। साथ ही बड़े-बड़े वादे और दावे करने वाली पार्टियों से भी सावधान रहना है। यादव के मुताबिक, मौजूदा केंद्र सरकार किसान विरोधी सरकार है। आगामी चुनाव में इसे सत्ता से उखाड़ फेंकना है। हालांकि, उन्होंने किसानों को सलाह दी कि जो 21 विपक्षी पार्टियां बिल का समर्थन कर रही हैं, उन्हें भी आगे डरा के रखना है।
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किसान नेता और सांसद राजू शेट्टी ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार देश भर का किसान एकजुट हुआ है। प्रधानमंत्री किसानों के खिलाफ जाएंगे तो दिल्ली पर राज नहीं कर पाएंगे। सरकार उसी की बनेगी, जिसकी किसान चाहेंगे। सांसद हन्नान मौला ने कहा कि पूरे देश का किसान जग गया है। अब अयोध्या चलने का नारा नहीं चलेगा, इसकी जगह किसान-मजदूर साथ हैं का नारा पूरे देश में गूंजेगा।
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किसान रैली का संचालन कर रहे किसान समन्वय समिति के संयोजक वीएम सिंह ने कहा कि देश को बर्बाद करने वाली जीएसटी को लागू करने के लिए आधी रात को संसद का सत्र बुलाया जा सकता है तो किसानों के बुनियादी हक को पूरा करने के लिए संसद क्यों नहीं बुलाई जा सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि जुमलेबाजी नहीं चलेगी। 2019 में वही सरकार बनेगी, जो किसानों के हक की बात करेगी।
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21 सूत्री मांगों का प्रस्ताव
किसान सम्मेलन में योगेंद्र यादव ने 21 सूत्री मांग पत्र भी पेश किया। इसमें मजदूरों, पशुपालकों और खेती-किसानी से जुड़े दूसरे समुदायों के मांगे शामिल की गईं। समन्वय समिति की कोशिश है कि भविष्य में किसान व मजूदरों की एकता को मजबूत किया जा सके।
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किसान की मांगों से जुड़ा विधेयक संसद में प्राइवेट मेंबर बिल के तौर पर हो चुका है पेश
किसानों ने पूर्ण कर्जामुक्ति और फसलों की लागत का ड्योढ़ा दाम को लेकर दो बिल तैयार किये हैं। इसे तैयार करने से पहले 20 से ज्यादा राजनीतिक दलों से सहमति ली गयी है। संसद में पिछले साल में सांसद राजू शेट्टी ने प्राइवेट बिल के तौर पर पेश भी किया है। समन्वय समिति इसी बिल को विशेष सत्र में पास कराना चाहती है।
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बिल जिन्हें पास किए जाने की मांग कर रहे किसान
1. किसान ऋणमुक्ति विधेयक
इस कानून का उद्देश्य है कि किसानों को कर्जे से मुक्त किया जाए।यानी किसानों पर खेती से जुड़े सभी कर्जों का जितना भी बोझ है उसे एक ही बार में खत्म किया जाए।
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2. किसान (कृषि उत्पाद लाभकारी मूल्य गारंटी) अधिकार विधेयक:
यह कानून सभी किसानों को फसलों का सही दाम यानी पूरी लागत का डेढ़ गुना दिलाने की गारंटी देगा। इस कानून से किसान अपनी फसल का सही दाम हासिल कर पाएंगे। इस कानून के मुताबिक फसल का सही दाम नहीं मिलता तो किसान अदालत जा सकेंगे और दोषी अफसरों को सजा भी मिलेगी।
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ये बोले नेता
मैं वादा करता हूं कि हम अधिक संख्या में संसद में नहीं हैं लेकिन राज्यसभा और लोकसभा में किसानोें से जुड़े बिलों को पारित करवाने के लिए हमारे सभी साथी पूरा प्रयास करेंगे। जब तक यह क़ानून बनता नहीं तब तक मिलकर ऐसे ही कार्यक्रम होते रहेंगे। सभी कार्यक्रमों में हम आपका साथ देंगे।-शरद पवार, एनसीपी
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दोनों बिलों को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से पूरा समर्थन है। सरकार पर हमारा दबाव रहेगा कि इन्हें कानून बनवाना है। आज हमारे पास वोट की ताकत है। इस सरकार को हटाएंगे और नई वैकल्पिक सरकार लाएंगे। बिना नीतियों के वैकल्पिक सरकार नहीं बनेगी, इसलिए वैकल्पिक सरकार को किसान हित में नीतियां बनानी होगी।-सीताराम येचुरी, माकपा
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किसान आंदोलन को पूरा सहयोग व समर्थन है। समाजवादी पार्टी दोनों बिलों को संसद में पास कराने का पूरा प्रयास करेगी। मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में पार्टी ने किसानों की मांगों को अपने घोषणा पत्र में शामिल भी किया है। सपा किसानों के खिलाफ होने वाले हर नाइंसाफी के खिलाफ खड़ी है।-धर्मेंद्र यादव, समाजवादी पार्टी
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मौजूदा सरकार ने सबसे ज्यादा बर्बादी किसानों की है। आज किसान का जीना मुश्किल हो गया है। आने वाले चुनाव में एक भी वोट कमल को नहीं जाना चाहिए। कमल को इस बार कीचड़ में दबा देना है। भाजपा को हटाकर लोकसभा चुनाव में किसान हितैषी सरकार बनानी है।-शरद यादव, समाजवादी नेता
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मुसलमान मंदिर के खिलाफ नहीं है। राम पूरी दुनिया के हैं, लेकिन चुनाव आते ही भाजपा को राम याद आ जाते हैं। हमें ध्यान देना है कि वोट राम को, अल्लाह को नहीं चाहिए। वोट इंसान के नाम पर पड़ता है। 2019 में आज की हुकूमत को उखाड़ फेंकना है।-फारूख अब्दुल्ला, नेशनल कांफ्रेंस
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आज केंद्र में भाषणबीर व जुमलेबाज की सरकार काम कर रही है। सरकार न कर्ज माफी कर रही है न ही फसलों की कीमत दे रही है। चुनाव आते ही इसे सिर्फ राम के नाम पर वोट मांगना है, लेकिन इस बार भाजपा की जुमलेबाजी नहीं चलेगी। इसकी जगह आम लोगों के हक में काम करने वाली सरकार बनेगी।-संजय सिंह, आम आदमी पार्टी