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आंखों की रोशनी भी नहीं रोक पाई इनके हौसलों की उड़ान को

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) 12वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठे स्पेशल कैटेगरी के छात्रों ने अपने परिणाम से यह साबित कर दिया है कि किसी से पीछे नहीं हैं।
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आंखों की रोशनी भी नहीं रोक पाई इनके हौसलों की उड़ान को

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18 साल के तपस के लिए आंखें न होने बावजूद 95 प्रतिशत अंकों के साथ पास होना इतना आसान नहीं था। लेकिन उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति ने सब कुछ आसान कर दिया।
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तपस को 500 में से 457 नंबर मिले है। तपस बताते हैं कि पेपर मुश्किल तो थे। मैं बहुत परेशान भी था लेकिन मैंने अपने मन को शांत रखकर सभी पेपर दिए।

आंखों की रोशनी भी नहीं रोक पाई इनके हौसलों की उड़ान को

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तपस जो डीपीएस आरके पुरम का स्टूडेंट है उसने अपनी सफलता के लिए अध्यापकों और अपने अभिभावकों को इसका श्रेय दिया।
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तपस ने अपनी पढ़ाई कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर के माध्यम से की जो आवाज के साथ ही ब्रेल लिपि में चीजों को बदलकर नेत्रहीन लोगों की मदद करता है। तपस कहता है कि मुश्किल चीजें करना आसान नहीं होता लेकिन अगर आप ऐसा करते रहें तो मुश्किल भी आसान हो जाती है।
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तपस के माता पिता शुरू से ही चाहते थे कि उनका बेटा अपनी पूरी क्षमता के साथ दूसरों से कंपीट करे। तपस के अभिभावकों को उसपर पूरा विश्वास था इसलिए उन्होंने उसका साथ हमेशा दिया। और उन्हें तपस पर बहुत गर्व है।
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