महज 21 साल की जमरूद परवीन दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में बीए की स्टूडेंट हैं और उनका पेशा कार ड्राइविंग है। परवीन बदनामी के दौर से गुजर रही उस उबर कंपनी की दिल्ली में एकमात्र महिला कैब ड्राइवर हैं जिसके कुछ ड्राइवर कैब में रेप और छेड़खानी के आरोप में जेल में हैं।
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मिलिए, दिल्ली में उबर कैब चलाने वाली इकलौती महिला ड्राइवर से
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परवनी का कहना है कि उन्हें ड्राइविंग का शौक है और हाइवे पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे या इससे तेज रफ्तार में गाड़ी चलाने में उन्हें बेहद मजा आता है। अपने पेशे के बारे में जब उन्होंने जामिया में पढ़ने वाले अपने क्लासमेट्स को बताया तो किसी ने उन पर यकीन नहीं किया। लेकिन जब उन्होंने अपना आईडी कार्ड दिखाया तो सब चौंक गए।
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जामिया जर्नल ने परवीन के शौक और उनके पेशे की कहानी को अपने हालिया अंक में प्रकाशित किया है। उनके साथ पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को यकीन नहीं होता कि हिजाब और नकाब में सिर से पांव तक ढकी रहने वाली लड़की ऐसे पेशे से जुड़ी है।
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परवीन अपना अनुभव बताते हुए कहती हैं कि हाल ही में जब वह दो पैसेंजर को आनंद विहार से लेकर चलने लगीं तो दोनों यह जानकार हैरान रह गए कि उत्तर प्रदेश के बिजनौर जैसे शहर की रहने वाली और बुर्का पहनने वाली लड़की कैब ड्राइवर का काम करती है और पढ़ाई भी कर रही है।
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परवीन फिलहाल बीए कर रही हैं और आगे एमए करना चाहती हैं। उनका सपना है कि पढ़ाई करने के बाद वह टीचर बनें और लोगों को अपना पसंसदीदा विषय (इस्लामिक स्टडीज) पढ़ाएं।
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बिजनौर के परंपरागत परिवार में पैदा हुई परवीन अपने मां-बाप और तीन छोटी बहनों के साथ फिलहाल एक कमरे वाले किराए के घर में रहती हैं। परवीन के पिता मजदूरी करते हैं। उनकी मां ने उन्हें ड्राइविंग सिखने के लिए प्रेरित किया और इसकी बाकायदा ट्रेनिंग भी दिलवाई।
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असल में परवीन की मां ड्राइविंग सिखना चाहती थीं लेकिन वह अपना सपना पूरा न कर सकीं लेकिन, उन्होंने अपनी बेटी के सपने को पूरा करने में मदद की और ड्राइविंग सिखते ही सखा कंसलटिंग प्राइवेट लिमिटेड में नामांकन करवाया। हालांकि परवीन ने उबर में नौकरी करने का फैसला किया क्योंकि ये सखा से ज्यादा पैसे देती है।