कश्मीर के जिला कुपवाड़ा के हिंदवाड़ा में आतंकियों से मुठभेड़ में शुक्रवार को पतला (मोदीनगर) निवासी सीआरपीएफ जवान विनोद कुमार शहीद हो गए।92 बटालियन में तैनात विनोद की शहादत पर पूरा गांव गम में डूब गया। उनके पार्थिव शरीर रविवार को पैतृक गांव लाया जाएगा। पतला के जनता इंटर कालेज के मैदान में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। परिजनों को शुक्रवार शाम पांच बजे सूचना मिली कि विनोद कुमार मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल हो गए। वह आईसीयू में हैं। परिजनों ने दोस्तों के जरिए संपर्क किया तो शाम सात बजे पता चला कि उनका लाल शहीद हो गया है।
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martyr vinod kumar
- फोटो : अमर उजाला
2004 से सीआरपीएफ में तैनात शहीद के परिजनों ने पूरी रात विनोद की पत्नी से यह बात छिपाए रखी, लेकिन सुबह होने तक सभी को जानकारी मिली चुकी थी। परिजनों को सांत्वना देने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, रिश्तेदारों व प्रशासनिक अधिकारियों का तांता लगा रहा। घर में एकाएक लोगों की भीड़ देख बिलखती शहीद की पत्नी नीतू गुहार लगाती रही है कि कोई उनकी विनोद से फोन पर बात करा दे। अंतिम विदाई में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए पुलिस व प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी हैं। एसडीएम डीपी सिंह का कहना है कि शहीद का पार्थिव शरीर पालम एयरपोर्ट से गांव लाया जाएगा।
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कुपवाड़ा में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवान विनोद कुमार ने आखिरी बार शुक्रवार दोपहर डेढ़ बजे पत्नी नीतू से फोन पर बात की थी। उस वक्त दोनो बच्चों को स्कूल से लेने जा रही नीतू से विनोद ने शाम को बात करने का वादा किया था और कहा कि ‘मैं ऑपरेशन में हूं, बच्चों को ले आ, शाम को कैंप में पहुंचकर बात करूंगा’।
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शाम हुई तो विनोद का फोन नहीं उसकी शहादत की खबर मिली। पत्नी नीतू अब बिलख-बिलख कर यही कह रही है कि कोई उसकी विनोद से एक बार बात करा दे। सीआरपीएफ के शहीद हुए जवान विनोद कुमार का बेटा अंश (9) और बेटी एलिस अवनी (5) मोदीनगर के दयावती मोदी पब्लिक स्कूल में पढ़ते हैं।
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नीतू भी किराए के मकान में मोदीनगर में ही रहती हैं, लेकिन कुछ दिनों पूर्व उनके पैर में चोट लगने के कारण वह पतला में ससुराल में रह रही थीं। शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे नीतू बच्चों को स्कूल से लाने मोदीनगर जा रही थी। इसी दौरान उन्होंने पति विनोद कुमार को फोन किया। विनोद ने बताया कि वह एक ऑपरेशन में हैं, आतंकवादी जिस घर में छिपे हैं उसमें आग लगा दी है, फिलहाल बात नहीं कर सकते।
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उन्होंने नीतू से कहा कि ‘ऑपरेशन पूरा होने वाला है, तू बच्चों को स्कूल से ले आ, मैं शाम को फोन पर बात करुंगा’। कॉल डिस्कनेक्ट हो जाने के बाद नीतू बच्चों को लाने स्कूल चली गई। शाम को नीतू ने पति विनोद के फोन पर कॉल की, लेकिन रिसीव नहीं हुई। शाम पांच बजे विनोद की बटालियन के उच्चाधिकारियों का फोन आया और गोली लगने से विनोद की हालत गंभीर होने की बात कही।
करीब दो घंटे बाद उनके अफसरों का दोबारा फोन आया और विनोद की शहादत की खबर परिजनों को दी। सभी ने सुबह तक पत्नी से विनोद की शहादत की बात को छिपाए रखा। शनिवार की सुबह जब शहीद की पत्नी नीतू को पता चला तो वह बिलखने लगी, नीतू बार-बार इसी बात को दोहरा रही है कि फोन पर बात करने का वादा कर पति उसे छोड़कर कैसे जा सकते हैं।