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तस्वीरें: घर पहुंचा शहीद का शव, रो पड़ा पूरा गांव

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सरहद की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले शहीद संजीव कुमार का पार्थिव शरीर रविवार सुबह 7.30 पर गाजियाबाद के मुरादनगर स्थित ढिंडार गांव पहुंचा। (सभी तस्वीरें: आलोक रावत/अमर उजाला, गाजियाबाद)
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शहीद संजीव कुमार का पार्थिव शरीर देखते ही मां राजकली देवी, पत्नी नीलम और पिता मास्टर जगपाल पर मानों पहाड़ टूट पड़ा हो।
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पिता का शव देख बेटे तुषार व बेटी तनु को सदमा लग गया। करीब 9:30 बजे शहीद संजीव कुमार की अंतिम यात्रा शुरू हुई।

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सेना के जवान शव लेकर गांव के बाहर स्थित श्मशान पहुंचे। बाबूगढ़ छावनी के एडम कमांडेंट ले. कर्नल आरके हुड्डा, रिशालदार हरेंद्र सिंह व अन्य जवानों ने शहीद को पुष्पचक्र अर्पित किए।
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आर्मी फील्ड रेजीमेंट मेरठ के जवानों ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। डीएम विमल कुमार शर्मा, एसएसपी धर्मेद्र सिंह, एसडीएम यशु रुस्तगी और सीडीओ ने शहीद श्रद्धांजलि अर्पित की।
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इसके साथ ही पूरा गांव वंदे मातरम, शहीद संजीव कुमार अमर रहें, के उद्घोष से गूंज उठा।
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गत दो अप्रैल को अरुणाचल प्रदेश में म्यांमार बॉर्डर पर शहीद हुए संजीव की अंतिम यात्रा में विभिन्न राजनैतिक, समाजिक और अधिकारियों समेत हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।

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बेटे तुषार ने शहीद पिता को मुखाग्नि दी। इससे पूर्व भाजपा यूपी युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजीव चौहान के नेतृत्व में रावली रोड पर शहीद को श्रद्धांजलि दी गई।

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सिग्नल कोर राजपूत रेजीमेंट के नायब सूबेदार संदीप कुमार ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश के जनपद खुनसा के टूपी विलेज के पास घात लगाए बैठे एनएससीएम नगालैंड संगठन के आतंकियों ने सैन्य वाहन पर पेट्रोलिंग के दौरान हमला किया था।

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जिसमें संजीव कुमार समेत तीन जवान शहीद हुए। यह जगह खुनसा से 10 किमी. की दूरी पर है। संदीप ने बताया कि नार्थ ईस्ट में पहला यह आतंकी हमला हुआ है।

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शहीद संजीव कुमार की आठवीं तक शिक्षा ढिंडार गांव में हुई थी। संजीव कुमार ने आगे की शिक्षा अपनी बुआ के घर मेरठ में रहकर पूरी की। पिता के रिटायर होने के बाद उनका परिवार गांव में रहने लगा।

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शहीद के ताऊ के लड़के दिनेश चौधरी ने बताया कि संजीव को बचपन से कबड्डी खेलने का शौक था। पिता जगपाल मेरठ में अरनावली इंटर कॉलेज में अध्यापक थे।

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इसके चलते आठवीं के बाद मेरठ के खैरपुर में अपनी बुआ विद्या के यहां रहकर उन्होंने आगे की पढ़ाई की। अरनावली इंटर कॉलेज में 12वीं तक शिक्षा प्राप्त की। 12वीं के बाद 1997 में संजीव आर्मी में भर्ती हुए थे।

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पिता के रिटायर होने के बाद परिवार ढिंडार गांव में रहने लगा। परिवार में बुआ विद्या, वीरवती, चाचा इलम सिंह, ताऊ सिरजर सिंह, चचेरे भाई कपिल, दुष्यंत हैं।

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शहीद संजीव कुमार की अंतिम यात्रा में रविवार को जहां सभी राजनैतिक दल के नेता और बड़े-बड़े अधिकरी शामिल हुए।
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जनपद में होने के बावजूद भी प्रदेश के कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव शहीद संजीव कुमार के घर परिवार को सांत्वना देने नहीं पहुंचे। वह ढिंडार गांव से मात्र 12 किमी. की दूरी पर मोरटा में एक कार्यक्रम में भाग लेने मुरादनगर आए थे।
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