अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के टीचिंग ब्लॉक में भीषण आग के चलते करीब दो दर्जन से ज्यादा वरिष्ठ प्रोफेसर बेदफ्तर हो चुके हैं। इन्हें पांच दिन बाद भी संस्थान में बैठने का स्थान उपलब्ध नहीं हो पाया है। इनमें से कुछ प्रोफेसर घर पर व्हाट्सएप के जरिए वीडियोकॉल पर मरीजों को देख अपने से जूनियर डॉक्टरों को उपचार संबंधी सलाह दे रहे हैं।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
चूंकि, सप्ताह में एक या दो ओपीडी के अलावा सर्जरी होने के कारण बाकी दिनों में इनके पास शैक्षणिक व प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी होती है। ये कार्य बगैर दफ्तर के संभव भी नहीं है। इनके विभागों से जुड़ी सभी फाइलें, कंप्यूटर और डाटा सब नष्ट हो चुका है। अब इन डॉक्टरों को एम्स प्रबंधन सफदरजंग अस्पताल से आगे ट्रॉमा सेंटर के खाली ब्लॉक में बैठाने की बात कर रहा है।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
एक विभागाध्यक्ष ने बताया कि फोन पर वीडियोकॉल के जरिए अपने जूनियरों का मार्गदर्शन करने के अलावा उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है। उनके पास बैठने के लिए स्थान नहीं है और न ही कोई सुविधा। उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। फैकल्टी के संगठित नहीं होने के कारण ये सब हो रहा है। एम्स के एक वरिष्ठ विभागाध्यक्ष बताते हैं कि पांच दिन से वह दफ्तर के बिना ही घूम रहे हैं।
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एम्स की आग बुझने के बाद का मंजर
- फोटो : अमर उजाला
अन्य विभाग के दफ्तरों में जाकर ये चंद समय के लिए वहां के संसाधन इस्तेमाल कर लेते हैं, लेकिन वह नाकाफी हैं। एक अन्य विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर का कहना है कि आग लगने के बाद एम्स प्रबंधन ने एक सर्कुलर जारी किया है।
सुबह साढ़े 9 से शाम 7 बजे तक इमारत में जाकर सभी से अपने दफ्तरों में बचा-कुचा सामान लेने की बात कही है, लेकिन साथ में ये भी लिखा है कि इमारत के कॉरिडोर साफ कर दिए हैं, कमरों को साफ नहीं किया है। कमरों के हालात को लेकर प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं है। जाने से पहले हेलमेट लगाकर जाएं, सभी हेलमेट बाहर उपलब्ध हैं।