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लिचिंग: राजनीति से प्रेरित होकर भीड़ कर रही है हत्या, ये घटनाएं हैं उदाहरण

Sun, 22 Jul 2018 04:01 AM IST
शाहनवाज आलम, अमर उजाला, गुरुग्राम
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Akbar Lynched
गाय के नाम पर कथित गोरक्षकों की भीड़ ने राजस्थान के अलवर जिले में एक शख्स की हत्या कर दी। इस हत्या के साथ ही एक बार फिर गाय के नाम पर बेकाबू मॉब लिचिंग ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले ने एक बार फिर पहलू हत्याकांड और जुनैद हत्याकांड जैसी घटना को ताजा कर दिया है। खासतौर पर देखा जाए तो अलवर में मॉब लिचिंग की घटनाएं अधिक हुई हैं। इसके केंद्र में गाय ही है। 
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मॉब लिंचिंग के शिकार पहलू खान और अकबर खान - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2017 में अलवर में ही 55 साल के पहलू खान की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। पहलू खान पर भी गो तस्करी के शक में भीड़ ने हमला कर दिया था। जिस वक्त पहलू पर हमला हुआ वह गाय खरीदकर ले जा रहा था। डेयरी बिजनेस करने वाले पहलू खान की हमले के दो दिन बाद मौत हो गई थी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकारों को सख्त आदेश दिए हैं, लेकिन सरकारें बेकाबू भीड़ पर लगाम लगाने में सरकार फेल साबित हो रही है।
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mob lynching
आरएसएस से जुड़े मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के उत्तरी भारत के प्रभारी खुर्शीद रजाका कहते हैं कि अलवर और नूंह जिला सटा हुआ है। मेवात क्षेत्र के लोगों का राजस्थान में रिश्तेदारी के साथ कारोबारी रिश्ते भी रहे हैं। आमतौर पर धारणा बन गई है कि मेवात का आदमी है तो गोवंश को काटता ही होगा। इससे दूसरे लोगों में गुस्से की भावना होने के कारण इस तरह की घटनाएं हो रही है। हरियाणा एवं चंडीगढ़ हाईकोर्ट बार काउंसिल के को-चेयरमैन जोगिंद्र महेश्वरी का कहना है कि मॉब लिचिंग की घटना कहीं न कहीं राजनीति से प्रेरित है। इसके लिए राज्य सरकार सीधे तौर पर जिम्मेवार है। राजस्थान सरकार की कमी है। 
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cow
गाय के नाम पर बढ़ रही है हिंसा
गाय के नाम पर होने वाली हिंसा को लेकर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के पास कोई आधिकारिक आंकड़े नहीं है, लेकिन डाटा पर काम करने वाली इंडिया स्पेंड वेबसाइट की मानें तो बीते वर्षों में गाय और गोरक्षा के नाम पर हिंसा बढ़ी है। साल 2010 से 2017 के बीच गाय और गोरक्षा के नाम पर हुई हिंसा की 52 प्रतिशत घटनाओं में मुस्लिमों को निशाना बनाया गया। इसके अलावा कुल 60 घटनाओं में मारे गए 25 लोगों में 84 प्रतिशत मुस्लिम थे। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें से 97 प्रतिशत घटनाएं मई 2014 के बाद हुई हैं। तकरीबन आठ सालों (2010-2017) के दौरान जो 25 लोग मारे गए उनमें 21 मुस्लिम थे। इन घटनाओं में 139 लोग घायल हुए। 
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