dadi ki rasoi
उनकी ये बात हम सभी को बहुत अच्छी लगी। पिताजी ने कहा- कल से ही यह काम शुरू कर देते हैं। इस तरह उन्होंने मेरे जन्मदिन पर खाना बनवाकर लगभग 200 से 250 लोगों को खाना खिलाया। यह किसी को भीख न लगे, इसलिए हमने इसका दाम 5 रुपए रखा, जो हर शख्स की पहुंच में हो। अब चूंकि आइडिया दादी का था, इसलिए पिताजी ने इसका नाम दादी की रसोई रखा। उस दिन हमारा पूरा परिवार इस काम में जुटा है। आज हम हर रोज 500 से 1000 लोगों का पेट भरते हैं।