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सोशल मीडिया पर वायरल महिषासुर शहादत दिवस की तस्वीरें

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स्मृति ईरानी ने बुधवार को लोकसभा में जेएनयू के छात्रों द्वारा महिषासुर शहादत दिवस मनाने की बात कही थी जिसके बाद अब सोशल मीडिया पर यह मुद्दा खूब उछाला जा रहा है और अब इसमें स्मृति ईरानी ही फंसती नजर आ रही हैं।
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सोशल मीडिया पर वायरल महिषासुर शहादत दिवस की तस्वीरें

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बता दें कि स्मृति ईरानी ने संसद के पटल पर राइट टू स्पीच का दुरुपयोग करने की बात कहते हुए उदाहरण दिया था कि किस तरह जेएनयू में महिषासुर शहादत दिवस मनाया गया था। इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर महिषासुर टॉप ट्रेंड में बना हुआ है और कई तरह के तर्क इस कार्यक्रम को सही बताने के लिए दिए जा रहे हैं।
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वहीं इस बीच भाजपा के सांसद उदित राज ने जेएनयू में महिषासुर शहादत दिवस में भाग लेने की बात मानी जिसके बाद से ही भाजपा इस मुद्दे पर विपक्ष के निशाने पर है। आज तो राज्यसभा में स्मृति ईरानी से विपक्ष ने मांफी की मांग कर डाली।

सोशल मीडिया पर वायरल महिषासुर शहादत दिवस की तस्वीरें

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वहीं सोशल मीडिया पर तेजी से जेएनयू में 2013 में मनाए गए महिषासुर शहादत दिवस की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। इसमें उदित राज कार्यक्रम में वाचन कर रहे हैं।
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सोशल मीडिया पर वायरल महिषासुर शहादत दिवस की तस्वीरें

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इसके साथ ही सोशल मीडिया पर ये तथ्य भी सामने आ रहा है कि दक्षिण भारत के शहर मैसूर का असली नाम महिषुरू है जिसका मतलब है 'महिषासुर का निवास।'
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इसके साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि महिषासुर को दक्षिण भारत में दलित द्रविड़ मानते हैं और दुर्गा व महिषासुर की लड़ाई को आर्यन और द्रविड़ों के बीच की लड़ाई माना जाता है।
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वहीं जेएनयू के छात्र रह चुके सांसद उदित राज ने महिषासुर शहादत दिवस में जाने की बात स्वीकारते हुए कहा कि वो वहां तब गए थे जब वो बीजेपी के सांसद नहीं थे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के पदचिन्हों पर चले हैं। वो भी घोर समाजसेवी थे और मैं भी हूं। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने भी कहा था कि असुर दलित थे और मैं भी मानता हूं। ये एक बौद्धिक बात है कोई वैचारिक बात नहीं। उदित ने कहा कि मैं बाबा साहब के सुर-असुर वाली बात को मानता हूं। समाज अलग है पॉलिटिक्स अलग है।
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