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इंसान नहीं खुद भगवान ने बनवाया था दिल्ली का ये मंदिर

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दिल्ली में एक ऐसा मंदिर है जिसकी स्थापना भगवान श्रीकृष्ण ने की थी। महरौली में बने इस श्री योगमाया मंदिर ने दिल्ली को सात बार बसते और उजड़ते हुए देखा। महाभारत काल के बाद यह खंडहर बनना शुरू हो गया। (सभी फोटोः विवेक निगम/अमर उजाला; स्टोरीः विनोद डबास/अमर उजाला)
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इंसान नहीं खुद भगवान ने बनवाया था दिल्ली का ये मंदिर

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कुतुब मीनार के आसपास बनी इमारतों में इसके पत्थरों के प्रयोग होने की पुष्टि पुरातत्व विभाग भी कर चुका है। इससे राजधानी के अधिकतर लोग अनभिज्ञ हैं। इसी कारण मंदिर में बहुत ही कम लोग पूजा अर्चना करने आते हैं।
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कहा जाता है कि महाभारत से पहले भगवान श्रीकृष्ण महरौली आए थे और उन्होंने महालक्ष्मी योगमाया की पिंडी स्थापित कर पांडवों के साथ पूजा की। इस दौरान योगमाया ने साक्षात रूप में दर्शन देकर पांडवों को विजयश्री का आशीर्वाद दिया।

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अज्ञातवास जाने के दौरान योगमाया के आशीर्वाद के चलते ही दुर्योधन के गुप्तचरों को पांडवों के बारे में कुछ मालूम नहीं हो सका था। महाभारत काल के बाद यह मंदिर खंडहर में तब्दील होना शुरू हो गया। मंदिर के पत्थरों से कुतुबमीनार के आसपास इमारतों का निर्माण करने का सिलसिला शुरू हो गया। इस कारण कुछ ही समय बाद मंदिर की पहचान खत्म हो गई।
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10वीं सदी में पृथ्वीराज चौहान ने मंदिर वाले स्थान पर महल बनवाने के लिए खुदाई शुरू कराई। इस दौरान यहां मंदिर होने के बारे में मालूम हुआ तो पृथ्वीराज चौहान ने महल बनाने का इरादा छोड़ महालक्ष्मी योगमाया के मंदिर का निर्माण कराया।
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मंदिर में अखंड ज्योति स्थापित है। यहां पूजा करने के लिए आने वाले श्रद्घालुओं का मानना है कि इस ज्योति में घी डालने और यहां मनोकामना अभिलाषी चालीसा करने से उनकी मुराद अवश्य पूर्ण होती है। इस मंदिर में दिल्ली के अन्य मंदिरों की तुलना में बहुत कम श्रद्घालु पूजा अर्चना के लिए आते हैं।
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