13 साल तक कांग्रेस की सरकार केंद्र के साथ जोर आजमाइश करती रही और अब आम आदमी पार्टी की सरकार है लेकिन दिल्ली की केंद्रीय करों में भागीदारी नहीं बढ़ी। देखिए क्या है खास आम बजट में दिल्ली के लिए।
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दिल्ली के लिए क्या लाया जेटली का बजट?
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3 साल तक कांग्रेस की सरकार केंद्र के साथ जोर आजमाइश करती रही और अब आम आदमी पार्टी की सरकार है लेकिन दिल्ली की केंद्रीय करों में भागीदारी नहीं बढ़ी। इस साल भी केंद्रीय करों में भागीदारी सिर्फ 325 करोड़ रुपये ही मिली है। हालांकि केंद्र से मिलने वाली सामान्य सहायता 325 से बढ़ाकर 394.99 करोड़ रुपये कर दी गई है। यह वृद्धि 21.54 फीसदी है।
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दिल्ली में बिजली-पानी के हालात सुधारने के लिए कोई पैकेज दिल्ली को इस बार नहीं मिला है। इतना ही नहीं जेएनएनयूआरएम में बस खरीद, फ्लाईओवर व पार्किंग निर्माण के लिए मिलने वाली राशि का जिक्र भी कहीं नहीं है। सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की तरफ से पिछले वर्ष मिली 22.5 करोड़ की राशि इस बार 25 करोड़ जरूर की गई है। वहीं दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन, दिल्ली पुलिस और दिल्ली स्थित केंद्रीय अस्पतालों का बजट जरूर बढ़ा है।
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प्रतिव्यक्ति आय (2.20 लाख) के साथ दूसरे नंबर वाली दिल्ली और खरीदारी, सैर-सपाटा, वाहन व गैजेट्स के शौकीन एनसीआर वालों पर अरुण जेटली का बजट काफी भारी पड़ेगा। सर्विस टैक्स बेशक 1.64 फीसदी ही बढ़ा हो लेकिन महंगाई पांच फीसदी तक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। सुबह सैलून-पार्लर से लेकर शाम को रेस्तरां में खाने तक में सर्विस टैक्स की मार पड़ेगी। दिल्ली के साथ नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव, फरीदाबाद समेत आसपास के शहरों में सुविधाओं के साथ दौड़ती पीढ़ी पर इसका भार पड़ने जा रहा है। पार्लर, स्पा, जिम और फैशन की शौकीन महिलाओं पर यह भार सबसे अधिक पड़ता दिख रहा है।
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आम बजट में दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा गया है। दिल्ली में कानून व्यवस्था की स्थिति बेहतर करने और महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दिल्ली पुलिस का बजट पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष 500 करोड़ रुपये बढ़ाया गया है। दिल्ली पुलिस को इस वर्ष 5372.88 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जोकि पिछले वर्ष से 500 करोड़ रुपये ज्यादा है। पिछले वर्ष ये राशि 4979. 88 करोड़ रुपये थी। महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए निर्भया फंड की राशि को भी बढ़ाया गया है। निर्भया फंड में इस बर्ष 40 लाख रुपये ज्यादा दिए गए हैं। इस वर्ष निर्भया फंड की राशि को बढ़ाकर 3.40 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
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आम आदमी पार्टी ने कहा है केंद्र का बजट आम आदमी की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है। जनता को राहत देने की बात हो या टैक्स रिफॉर्म, सरकार सभी मोर्चे पर फेल रही है। पूर्ण बहुमत वाली सरकार होने के बाद भी काले धन को लेकर सरकार ने अपनी बात तो रखी, लेकिन वह किस तरह करेगी इस पर कुछ साफ नहीं कर पाई है। सरकार ने बजट में टैक्स रिफॉर्म को लेकर भी काम नहीं कर पाई, जिसका फायदा सीधा जनता को मिलता। पार्टी ने कहा कि सरकार ने सोशल सिक्योरिटी की बात तो की है, लेकिन वह इसे किस तरह लागू करेगी यह भी साफ नहीं है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देकर सरकार क्रोनी कैपिटलिज्म को भी बढ़ावा दे रही है।
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जेटली के बजट से राजधानी स्थिति केंद्र सरकार के अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था कुछ सुधरने की उम्मीद है। लेकिन जितनी उम्मीद थी उस पर बजट खरा नहीं उतरता है। क्योंकि दिल्ली में न सिर्फ दिल्ली वाले बल्कि पूरे देश के लोग बीमारी के उपचार के लिए पहुंचते हैं। केंद्रीय बजट में दिल्ली के अस्पतालों में विकास कार्यों के लिए बजट उम्मीद से काफी कम है। एम्स को इस साल 1470 करोड़ रुपये मिलेगा। इसी तरह सफदरजंग अस्पताल को 520 करोड़, कलावती शरण को 35.80, राम मनोहर लोहिया अस्पताल को 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जबकि दरकार इससे कही ज्यादा थी।
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अरुण जेटली के बजट से आम लोगों के साथ-साथ व्यापारी वर्ग भी नाखुश है। व्यापारियों का मानना है कि एक ओर कंपनियों व कॉरपोरेट घरानों को सीधे-सीधे फायदा पहुंचा दिया गया और आम आदमी के कल को सुधारने की बात हो रही है। हालांकि आज ही खुशी नहीं मिलेगी तो कल किसने देखा है। बजट के चलते अब बाजार में एक से नहीं बल्कि दो नंबर से माल बिकेगा, जिसमें व्यापारी से लेकर ग्राहक बिल लेने-देने से परहेज करते हुए पैसा बचाएंगे।
सरकार के मेक इन इंडिया प्रोग्राम को देखते हुए छोटे उद्यमियों को इस बार बजट में राहत मिलने की उम्मीद थी। जिससे छोटे उद्यमियों के लिए निवेश का रास्ता आसान होता। मगर छोटे उद्यमियों को आगामी बजट से राहत की छोड़ो उल्टे खर्चा भी बढ़ गया। उद्यमियों का कहना है कि इससे मेक इंडिया के कार्यक्रम में स्माल स्केल इंडस्ट्री के लोग नहीं जुड़ पाएंगे। दिल्ली के उद्यमियों ने कहा है कि यह किसी भी तरह उन्हें राहत देने वाला बजट नहीं है। उद्यमियों के मुताबिक सर्विस टैक्स बढ़ गया है, एक्साइज ड्यूटी में भी बढ़ोत्तरी कर दी गई है। हम लगातार इसमें छूट के साथ एक्साइज ड्यूटी के दायरे को बढ़ाने की मांग कर रहे थे। लेकिन यहां दोनों को छोड़ उल्टा उसे बढ़ा दिया गया है। इससे वह उद्यमी जो किराये पर जगह लेकर फैक्ट्री चला रहा है उसका बजट बढ़ गया है।