नफीस ने कहा, “मेरे बेटे की गुमशुदगी ने मुझे अल्लाह के साथ जिंदगी पर फिर से बातचीत करने को मजबूर कर दिया तो फिर राजनीतिक दल किस लिए हैं। सीबीआई किस लिए है, खुफिया एजेंसियां किस लिए हैं ? अगर वह मेरे मासूम बच्चे का पता नहीं लगा पाए तो वह देश की सुरक्षा के लिए क्या करेंगे ?’’
उन्होंने कहा ‘‘लोग दिल्ली से मुझे फोन कर कहते हैं कि नजीब गुड़गांव में हो सकता है या नोएडा में छिपा हुआ हो। कुछ अन्य हैं जिन्हें उसकी हत्या किए जाने और अज्ञात स्थान पर दफनाए जाने की आंशका है। प्रत्येक फोन के साथ मैं अगली बस पकड़ती हूं और वहां से निराश होकर लौटती हूं।”
नफीस ने कहा कि उनके पति पेशे से बढ़ई हैं। वह नजीब के लापता होने के बाद से बिस्तर पर हैं और अब उनकी उम्मीद भी टूटती जा रही है। अपने आंसू रोक पाने में नाकाम नफीस कहती हैं, “पानी, बिजली, अन्य सुविधाएं, हर चीज हमारे लिए उतना महत्त्व नहीं रखतीं जितना महत्व मेरा बेटा रखता है। हमें बस ... नजीब चाहिए।”
नफीस जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के बिहार के बेगूसराय से नामांकन भरे जाने के दौरान वहां गईं थीं। उनके इस कदम की सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हुई थी।
उन्होंने कहा, “मैं सोशल मीडिया पर नहीं हूं लेकिन मेरे बच्चों ने मुझे इसके बारे में बताया था। मैं वहां कोई राजनीति करने नहीं गयी थी। मैं वहां एक मां के तौर पर गई थी। नजीब के लापता होने के बाद कन्हैया मेरे बेटे की तरह मेरे साथ खड़ा था, अब वक्त है कि मैं उसकी मां की तरह उसके साथ खड़ी रहूं। लेकिन मेरे पास उसे देने के लिए सिर्फ आशीर्वाद है।”
बदायूं उत्तर प्रदेश की 80 संसदीय सीटों में से एक है। यहां 23 अप्रैल को चुनाव होने हैं।