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आप से गठबंधन के बाद भी क्यों आसान नहीं होगी कांग्रेस की राह, ये हैं 6 वजह

Tue, 09 Apr 2019 02:36 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आप कांग्रेस - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस अगर लोकसभा चुनाव 2019 में दिल्ली में आप के साथ गठबंधन कर चुनावी मैदान में उतरती भी है तो उसके लिए जीत का परचम लहराना बहुत आसान नहीं होगा। जिस तरह से गठबंधन के लिए सीटों के बंटवारे की बात चली रही है, उसमें ऐसी लोकसभा सीट भी है जहां पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को उम्मीद से काफी कम वोट मिले थे। ऐसे में बड़े अंतर से हारी हुई सीट पर बाजी लगाने से कांग्रेस प्रत्याशी कतराएंगे। रणनीतिकारों की भी मानें तो आप तो फायदे में रहेगी, लेकिन कांग्रेस के लिए घाटे का सौदा साबित हो सकता है। सिर्फ यही कारण नहीं है बल्कि और भी ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से कांग्रेस दिल्ली में गठबंधन के बाद भी नुकसान में रह सकती है, आगे पढ़ें क्या हैं वो कारण...
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आप व कांग्रेस के बीच जिन लोकसभा सीट पर गठबंधन करने की चर्चा चल रही है, उस फार्मूले पर प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ता नाराजगी जता रहे है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि उत्तर-पश्चिमी लोकसभा सीट ऐसी है, जहां पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी को सबसे कम वोट मिले थे। इस लोकसभा में भाजपा को जहां 6 लाख 27 हजार से अधिक वोट मिले थे तो वहीं आप प्रत्याशी को 5 लाख 22 हजार से अधिक। कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी को इस लोकसभा में महज 1 लाख 57 हजार के करीब ही वोट मिले थे। ऐसे में अगर इस सीट पर कांग्रेस गठबंधन करती है तो यह सीट कांग्रेस के लिए फायदे का सौदा साबित नहीं होने वाली।

उत्तर-पश्चिम लोकसभा सीट पर 2014 में क्या रही पार्टी की स्थिति
भाजपा को मिला कुल मत-627529
आप को मिला कुल मत-522842
कांग्रेस को मिला कुल मत-157242
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पार्टी सूत्रों का कहना है कि आरक्षित सीट होने के कारण अभी भी यहां मतदाताओं का रुझान आम आदमी पार्टी में ही है। क्योंकि मध्यम वर्ग व उच्च वर्ग का रुझान भले ही आप के प्रति कम हुआ है, लेकिन झुग्गियों व क्लस्टरों में रहने वाले मतदाता आज भी आप से जुड़े हुए हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आलाकमान को इस गणित से अवगत किया जाएगा। उत्तर-पश्चिम की जगह उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र कांग्रेस के लिए बेहतर है। क्योंकि पिछले चुनाव में इस लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी को 2 लाख 14 हजार से अधिक वोट मिला था। इसी तरह पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट पर भी कांग्रेस प्रत्याशी को 2 लाख से अधिक वोट मिला था। लिहाजा वर्तमान गठबंधन के फार्मूले को कांग्रेस कार्यकर्ता घाटे का सौदा मान रहे है।

नई दिल्ली लोकसभा सीट पर 2014 में क्या रही पार्टी की स्थिति
भाजपा को मिला कुल मत-452480
आप को मिला कुल मत-290515
कांग्रेस को मिला कुल मत-182627

चांदनी चौक लोकसभा सीट 2014 में क्या रही पार्टी की स्थिति
भाजपा को मिला कुल मत-435829
आप को मिला कुल मत-301172
कांग्रेस को मिला कुल मत-175797

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गठबंधन टूटा तो नेता किस मुंह से मांगेंगे वोट
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि गठबंधन के बाद कांग्रेस का विधानसभा की तीस सीटों पर दावा बनेगा। क्या आप विधानसभा में इतनी सीटें कांग्रेस को  देगी। यह संभव नहीं है। ऐसे में कांग्रेस को विधानसभा का चुनाव अपने स्तर पर लड़ना पड़ेगा। एक साल में ही गठबंधन टूटेगा और फिर हम किस प्रकार से आप के खिलाफ वोट मांगने मतदाताओं के पास जाएंगे।
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- फोटो : social media
आप के खिलाफ माहौल कांग्रेस के लिए शुभ संकेत
कांग्रेस के कई नेताओं का यह भी मानना है कि जिस प्रकार दिन प्रति दिन दिल्ली में आप के खिलाफ माहौल बन रहा है, वह आने वाले समय में कांग्रेस के लिए शुभ संकेत है। ऐसे में गठबंधन कांग्रेस की दिल्ली में वापसी में बाधा बनेगा। इसके अलावा आप की 49 दिन की सरकार बनवाकर कांग्रेस को क्या मिला, कांग्रेस पहली बार दिल्ली में जीरो पर पहुंच गई।
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केजरीवाल गठबंधन की बातचीत के जरिए कांग्रेस के खिलाफ अभियान चलाए हुए हैं
कांग्रेस-आप के बीच संभावित गठबंधन में देरी व आप के रवैये से वरिष्ठ कांग्रेसी नेता काफी नाराज हैं। उनका मानना है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गठबंधन की बातचीत के जरिए कांग्रेस के खिलाफ अभियान चलाए हुए हैं। इससे कांग्रेस की छवि धूमिल हो रही है। हरियाणा व पंजाब में गठबंधन न होने पर आप नेता कांग्रेस के खिलाफ अभियान चलाएंगे, इससे भी पार्टी असहज रहेगी। ऐसे में कांग्रेस को आप के साथ गठबंधन करने से दूर ही रहना पार्टी के हित में होगा। फिलहाल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जो निर्णय लेंगे, पार्टी नेता उसी पर अमल करेंगे।
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sheila dikshit - फोटो : social media
अगर दो सीटें भी जीती कांग्रेस तो उसे नहीं होगा फायदा
आप से गठबंधन पर प्रदेश के अधिकांश बड़े नेता खिलाफ रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति के चलते जब गठबंधन की बात चली तो सभी ने एकमत से निर्णय राहुल गांधी पर छोड़ दिया। चार-तीन सीट के फार्मूले पर रजामंदी बनी तो आप ने हरियाणा व पंजाब का पेंच फंसा दिया। इसके अलावा आप ने प्रत्याशियों के समर्थन में आयोजित सभाओं में भाजपा सहित कांग्रेस पर भी आक्रामक रुख अपना रखा है। दिल्ली के एक पूर्व सांसद का कहना है कि एक तरफ गठबंधन की बात दूसरी तरफ भाषणों में कांग्रेस के खिलाफ अभियान से कांग्रेसी कार्यकर्ता हताश हैं। उनका कहना है कि हमने तीन सीटें ले भी ली और दो पर विजय हासिल कर ली तो भी कांग्रेस को ज्यादा फायदा मिलने वाला नहीं है।


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