राजधानी की हाईप्रोफाइल मानी जानी वाली उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट को तीन हैवीवेट नेताओं की उम्मीदवारी ने दिलचस्प बना दिया है। भाजपा-आप-कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे तीनों नेता हैविवेट होने के साथ-साथ समान रूप से ब्राह्मण और पूर्वांचली भी हैं। इसके अलावा इनमें से दो वर्तमान तो एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हैं। इस सीट को बरकरार रखने की कोशिश में जी-जान से जुटे भाजपा के मनोज तिवारी की किस्मत दलित और मुस्लिम वोटों (38.5 फीसदी)के बंटने पर टिकी है।
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अगर इन दो बिरादरी का वोट कांग्रेस की शीला दीक्षित और आप के दिलीप पांडे में से किसी एक केनाम पर एकजुट हुआ तो तिवारी की राह बेहद कठिन हो जाएगी। बहरहाल मुस्लिम बिरादरी में जहां कांग्रेस का ज्यादा प्रभाव नजर आता है, वहीं दलित और झुग्गी झोपड़ी के मतदाताओं में पांडे का आकर्षण महसूस किया जा सकता है। तीनों दलों से हैवीवेट उम्मीदवारों ने क्षेत्र के मतदाताओं को भी भ्रमित कर दिया है। दिल्ली की पूर्व सीएम होने के कारण शीला के प्रति सीलमपुर, मुस्तफाबाद में मुस्लिम बिरादरी का झुकाव नजर आता है।
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हालांकि बाबरपुर, मुस्तफाबाद में यह बिरादरी आप और कांग्रेस के बीच बंटी हुई है। इसी प्रकार तिमारपुर और सीमापुरी की झुग्गियों में आप का प्रभाव ज्यादा नजर आता है, मगर इन क्षेत्रों में भी कई मतदाताओं का झुकाव कांग्रेस की ओर है। इस सीट से जुड़े 10 विधानसभा सीटों में एक ही बिरादरी केमतदाता पसंद और नापसंद के सवाल पर बंटे हुए हैं। बीते चुनाव की बात करें तो मोदी लहर में भोजपुरी गायक और अभिनेता मनोज तिवारी ने पूर्वांचली मतदाताओं (25-28 फीसदी) के बूते कांग्रेस केकद्दावर नेता जयप्रकाश अग्रवाल को तीसरे नंबर धकेल दिया था। उन्हें ब्राह्मण, वैश्य, जाट, पंजाबी बिरादरी का भी खुल का साथ मिला था। हालांकि इस बार चूंकि तीनों ही हैवीवेट उम्मीदवार पूर्वांचल से ही हैं, ऐसे में तीनों पूर्वांचली मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए युद्घ स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में तिवारी के समक्ष मोदी का व्यक्तित्व और राष्ट्रवाद का ही सहारा है।
पूर्वांचल वोटों पर जंग
शीला, तिवारी और पांडे तीनों इस सीट के 25 से 28 फीसदी पूर्वांचल के मतदाताओं को साधने की जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं। बीते चुनाव में भाजपा के तिवारी को इसका खुल कर समर्थन मिला था। यही कारण है कि आप और कांग्रेस ने भी पूर्वांचल से जुड़े नेताओं को ही मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने इस सीट पर जयप्रकाश अग्रवाल की जगह पूर्व सीएम दीक्षित पर भरोसा जताया है। आप उम्मीदवार खुद के गाजीपुर से होने, भाजपा उम्मीदवार खुद के बनारस का होने और शीला खुद के कन्नौज से होने का प्रचार कर रहे हैं।
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चुनाव के अहम मुद्दे
भाजपा- राष्ट्रवाद, विकास, हिंदुत्व, कार्यकर्ताओं की फौज कांग्रेस- असहिष्णुता, जीएसटी, नोटबंदी, बेरोजगारी आप- पूर्ण राज्य, दिल्ली सरकार के कामकाज में केंद्र की दखलअंदाजी
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ताकत और कमजोरियां
तिवारी-
ताकत- पीएम मोदी का चेहरा, राष्ट्रवाद, हिंदुत्व, पूर्वांचली में लोकप्रियता
कमजोरी- एंटी इनकंम्बेंसी, मुस्लिम-दलितों में प्रभाव नहीं
शीला-
ताकत- बतौर सीएम बेहतर प्रशासक की छवि, अल्पसंख्यकों-दलितों में नाराजगी
कमजोरी- वनवास के बाद हुई सक्रिय, आप-कांग्रेस के समान वोटर
पांडे-
ताकत- झुग्गी झोपड़ी और दलित वोटों में पकड़, लगातार एक साल से घर-घर प्रचार, कार्यकर्ताओं की फौज
कमजोरी- कोर वोट बैंक में कांग्रेस के सेंध मारने की आशंका, पूर्वाचली मतदाताओं में गहरी पैठ नहीं, दिल्ली-केंद्र विवाद से पार्टी की बनी नकारात्मक छवि
सीट में शामिल विधानसभा सीटें- बुराड़ी, रोहताश नगर, बाबरपुर, तिमारपुर, सीलमपुर, गोकलपुर, सीमापुरी, घोंडा, मुस्तफाबाद और करवाल नगर।
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सीट का गणित
कुल मतदाता- 2290492
पुरुष- 1253274
महिला- 1035218
जातिगत गणित
पूर्वांचली 25 से 26 फीसदी (कई बिरादरी शामिल)
मुस्लिम- 21.5 फीसदी
ब्राह्मण- 18 फीसदी
एससी- 17 फीसदी
जाट- 4 फीसदी
वैश्य-पंजाबी- 5-5 फीसदी
गुर्जर 5.5 फीसदी
ओबीसी- 21 फीसदी
बीते चुनाव 2014 का गणित
मनोज तिवारी भाजपा 596125 (45.2 फीसदी) वोट
प्रो. आनंद आप 452041 (34.31 फीसदी) वोट
जय प्रकाश अग्रवाल कांग्रेस 1957408 (16.31) वोट