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...और कंगाल ही मर गया अवध का 'आखिरी नवाब', दिल्ली के मालचा महल में रहता था

Tue, 07 Nov 2017 04:12 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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malcha mahal - फोटो : सोशल मीड‌िया
दिल्ली में कई राजाओं और बादशाहों का शासन रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं क‌ि कुछ दिनों पहले तक यहां लखनऊ का एक नवाब रहता था। आप शायद ही जानते हों क्योंकि खुद दिल्लीवाले भी इनसे अनजान हैं। लेकिन ये कोई ऐसे वैसे नवाज नहीं बल्कि खुद को अवध का आ‌खिरी नवाब बताते थे। उनकी जिंदगी का ज्यादातर ह‌िस्सा कंगाली में बीता। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी मौत की खबर भी किसी को नहीं थी। 2 नवंबर को उनकी लाश मालचा महल में म‌‌िली और 5 नवंबर को बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थ‌ित कब्र‌िस्तान में इन्हें दफना द‌िया गया।
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malcha mahal - फोटो : अमर उजाला
क्या आप जानते हैं दिल्ली में मालचा महल है जहां रहते थे नवाब
अगर आप दिल्ली के चाणक्यपुरी से गुजरेंगे तो आपको मालचा महल दिख सकता है। हालांकि उसकी जर्जर हालत देखकर आपके लिए यह अंदाजा लगाना मुश्किल होगा कि इसमें कोई रह भी सकता है। उसी जर्जर महल में रहते थे अवध के आखिरी नवाब प्रिंस साइरस। यहां न कोई खिड़की थी, न बिजली न पानी। सिर्फ एक दरवाजा और एक गलियारा है जहां से बाहर  की रौशनी और हवा अंदर आती है।
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malcha mahal - फोटो : अमर उजाला
कैसे हुई ये हालत
1971 में जब ‌तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने में प्रिवी पर्स (राजा-महाराजाओं को म‌िलने वाली पेंशन) खत्म हुआ तो कई राजा साधारण जिंदगी जीने को मजबूर हुए। प्रिंस साइरस उनसे अलग न थे। लेकिन प्रिंस की मां जो खुद को विलायत महल कहती थीं ने तय किया कि वह शाही तरीके से ही रहेंगी। जर्जर हो चुके महल जिसमें ना दरवाजा था, ना पानी और ना ही पानी पर विलायत महल वहीं रहीं। शाही रौब इतना कि कभी किसी ‌हिंदी अखबार या टीवी को इंटरव्यू तक न दिया।

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malcha mahal - फोटो : अमर उजाला
मालचा महल पहले था बिस्तदरी खंडहर
पहली बार 1970 में ये शाही परिवार सुर्खियों में आया था जब अली रजा(प्रिंस साइरस), उनकी बहन सकीना और उनकी मां बेगम वलीयत महल ने खुद को अवध के नवाब वाजिद अली शाह का सीधा उत्तराधिकारी बताया था। उस वक्त वलीयत महल ने ये दावा करते हुए दिल्ली रेलवे स्टेशन का फर्स्ट क्लास लाउंज कब्जा लिया था। उनके साथ उनके दो बच्चे, कुछ नौकर और कुत्ते थे। उस वक्त उन्होंने भारत सरकार से 1856 में नवाब वाजिद अली शाह से छीनी गई सारी संपत्ति का मुआवजा मांगा था।
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malcha mahal - फोटो : अमर उजाला
तब 1977 में गृहमंत्रालय ने लखनऊ के अलीगंज में उनके लिए एक घर का इंतजाम किया था। लेकिन वलीयत महल ने लखनऊ जाने से इंकान कर दिया और दिल्ली में ही रहने का इंतजाम मांगा।
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malcha mahal - फोटो : अमर उजाला
वलीयत महल ने रेलवे स्टेशन छोड़ने से भी इंकार कर दिया और यही नहीं उन्होंने जहर खाकर जान देने की धमकी भी दे डाली। फिर महल को डीडीए फ्लैट की भी पेशकश की गई लेकिन उन्होंने महल से कम कुछ भी लेने से इंकार कर दिया। तब जाकर उन्हें 14वीं सदी में बनी एक इमारत दी गई।
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malcha mahal - फोटो : सोशल मीड‌िया
उस वक्त उसे बिस्तादरी खंडहर के नाम से जाना जाता था जो 14वीं शताब्दी में शिकारगाह के रूप में प्रयोग किया जाता था। माना जाता है कि इसका निर्माण सुल्तान फिरोजशाह तुगलक ने कराया था। चूंकि यह मालचा मार्ग पर स्थित था इसलिए इसका नाम मालचा महल रख दिया गया।

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malcha mahal
हालांकि परिवार ने शुरुआत से ही अकेलेपन की जिंदगी चुनी। महल के चारों को खूंखार कुत्ते तैनात किए गए थे और साइनबोर्ड भी लगा दिया गया था कि अगर अंदर आते हैं तो किसी भी अंजाम को भुगतने को तैयार रहें।

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malcha mahal - फोटो : सोशल मीड‌िया
लेकिन यहां आने के बाद भी परिवार काफी दुखी रहा। बिना पानी और बिजली के ‌जीवन काफी मुश्किल रहा। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को काफी पत्र भी लिखे लेकिन कुछ न हुआ।

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malcha mahal - फोटो : सोशल मीड‌िया
10 सितंबर 1993 को आखिर वलीयत महल ने आत्महत्या कर ली। चार साल पहले नवाब की बहन सकीना की भी मौत हो गई। इसके बाद रजा पूरी तरह अकेले हो गए। मालचा महल के पास ही स्थित इसरो अर्थ स्टेशन के गार्ड ने बताय कि महल के अंदर पुलिसवालों का भी जाना मना था।

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malcha mahal - फोटो : अमर उजाला
उसने बताया कि उनके पास कई कुत्ते थे लेकिन पिछले एक साल से मैंने एक ही देखा है। गार्ड ने रजा को कभी-कभी साइकलिंग करते तो देखा था लेकिन कभी कोई सामान ले जाते नहीं देखा। कोई नहीं जानता वह कैसे जिंदा रह रहा था।

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malcha mahal - फोटो : अमर उजाला
यह महल ऐसा था जिसके अंदर घुसने का रास्ता भी बंद था पत्रकारों को दीवार फांदकर वहां जाना पड़ा। अंदर देखा तो महल में सब कुछ बिखरा पड़ा था। सिवाय एक टेबल के जिस पर चाय के कप और केतलियां करीने से सजाई गई थीं। एक लाल रंग का टेलीफोन था वो भी टूटा पड़ा था।
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malcha mahal - फोटो : सोशल मीड‌िया
नवाब के आख‌िरी द‌िनों के बारे में बताते हुए इसरो के गार्ड ने बताया क‌ि वह हमेशा राजशाही की ज‌िंदगी ज‌िए लेक‌िन जब से वो बीमार पड़े वो काफी बदल गए। पहले तो वो क‌िसी से बात नहीं करते थे लेक‌िन बीमार होने के बाद उन्होंने एक बार गार्ड से आम और आ‌इसक्रीम मंगाई थी। गार्ड चाहता है क‌ि मालचा महल में कई ऐसे दस्तावेज हैं जो ऐत‌िहास‌िक महत्व के हैं सरकार को उन्हें सुरक्ष‌ित रखना चाह‌िए।
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