प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से चलने वाली पहली मॉडल ट्रेन महामना से सफर करने की सोच रहे हैं तो आप जेब ढीली करने के लिए तैयार रहें। (सभी फोटो: अनिल कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली)
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क्यों खास है मोदी की ये स्पेशल ट्रेन, क्या हैं खामियां
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25 जनवरी से नियमित रूप से नई दिल्ली-वाराणसी के बीच चलने वाली इस ट्रेन में अन्य मेल, एक्सप्रेस के बेसिक फेयर से 15 प्रतिशत ज्यादा किराया वसूला जाएगा।
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एक हजार किलोमीटर के सफर के लिए जहां मेल/एक्सप्रेस ट्रेन के एसी-3 में सफर करने के लिए आपको 1156 रुपया खर्च करना होता है वहीं महामना से सफर करने के लिए आपको 1348 रुपया खर्च करना होगा। रेलवे इन दिनों आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडल कोच वाली ट्रेन चलाने की मुहिम में जुटी है।
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इस तरह की पहली ट्रेन नई दिल्ली से बनारस के बीच चलाने की घोषणा की गई है। सुविधा के नाम पर रेलवे कीमत भी वसूलने की तैयारी में है।
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अगर आप एक से 295 किलोमीटर का सफर इस ट्रेन के एसी-3 कोच में करते है तो बेस फेयर आपको 492 रुपया चुकाना होगा, एसी-2 में 705 रुपया और एसी फर्स्ट में 1205 रुपया देना होगा।
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1001 किलोमीटर सफर करते है तो आपको एसी-3 के लिए 1348 रुपया, एसी-2 में 1965 रुपया और एसी-1 में 3381 रुपया देना होगा। 1501 किलोमीटर सफर करते हैं तो स्लीपर क्लास में 659 रुपया, एसी-3 में 1710 रुपया, एसी-2 में 2517 रुपया, एसी-1 में 4356 रुपया लगेगा।
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2001 किलोमीटर यात्रा करेंगे तो आपसे स्लीपर क्लास के लिए बेस फेयर 803 रुपया, एसी-3 के लिए 2056 रुपया, एसी-2 के लिए 3058 रुपया और एसी-1 में 5313 रुपया लिया जाएगा।
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5000 किलोमीटर का सफर करने पर स्लीपर क्लास के लिए 1354 रुपया, एसी-3 के लिए 3465 रुपया, एसी-2 केलिए 5121 रुपया और एसी-1 के लिए 9012 रुपया चुकाना पड़ेगा।
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बता दें कि बेस फेयर के साथ ही आरक्षण चार्ज, सरचार्ज, सुपरफास्ट ट्रेन सपलिमेंट्री चार्ज, सर्विस टैक्स, कैटरिंग चार्ज भी वसूला जाएगा। इस ट्रेन में कंशेसन पास, वारंट, कूपन पास समेत अन्य कंशेसन की सुविधा मिलेगी। 12 साल से कम उम्र के बच्चों का टिकट पुराने नियम के आधार पर ही लगेगा।
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मेल/एक्सप्रेस ट्रेन का बेस फेयर 1000 किलोमीटर तक स्लीपर में 439 रुपया, एसी-3 में 1156 रुपया, एसी-2 में 1630 रुपया, एसी-1 में 2734 रुपया है। 1500 किलोमीटर तक स्लीपर में 566 रुपया, एसी-3 के लिए 1472 रुपया, एसी-2 में 2096 रुपया, एसी-1 में 3538 रुपया। इसके अतिरिक्त अन्य चार्ज वसूला जाता है।
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मध्यप्रदेश में तैयार किया गया यह कोच सोमवार को दिल्ली के निजामुद्दीन व सफदरजंग रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शित किया गया जिसे देखने के लिए रेल मंत्री सुरेश प्रभु भी मौजूद थे।
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हर कोच में दो अग्निशामक यंत्र लगाए गए हैं। सीटें फायर प्रूफ पॉलीविनाइल मैटेरियल की हैं। नए मॉडल रैक को इस तरह से तैयार किया गया है कि स्लीपर क्लास में भी थर्ड एसी जैसी सुविधाएं यात्रियों को मिल सके।
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साइड लोअर बर्थ में अभी तक ट्रेनों में दो हिस्से होते थे, मॉडल कोच में इसके तीन हिस्से कर दिए गए हैं।
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विशेष बात यह है कि इस बीच के हिस्से को उठाने पर यह टेबल बन जाता है। इसे भोजन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
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हर बर्थ में रीडिंग लाइट है। रात के वक्त इस लाइट को जलाकर लोग पढ़ाई भी कर सकते हैं।
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स्लीपर क्लास में शौचालय खाली है या नहीं, इसकी जानकारी कोच के गेट पर लगे इंडिकेटर से ही मिल जाएगी। यात्री अपने बर्थ पर बैठे-बैठे जान सकेंगे कि शौचालय खाली है या भरा हुआ है।
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सफाई के लिए जगह-जगह डस्टबीन लगे हैं। एसी फर्स्ट क्लास में पर्दे बंद करने व खोलने के लिए मॉडल कोच में बटन लगाए गए हैं।
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बटन दबाने पर ऑटोमेटिक पर्दा खुलता व बंद होता है। हालांकि इस मॉडल कोच में कुछ कमियां भी हैं। निचला बर्थ इतना नीचे कर दिया गया है कि उसके नीचे सूटकेस या अन्य सामान रखना बेहद मुश्किल होगा।
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इसी तरह स्लीपर क्लास का सिंक गोलाकार व छोटा है। इससे पानी बाहर फैल सकता है। जिससे गंदगी हो सकती है। फर्श पर पानी से फिसलन भी हो सकती है।
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एसी फर्स्ट के शौचालय में नहाने के लिए शॉवर लगा है। कोच में इंटेरियर का भी उपयोग किया गया है। कोच की दीवार पर बुके लगाने का जगह हैं। हर केबिन में एक सीनरी लगाई है। सेकंड एसी कोच में नीचे वाले बर्थ के बीच में फोल्डेबल टेबल है।
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इसका उपयोग भोजन या पढ़ाई के लिए किया जा सकता है। बर्थ रीडिंग लाइट एडजस्ट कर सकते हैं। हर कोच में ट्रेन का टाइम टेबल लगाने के लिए फ्रेम है। फायर एक्सट्विंगिसर के लिए अलग बॉक्स बनाया गया है।दरवाजे व खिड़की का कांच पहले की तुलना में बड़ा है।
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एसी फर्स्ट में कोच अटेंडेंट को बुलाने के लिए कॉल बेल लगी है। सीट में जर्कलेस स्प्रिंग लगी है। तेज गति में भी झटके नहीं महसूस होंगे। बायो टॉयलेट लगा हैं सभी कोच में मोबाइल व लैपटॉप चार्जिंग प्वाइंट है। कोच के फ्लोर को कारपेट की तरह पेंट किया गया है।