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जानिए उस शख्स के बारे में सबकुछ जिसकी वजह से गिरने की कगार पर है केजरीवाल सरकार

Sat, 20 Jan 2018 02:54 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार को चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को लाभ का पद मामले में अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद आयोग ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति के पास भेज दी। अब अंतिम फैसला राष्ट्रपति कोविंद के हाथ में है। लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि पार्टी में भूचाल लाने वाले शख्य कौन हैं ?
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पार्टी में भूचाल लाने वाले शख्स 31 साल के प्रशांत पटेल हैं। पटेल हिंदू लीगल सेल के सदस्य हैं। खुद को साधारण व्यक्ति बोलने वाले पटेल का कहना है कि वह एक सधारण व्यक्ति हैं जो राजनीति में रूचि रखते हैं। पटेल ने 19 जून 2015 को तत्कालीन राष्ट्रपति के समक्ष याचिका दायर कर संसदीय सचिवों की गैरकानूनी नियुक्ति पर सवाल खड़े किये थे। उन्होंने यह याचिका केजरीवाल के विधायकों को संसदीय पद पर नियुक्त करने के 98 दिन बाद दायर की थी। 
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उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से ताल्लुक रखने वाले पटेल ने अपनी आरंभिक शिक्षा जहानाबाद के सरस्वती विघा मंदिर से पूरी की। इसके बाद इलाहाबाद विश्वविघालय से कंप्यूटर और फिजिक्स में ग्रेजुएशन किया। अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन की शिक्षा नोएडा के फुटवेयर डिजाइन एंड डेवेलेप्मेंट इंस्टीट्यूट से की। अपनी एलएलबी की पढ़ाई पटेल ने ग्रेटर नोएडा की चौधरी चरण सिंह विश्वविघायल से पूरी की। 

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इससे पहले प्रशांत पटेल 2014 में सुर्खियों में आये थे जब उन्होंने फिल्म पीके में हिंदू देवी देवताओं का गलत चित्रण करने पर एक्टर आमिर खान और डायरेक्टर राजकुमार हिरानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद जेएनयू नारेबाजी मामले में दोषी कन्हिया कुमार ने जब अपनी बेल के लिए अर्जी दी थी तब पटेल ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप किया था।
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पटेल ने अपनी याचिका में विधायकों की नियुक्ति का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि वह लाभ के पद का प्रयोग कर रहे हैं और उनकी सदस्यता को अयोग्य घोषित किया जाए। पटेल के ऐसा करने के ठीक बाद केजरीवाल ने साल 2015 में दिल्ली विधानसभा में एक बिल पास किया जिसमें संसदीय सचिवों को लाभ के पद से अलग रखा गया था। फिर बिल तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के पास गया जिसके बाद उन्होंने यह मामला चुनाव आयोग को सौंप दिया।
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शुक्रवार की शाम मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए प्रशांत पटेल ने कहा, 'मैंने याचिका इसलिए दायर नहीं की कि मैं किसी पार्टी का सदस्य हूं। मैंने यह एक साधारण व्यक्ति होने के नाते दायर की। अगर कोई दिल्ली में राजनीती में रूचि रखता है तो उसके लिए ऐसा कुछ ना करना नामुमकिन सा है। मैंने यह महसूस किया था कि यह गलत है फिर मैंने इसपर जांच की तो मुझे पता चला कि यह असंवैधानिक है। जिसके बाद मैंने इसकी शिकायत की। 
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सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले पटेल ने अपनी वेबसाइट में कहा था कि वह सामाज पर प्रभाव डालने वाले सामाजिक मुद्दों को उठाने में सहायक हैं। बीजेपी से लिंक के आरोपों का जवाब देते हुए पटेल ने कहा, 'मैंने एक साधारण व्यक्ति होने के नाते केस किया। यह आरोप नये नहीं हैं पर यहां ये एक कानूनी मुद्दा है जो कि आज सही भी साबित हुआ। मैं वकालत करता हूं और आगे भी अपना ये काम जारी रखूंगा।
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