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तस्वीरें: साढ़े 4 साल तक ये 9 मांगें पूरी न होने के कारण भड़के किसान

Tue, 02 Oct 2018 11:47 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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kisan kranti rally - फोटो : pti
यूपी, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान समेत कई राज्यों के किसानों का गुस्सा एकदम यूं ही नहीं फूट पड़ा। केंद्र में वर्ष 2014 में नई सरकार का गठन हुआ तो किसानों ने भी साढ़े चार साल इंतजार किया। भाजपा के चुनावी एजेंडे के लागू होने की आस टूटती दिखाई दी तो सरकार की इस बेरुखी पर किसानों का दर्द छलका और वह सड़कों पर उतर आए। किसानों ने केंद्र सरकार को अपनी ताकत का अहसास कराकर जता दिया कि उनके मुद्दों पर बेरुखी भारी पड़ सकती है।
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kisan rally
भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत का कहना है कि किसान शांतिप्रिय होता है। खेत-खलिहान और घर के कामकाज के बाद उसके पास इतना वक्त नहीं होता कि वह राजनीति करे। उन्होंने भाजपा का नाम लिए बिना कहा कि किसानों ने ही केंद्र की इस सरकार को बनाया था, लेकिन अब वही सरकार उपेक्षा कर रही है। किसानों ने 2014 में सरकार बनाकर तकरीबन साढ़े चार साल तक अपनी समस्याओं के हल होने का इंतजार किया। केंद्र सरकार ने किसानों की एक भी समस्या का हल नहीं किया। किसान राजनीति नहीं आंदोलन करना जानता है। यही उनके पास अंतिम चारा बचा था। ऐसे में किसानों ने सड़कों पर उतरकर सिर्फ अपने हितों की बात की है।
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किसान क्रांति यात्रा - फोटो : अमर उजाला
कई मायने हैं चुनाव से पहले सरकार को घेरने के
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार को घेरने के भाकियू कई कारण गिना रही है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो किसानों के इस आंदोलन से सरकार के खिलाफ एक माहौल तैयार होगा। समय रहते डैमेज कंट्रोल न किया गया तो सत्तासीन दल को इसका खामियाजा उठाना पड़ सकता है। वहीं सत्ता से नाराज किसानों पर विपक्षी दल भी डोरे डाल रहे हैं। ये है मांग...

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kisan kranti yatra
- गन्ना भुगतान 14 दिन में होना चाहिए। 
-  10 वर्ष पुराने ट्रैक्टरों पर रोक हटे। 
- सरकारी रेट से कम मूल्य पर फसल की खरीद करने वाले पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।  
- तमाम राज्यों में बिजली फ्री है। यूपी में भी किसानों को फ्री बिजली मिले। 
- भूमि अधिग्रहण अधिनियम में कोई बदलाव न हो।
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kisan rally
- राज्य सरकार की तर्ज पर केंद्र सरकार भी किसानों की कर्ज माफी करे। 
- खेती को मनरेगा से जोड़ा जाए, डिजिटल पेमेंट हो और गन्ना भुगतना सीधा बैंकों से जोड़ दिया जाए।
- एग्रीकल्चर 18 मंत्रालयों में बंटा है, केवल एक मंत्रालय को नोडल बनाया जाए। 
- किसान को यूनिट मानते हुए फल बीमा का लाभ मिले और 5 से 10 दिन का संसद सत्र सिर्फ किसानों के नाम पर हो। 
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