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Kargil War: युद्ध में आसमान से आग बरसाता था 'बहादुर' और थर्रा उठता था पाकिस्तान, डर के मारे कहता था 'चुड़ैल'

Tue, 26 Jul 2022 01:54 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Kargil War, MiG 27 India fighter jet - फोटो : अमर उजाला
कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को पस्त करने में थलसेना के साथ ही वायुसेना ने भी अभूतपूर्व योगदान दिया था। वायुसेना के एक लड़ाकू विमान ने पाकिस्तान को इतनी गहरी चोट दी थी कि पाकिस्तान उसे 'चुड़ैल' कहता था। अब आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के इस 'बहादुर' से पाकिस्तान कितना घबराया हुआ होगा। 

कारगिल की ऊंची चोटियों पर घात लगाकर बैठे पाक सैनिकों को यह अंदेशा नहीं था कि उनके ऊपर आसमान से भी हमला हो सकता है। भारतीय वायुसेना के मिग 27 लड़ाकू विमानों ने आसमान से पाक सैनिकों पर आग बरसानी शुरू कर दी। वायुसेना के इस बहादुर ने पाक सेना के सप्लाई और पोस्ट पर इतनी सटीक और घातक बमबारी की जिससे उनके पांव उखड़ गए।



1700 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार और हवा से जमीन पर अचूक हमला करने में सक्षम इस रूसी लड़ाकू विमान को कारगिल युद्ध में पराक्रम दिखाने के लिए बहादुर नाम दिया गया। इसका खौफ पाकिस्तान के दिलोदिमाग में ऐसा छा गया कि उसने 'चुड़ैल' नाम दे डाला।
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मिग 21 - फोटो : IAF
जब यह विमान जमीन की सतह के करीब उड़ान भरता था तब कोई भी रडार बड़ी मुश्किल से इसकी पहचान कर पाता था। इसकी आवाज दुश्मनों के दिलों में खौफ पैदा करती थी। हालांकि भारतीय वायुसेना में अपने 38 साल के सफर के दौरान इस लड़ाकू विमान ने कई उतार-चढ़ाव भी देखें हैं।

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मिग 21 - फोटो : Social Media
हवा से जमीन पर सटीक निशाना लगाने में था माहिर
मिग-27 अपने जमाने का सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमान था। यह हवा से जमीन पर निशाना लगाने में इतना माहिर था कि दुश्मन को भनक लगने से पहले यह उसे नेस्तनाबूत कर देता था। यह फाइटर जेट 1700 किलोमीटर प्रतिघंटे की उड़ान भरने में सक्षम था। इसके अलावा यह चार हजार किलोग्राम के वॉरहेड को ले जा सकता था।


 

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मिग 21 - फोटो : Social Media
साल 1981 में भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान और चीन से निपटने के लिए विशेष किस्म के तेज लड़ाकू विमानों की जरूरत थी। उस समय पश्चिमी देश जैसे अमेरिका, ब्रिटेन पाकिस्तान के करीबी थे और वे भारत को अपने उन्नत लड़ाकू विमान नहीं देने वाले थे। उस समय रूस ने अपने मिग 27 विमानों को भारत को बेचने की पेशकश की।

 
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मिसाइल दागता हुआ मिग 27 - फोटो : IAF Twitter
रूस ने यहां तक कहा कि वे इस विमान को बनाने का लाइसेंस भी भारत को देगा। इसके बाद 1985 में औपचारिक रूप से यह विमान भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ। रूस से लाइसेंस मिलने के बाद हिंदुस्तान एयरोटॉनिक्स लिमिटेड ने मिग 27 विमानों के 165 यूनिट का निर्माण किया। इसके अलावा एचएएल ने 86 विमानों को अपग्रेड भी किया। 
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मिग-27 - फोटो : सोशल मीडिया
समारोह के बाद वायुसेना से हटाया गया मिग-27 लड़ाकू विमान
भारतीय वायुसेना ने साल 2019 मे वायुसेना स्टेशन जोधपुर में आयोजित एक समारोह के बाद मिग -27 विमानों को हटा दिया। इस समारोह की अध्यक्षता दक्षिण पश्चिमी एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल एस के घोटिया ने की। एयर मार्शल घोटिया ने कहा कि विमान हमेशा फ्रंटलाइन पर रहा और 1999 के कारगिल युद्ध में इसने अहम भूमिका निभाई थी। यह विमान पिछले चार दशकों से भारतीय वायुसेना के जमीनी हमले के बेड़े की रीढ़ था।
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