कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को पस्त करने में थलसेना के साथ ही वायुसेना ने भी अभूतपूर्व योगदान दिया था। वायुसेना के एक लड़ाकू विमान ने पाकिस्तान को इतनी गहरी चोट दी थी कि पाकिस्तान उसे 'चुड़ैल' कहता था। अब आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के इस 'बहादुर' से पाकिस्तान कितना घबराया हुआ होगा।
कारगिल की ऊंची चोटियों पर घात लगाकर बैठे पाक सैनिकों को यह अंदेशा नहीं था कि उनके ऊपर आसमान से भी हमला हो सकता है। भारतीय वायुसेना के मिग 27 लड़ाकू विमानों ने आसमान से पाक सैनिकों पर आग बरसानी शुरू कर दी। वायुसेना के इस बहादुर ने पाक सेना के सप्लाई और पोस्ट पर इतनी सटीक और घातक बमबारी की जिससे उनके पांव उखड़ गए।
1700 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार और हवा से जमीन पर अचूक हमला करने में सक्षम इस रूसी लड़ाकू विमान को कारगिल युद्ध में पराक्रम दिखाने के लिए बहादुर नाम दिया गया। इसका खौफ पाकिस्तान के दिलोदिमाग में ऐसा छा गया कि उसने 'चुड़ैल' नाम दे डाला।