कंझावला कांड की मृतका अंजलि की ख्वाहिश अधूरी रह गई। वह अपनी बीमार मां को किडनी दान करना चाहती थी, लेकिन घर को संभालने में उलझी अंजलि का इसका मौका नहीं मिल सका। परिवार के लिए वह इतना फिक्रमंद थी कि कोरोना काल में मां की नौकरी छूटने के बाद उसने पूरे परिवार की देखभाल का जिम्मा उठा लिया था। परिवार में सबसे बड़ी होने के नाते बीते साल जब उसकी शादी की बात चली तो खुद से पहले उसने अपनी छोटी बहन की शादी करवाने का जोर दिया। कुछ महीने पहले उसकी शादी भी करवा दी थी। बेटी के न होने का दर्द बयां करती हुई मां रेखा की आंखों से बेटी की अधूरी ख्वाहिशों पर खून के आंसू छलक पड़े।