भांजी को दबंगों की छेड़छाड़ से बचाने के कारण पत्रकार विक्रम जोशी को अपनी जान गंवानी पड़ी। दबंगों ने गाजियाबाद में विक्रम के सिर में गोली मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में दम तोड़ दिया। बुधवार को जब विक्रम जोशी के शव को छोटे भाई और ढाई साल के बेटे राघवन ने मुखाग्नि दी तो वहां मौजूद लोग आंसू नहीं रोक पाए।
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विक्रम जोशी
- फोटो : अमर उजाला
ढाई साल के मासूम को भी पता था कि अब उसके पिता उसे गोद में उठाने कभी नहीं आएंगे। विक्रम जोशी के अंतिम संस्कार में पत्रकारिता जगत के लोग, कांग्रेस व सपा के नेता शामिल हुए।
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पिता की मौत के बाद बिलखती बेटी
- फोटो : अमर उजाला
दोपहर करीब 1:15 बजे विक्रम जोशी का शव अंतिम संस्कार के लिए हिंडन घाट पर ले जाया गया। शव पहुंचने से पहले ही वहां अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। हर किसी के दिल में एक ही सवाल, एक ही कसक थी कि महज पुलिस से छेड़छाड़ की शिकायत करने पर बदमाशों ने उनकी हत्या क्यों कर दी।
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विक्रम जोशी की बहन
- फोटो : अमर उजाला
अंतिम संस्कार में विक्रम जोशी का ढाई साल का बेटा राघवन, दो बहनें और छोटे भाई समेत रिश्तेदार, पड़ोसी और राजनीतिक दलों के लोग भी शामिल हुए। कांग्रेस जिलाध्यक्ष बिजेंद्र यादव ने कहा कि यूपी में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। बदमाश सरेआम बहन-बेटियों से छेड़छाड़ कर रहे हैं और शिकायत करने पर परिजनों की हत्या कर रहे हैं। पुलिस इस सब को देखती रहती है। मुख्यमंत्री को नैतिक आधार पर कुर्सी छोड़ देनी चाहिए।
विक्रम जोशी की मौत के बाद अस्पताल के बाहर जुटी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
रालोद राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी ने कहा कि विक्रम जोशी की हत्या जिन पुलिसकर्मियों की लापरवाही के कारण हुई है, उन्हें तुरंत निलंबित किया जाए। विक्रम के परिवार को 25 लाख की आर्थिक मदद, सुरक्षा और सरकारी नौकरी दी जाए। गाजियाबाद पुलिस बिल्डर विक्रम त्यागी का सुराग भी नहीं लगा पाई है। जो अधिकारी काम नहीं कर रहे उन्हें गाजियाबाद से तत्काल हटाया जाना चाहिए।