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जेएनयू फीस विवाद: प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर टूट पड़ी पुलिस, तस्वीरों में देखें कैसे बरपाया कहर?

Fri, 22 Nov 2019 03:53 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जेएनयू छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : जी पाल
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की एबीवीपी इकाई ने नया हॉस्टल मैनुअल वापस लेने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को मंडी हाउस से पार्लियामेंट स्ट्रीट तक विरोध मार्च निकाला। एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रबंधन और छात्रसंघ के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आम छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान तीन दिव्यांगजनों के साथ 160 छात्र-छात्राओं को हिरासत में लिया, जिन्हेें देर शाम छोड़ दिया गया।
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जेएनयू छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : जी पाल
जेएनयू एबीवीपी इकाई की अध्यक्षता में निकाले गए विरोध मार्च में दिल्ली विश्वविद्यालय, अंबेडकर यूनिवर्सिटी, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, इलाहाबाद विश्वविद्यालय समेत कई विश्वविद्यालयों के एबीवीपी से जुड़े छात्र भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने मंडी हाउस से बाराखंबा की ओर जाने वाली सड़क को छावनी में तब्दील कर दिया था। एबीवीपी कार्यकर्ता और पुलिस के बीच में तीखी नोकझोंक होती रही।
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जेएनयू छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : जी पाल
पुलिस ने बैरिकैड्स तोड़ने वाले छात्रों को काबू करने कोशिश की, लेकिन वे पार्लियामेंट स्ट्रीट तक पहुंचने में कामयाब हो गए।  प्रदर्शनकारी शास्त्री भवन के बाहर अपना विरोध दर्ज करवाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन से आगे नहीं जाने दिया। विरोध मार्च के चलते आसपास के लुटियन जोन के कई इलाकों में जाम की स्थिति रही।

प्रदर्शनकारियों ने हॉस्टल मैनुअल को वापस लेने, बढ़ी फीस को पूर्णतया वापस लेने और कक्षाओं को शुरू करने की मांग रखी। इसक अलावा हाईपावर कमेटी भंग करने की भी मांग की गई। वहीं, एबीवीपी इकाई के मंत्री मनीष जांगिड़ ने मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखारियाल निशंक से नया हॉस्टल मैनुअल वापस लेने या फिर अपने पद से इस्तीफा देने की मांग रखी है।

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जेएनयू छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : जी पाल

फीस बढ़ोतरी का फैसला अपनी मर्जी से न लें प्रशासन

हम हॉस्टल मैनुअल के  तहत बढ़ाई गई फीस पूरी तरह से वापसी की मांग करते हैं। इससे कम हमें कोई फैसला मान्य नहीं है। छात्रों की एकजुटता के चलते फीस वापसी की लड़ाई को मजबूती मिली है। हमारी मांग है कि फीस बढ़ोतरी जैसे फैसले विश्वविद्यालय प्रबंधन अपनी मर्जी से न ले। ऐसे फैसलों में छात्रों की भागीदारी बेहद जरूरी है।-सिद्धार्थ यादव, प्रदेश मंत्री, एबीवीपी दिल्ली
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जेएनयू छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : जी पाल

लेफ्ट ने आंदोलन को हाईपावर कमेटी के समक्ष रखा गिरवी

जेएनयू छात्रसंघ ने आम छात्रों के साथ धोखा किया है। आम छात्रों के हॉस्टल मैनुअल के आंदोलन को सरकार की हाईपवार कमेटी के समक्ष गिरवी रख दिया है। हमारी मांग है कि हॉस्टल मैनुअल को जल्द से जल्द वापस लेने का एलान हो, ताकि कक्षाएं सुचारू रूप से शुरू हो सकें।-दुर्गेश कुमार, इकाई अध्यक्ष, जेएनयू एबीवीपी
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जेएनयू छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : जी पाल

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ जेएनयू के आम छात्रों के साथ

जेएनयू में अनुचित फीस वृद्धि का हम विरोध करते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ जेएनयू के आम छात्रों की लड़ाई में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़ा है। हम सरकार से मांग करते हैं कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को अनुचित फीस वृद्धि करने से रोके तथा वित्तीय स्वायत्तता को पूरी तरह एक निकाय के माध्यम से नियंत्रित करें। डीयू में भी लगातार कई कॉलेजों द्वारा इसी तरह का छात्र विरोधी रवैया फीस को लेकर हमने देखा है और उसका पुरजोर विरोध भी किया है।-अक्षित दहिया, अध्यक्ष, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ
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जेएनयू छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : जी पाल

छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई निंदनीय: चोपड़ा

नई दिल्ली। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई और फीस बढ़ाने की निंदा की है। चोपड़ा ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस संघर्ष की इस घड़ी में जेएनयू छात्रों के साथ खड़ी है। जेएनयू मुद्दे पर बृहस्पतिवार को राजीव भवन स्थित पार्टी कार्यालय में आपात बैठक हुई। सुभाष चोपड़ा के नेतृत्व में हुई बैठक में पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष व पूर्व विधायक हरी शंकर गुप्ता की ओर से रखे गए प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। प्रस्ताव में फीस बढ़ाने के फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की गई।

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जेएनयू छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : जी पाल
वहीं छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई की निंदा की गई। इस दौरान सुभाष चोपड़ा ने कहा कि आरोप लगाया कि जेएनयू प्रशासन और पुलिस, केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं। इससे साबित होता है कि संविधान में अपनी बात रखने का जो अधिकार दिया गया है सरकार उसे भी दबाना चाहती है। चेतावनी दी कि यदि छात्रों को न्याय नहीं मिला तो प्रदेश कांग्रेस उनके समर्थन में आंदोलन करेगी। बैठक में पूर्व डूसू अध्यक्ष रोकी तुषीर, रागिनी नायक, अमृता धवन, नीतू वर्मा सोईन, अल्का लाम्बा, रोहित चौधरी, डूसू सचिव आशीष लाम्बा, सीपी मितल,  कमल कांत शर्मा, मांगे राम शर्मा, जितेंद्र बघेल, प्रवीण राणा, अक्षय लाकड़ा मौजूद रहे। 

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जेएनयू छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : जी पाल

जेएनयू छात्रों पर लाठीचार्ज अमानवीय: शिवसेना

मुंबई। शिवसेना अब उसकी बदल रही राजनीति के संकेत देने लगी है। महाराष्ट्र की इस पार्टी ने अब केंद्र की मोदी सरकार पर जेएनयू को लेकर हमला बोला है। शिवसेना ने कहा है कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्रों पर दिल्ली पुलिस का लाठीचार्ज करना अमानवीय है। दिल्ली पुलिस का दृष्टिहीन छात्रों से जो रवैया रहा वैसी ज्यादती सरकार को नहीं करनी चाहिए थी।

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जेएनयू छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : जी पाल
शिवसेना के मुखपत्र सामना में कहा गया है कि अगर कांग्रेस के शासनकाल में ऐसा होता तो भाजपा संसद में व्यवधान पैदा करती और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जैसे संगठनों से राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान कर देती। पार्टी ने छात्रों से भी कहा है कि वे संयम का परिचय दें। इसमें कहा गया है कि जेएनयू ने नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी सहित कई राजनीतिक और विशेषज्ञ देश को दिए हैं।

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जेएनयू छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : जी पाल

जेएनयू में बढ़ाई गई फीस हो सकती है वापस

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस में हॉस्टल मैनुअल पर पिछले 28 अक्तूबर से मचा विवाद जल्द खत्म होने की संभावना है। जेएनयू के आंदोलनरत छात्रों को शांत करने के लिए सरकार बढ़ाई गई फीस में आंशिक रोलबैक कर सकती है। सरकार की ओर से छात्रों की दिक्कतों को समझते हुए सोमवार या मंगलवार तक राहत देने की संभावना है। वहीं, जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आईषी घोष का कहना है कि शुक्रवार को कैंपस में केंद्र सरकार की समिति के समक्ष पहले हॉस्टल मैनुअल को पूरी तरह से रोलबैक की मांग की जाएगी। इसके बाद नया हॉस्टल मैनुअल बनाने पर सहमति दी जाएगी। हालांकि उसमें विश्वविद्यालय प्रबंधन को छात्रसंघ को भी शामिल करना होगा।

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जेएनयू छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : जी पाल
जेएनयू कैंपस में शाम चार बजे मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा हॉस्टल मैनुअल पर गठित तीन सदस्यीय समिति और छात्रसंघ समेत आम छात्रों के साथ बैठक आयोजित होगी। इसी बैठक पर जेएनयू हॉस्टल मैनुअल पर उठा विवाद समाप्त होने की भी संभावना है। क्योंकि इसी बैठक में छात्रसंघ अपनी पूरी मांग रखेगा। सूत्रों के मुताबिक, कमेटी बैठक के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। इसी पर आगामी पांच से छह दिनों में राहत का फैसला होने की संभावना है। दरअसल सरकार छात्रों को नाराज नहीं करना चाहती है पर इस प्रकार के आंदोलनों के माध्यम से किसी भी फैसले को वापस लेने की परंपरा शुरू करने के हक में भी नहीं है।

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जेएनयू छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : जी पाल

कुलपति छात्रसंघ से बात करते तो नहीं होता विवाद: छात्रसंघ

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आईषी घोष ने अमर उजाला को बताया कि कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार हॉस्टल मैनुअल पर छात्रसंघ से बात करते तो ऐसा विवाद नहीं होता। हम भी मानते हैं कि जेएनयू में हॉस्टल फीस बेहद कम है। दस रुपये में आज के दौर में कुछ नहीं आता है। हालांकि बात करने का एक ढंग होता है। हम शुक्रवार को सबसे पहले समिति से हॉस्टल मैनुअल रोलबैक की मांग करेंगे। इसके बाद हम चाहते हैं कि विश्वविद्यालय प्रबंधन, हॉस्टल कमेटी छात्रसंघ को शामिल करते हुए नया हॉस्टल मैनुअल तैयार करें, ताकि छात्रसंघ आम छात्रों को फीस बढ़ाने का सही तर्क दे सके।

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जेएनयू छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : जी पाल
यह नहीं कि दस रुपये फीस को सीधे तीन सौ रुपये तक बढ़ा दिया जाए।  घोष के मुताबिक, मानव संसाधन विकास मंत्रालय व यूजीसी की ओर से विश्वविद्यालय को मिलने वाले फंड में कोई कटौती नहीं की गई है। ऐसे में जेएनयू प्रशासन किस आधार पर पैसे की कमी की बात कह रहा है। पैसे की दिक्कत है तो उस समस्या का हल भी मिल बैठकर निकाला जा सकता है। छात्रों का विरोध फीस बढ़ाना नहीं, बल्कि एक साथ 999 फीसदी बढ़ोतरी था। ऐसे में कई छात्र पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर हो जाते। विश्वविद्यालय प्रबंधन पैसे की कमी और हॉस्टल फीस बढ़ोतरी पर छात्रसंघ के साथ आम छात्रों से बात करता तो यह विवाद उत्पन्न ही नहीं होता।
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जेएनयू को मिली डीयू का साथ - फोटो : अमर उजाला
हॉस्टल मैनुअल रोलबैक के बगैर कैंपस नहीं होगा सामान्य: शिक्षक संघ
जेएनयू शिक्षक संघ के 13 सदस्यों और तीन सदस्यीय समिति की बृहस्पतिवार को मंत्रालय में बैठक हुई। संघ ने बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन के कामकाज पर सवाल उठाते हुए जेएनयू एक्ट के तहत काम न करने का आरोप लगाया है। जेएनयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. डीके लोबियाल के मुताबिक, समिति के समक्ष तीन बिंदुओं पर फोकस किया गया। हॉस्टल मैनुअल को रोलबैक के बगैर किसी भी तरह कैंपस सामान्य नहीं हो सकता है। उन्हंोंने बताया कि प्रशासन की फिजुलखर्ची के चलते विश्वविद्यालय में पैसे की कमी आई है।
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