जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में रविवार शाम हुए बवाल के बाद कैंपस के आसपास के इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया। कई जिलों की पुलिस बुलाकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कैंपस के बाहर डेरा डाले हुए हैं। पुलिस ने जेएनयू कैंपस की ओर जाने वाले बाबा गंगनाथ मार्ग को बेरीकेड लगाकर आम लोगों के लिए बंद कर दिया है।
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- फोटो : अमर उजाला
बवाल के बाद सोमवार को जेएनयू मेन गेट के बाहर दिनभर अफरा-तफरी का माहौल रहा। पुलिस की मौजूदगी में वामपंथी समर्थक नारेबाजी करते रहे। दूसरी ओर इस बवाल के बाद जमात-ए-इस्लामी हिंद का एक प्रतिनिधि मंडल जेएनयू पहुंचा। इन लोगों ने पुलिस और जेएनयू प्रशासन को रविवार को हुए हमले के लिए जिम्मेदार बताया।
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कैंपस में रविवार को हुए बवाल के बाद से कैंपस के बाहर पुलिस बल तैनात है। खुद जिला पुलिस उपायुक्त देवेंद्र आर्य मौके पर मौजूद थे। कैंपस के मेन गेट के पास वाटर केनन (पानी की बौछार वाली गाड़ी) तैनात कर दी गई थी। नेल्सन मंडेला मार्ग की ओर से जेएनयू की ओर जाने वाले बाबा गंगनाथ मार्ग को बंद कर वहां वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी। यूनिवर्सिटी की ओर पैदल आने वाले लोगों को भी पुलिस पूछताछ के बाद ही आगे जाने की इजाजत दे रही थी।
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जेएनयू के मेन गेट पर वामपंथी और एबीवीपी के छात्र मौजूद थे। नारेबाजी के दौरान पुलिस की मौजूदगी में एक दूसरे पर मारपीट का आरोप लगाकर छात्र आपस में तू-तू-मैं-मैं भी करने लगे, लेकिन बाकी लोगों ने समझाकर उन्हें शांत करवा दिया। बाद में वामपंथी समर्थक और छात्र गेट के बाहर ही घेरा बनाकर नारेबाजी और गाना-बजाना करने लगे।
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जेएनयू हिंसा के विरोध में छात्रों का प्रदर्शन
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दोपहर के समय जमात-ए-इस्लामी हिंद के राष्ट्रीय सचिव मोहम्मद अहमद और एमएम खान पांच लोगों के एक प्रतिनिधि मंडल के साथ वहां पहुंचे। एमएम खान ने कहा कि देश के सभी विश्वविद्यालयों के कैंपस सुरक्षित होने चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जेएनयू मामले में पुलिस और जेएनयू प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को पूरी नहीं कर सके।
खान ने आरोप लगाया कि पुलिस ने जामिया में घुसकर जुल्म किया जबकि जूएनयू में न घुसकर जुल्म को होने दिए। इन लोगों ने आरोप लगाया कि बाहरी लोगों ने जेएनयू में घुसकर बवाल किया। खान ने मांग की है कि पुलिस मारपीट और गुंडागर्दी करने वाले लोगों की पहचान कर उन पर कार्रवाई करे।