प्लाज्मा थेरैपी
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एम्स के नर्सिंग अधिकारियों के एक ग्रुप के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली कि प्लाज्मा दान करके वह कोरोना मरीजों की जान बचा सकते हैं। एक जून को उन्होंने एम्स में जाकर प्लाज्मा दान किया, जिससे एक गंभीर मरीज को थेरेपी दी गई और उसकी जान बच गई। एक महीने बाद 30 जून को उनके पास सूचना आई की वेंकेटेश्वर अस्पताल में एक मरीज वेंटिलेटर पर है, जिसे प्लाज्मा की जरूरत है। वह तुरंत अस्पताल पहुंचे और प्लाज्मा दान किया। विपिन बताते हैं कि एक महीने में वह दो बार प्लाज्मा दान कर चुके हैं। इस काम को वह स्वेच्छा से कर रहे हैं। इससे शरीर में कोई कमी नहीं आती है। सभी लोगों को इसके लिए आगे आना चाहिए।