पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों का बदला लेते हुए भारतीय वायुसेना ने मंगलवार तड़के(26 फरवरी) पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में घुसकर वहां की जमीन से संचालित होने वाले जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को तबाह कर दिया। विदेश सचिव द्वारा दिए गए बयान के अनुसार इस एयर स्ट्राइक में जैश के सबसे बड़े आतंकी ठिकाने को भी नेस्तनाबूत कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार इस हवाई हमले में 300 से ज्यादा आतंकियों की मौत हो गई है। भारत ने कहा है कि यह हमला नॉन मिलिट्री स्ट्राइक था जिसमें सिर्फ आतंकी ठिकानों और आतंकवादियों पर हमला किया गया है इसमें किसी पाकिस्तानी नागरिक या सेना पर हमला नहीं हुआ है।
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विदेश सचिव ने ये साफ किया कि जिस आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े आतंकी ठिकाने को नष्ट किया गया है उसका संचालन जैश प्रमुख मसूद अजहर का साला युसूफ अजहर कर रहा था। वह भी इस हमले में मारा गया। आइए जानते हैं क्या है आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और क्यों खतरनाक थे इसके ठिकाने जिन्हें उड़ाने के लिए भारत ने किया एयर स्ट्राइक...
मौलाना मसूद अजहर आंतकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख है। ये वही मौलाना मसूद अजहर है जिसे 17 साल पहले 1999 में कंधार विमान अपहरण मामले में भारत ने रिहा किया था।
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मालूम हो कि 24 दिसंबर 1999 को 5 हथियारबंद आतंकवादियों ने 178 यात्रियों के साथ इंडियन एयरलाइंस के हवाई जहाज आईसी-814 का अपहरण कर लिया था। हरकत-उल-मुजाहिद्दीन के आतंकियों ने भारत सरकार के सामने 178 यात्रियों की जान के बदले में अपने तीन आतंकियों की रिहाई का सौदा किया था।
उन तीन आतंकवादियों में से एक मसूद अजहर भी था। 1999 में वाजपेयी सरकार ने यात्रियों की जान बचाने के लिए मसूद अजहर समेत तीन आतंकियों को छोड़ने का फैसला किया था। उस वक्त मौलाना मसूद अजहर आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन का सदस्य था। रिहाई के बाद पाकिस्तान के कराची में 31 जनवरी 2000 को मौलाना मसूद अजहर ने जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन की शुरूआत के साथ जेहाद की दुनिया में फिर कदम रखा।
कौन है मसूद अजहर
मसूद अजहर
जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन का मुखिया मौलाना मसूद हरकत-उल-अंसार का महासचिव भी रह चुका है। आतंकी अजहर का जन्म पाकिस्तान के बाहावलपुर में 1968 को हुआ था। ग्यारह भाई-बहनों में अजहर 10वें नंबर के थे। अजहर के पिता सरकारी स्कूल में हेडमास्टर थे। उसका परिवार डेयरी का करोबार भी करता था।
मौलाना मसूद अजहर की शिक्षा करांची में जामिया उलूम अल इस्लामिया में हुई। बाद में अजहर हरकत-उल अंसार संगठन से जुड़ गया। पहली बार अजहर को 1994 में आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में श्रीनगर में गिरफ्तार किया गया।
दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर हमले के बाद अजहर को पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था लेकिन लाहौर हाईकोर्ट के आदेश पर 2002 में उसे रिहा कर दिया गया।
2002 में अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या और उसके अपहरण के बाद अमेरिका ने अजहर मसूद को सौंपने की मांग की थी। मसूद के सहयोगी शेख अहमद सईद उमर ने पर्ल की हत्या कर दी थी।2003 में परवेज मुशर्रफ पर हुए आत्मघाती हमले के मामले में भी उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
दिसंबर 2008 में भारत और अमेरिका के दबाव के कारण पाक सरकार ने मसूद को उसके आवास पर नजरबंद कर दिया था। इससे पहले भी दो बार अजहर को हिरासत में लिया गया था हालांकि हर बार वह बचने में कामयाब रहा।
आतंकवादी मसूद अजहर
जैश-ए-मोहम्मद एक पाकिस्तानी जेहादी संगठन है जिसके आतंकी जम्मू-कश्मीर समेत भारत के कई राज्यों में हुए आतंकी हमलों में शामिल रहे हैं। मार्च इसकी स्थापना साल 2000 में मसूद अजहर ने की थी। जनवरी 2002 में जब इसे पाकिस्तान की सरकार ने बैन कर दिया तब जैश ए मोहम्मद ने अपना नाम बदलकर खुद्दाम उल इस्लाम कर लिया था।
इन देशों में प्रतिबंधित है मसूद का संगठन
मसूद अजहर के आतंकी संगठन पर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और भारत समेत कई देशों में प्रतिबंधित है। फिर भी मसूद अजहर पाकिस्तान में खुलेआम रैलियों में भारत के खिलाफ जहर उगलता है। मसूद अजहर को भारतीय विमान के अपहरण करने के लिए कभी कोई सजा नहीं मिली।
जैश-ए-मोहम्मद (आतंकी संगठन) की स्थापना फरवरी 2000 में पाक के कराची में संगठन के मुखिया मौलाना मसूद अजहर ने की। इस आतंक संगठन का मुख्य उद्देश्य कश्मीर में हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी करना व भारत में आतंकी वारदात को अंजाम देना है।
संगठन का मुख्य तरीका आत्मघाती हमला करना है। जैश-ए-मोहम्मद कट्टरपंथी विचारों वाले ऑडियो कैसेट कश्मीर भेज कर युवाओं को गुमराह करता है। इस संगठन में हरकत-उल-मुजाहिद्दीन और हरकत-उल-अंसार के कई चरमपंथी शामिल हैं।
अमेरिका की ब्लैक लिस्ट में जैश-ए-मोहम्मद, इन वारदातों को दिया अंजाम
मसूद अजहर
अमेरिका द्वारा तैयार की गई विदेशी आतंकी गुटों की सूची में पाक स्थित जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-ताइबा को रखा गया था। इस सूची में 44 आतंकी संगठन शामिल हैं। लश्कर और जैश दोनों ही लंबे समय भारत में आतंकी गतिविधियां चला रहे हैं।
इन वारदातों को दिया अंजाम
बड़ी आतंकी वारदातें : संसद भवन पर हमला (दिसंबर, 2001), जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर हमला (अक्टूबर 2001), इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपहरण (दिसंबर 1999), अयोध्या और वाराणसी धमाके।
नवंबर, 2007 में उत्तर प्रदेश पुलिस के एसटीएफ द्वारा लखनऊ में गिरफ्तार किए गए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने पूछताछ में खुलासा किया था कि वह राहुल गांधी के अपहरण के लिए देश में आए थे।
2015 में जैश से संबंधित घटनाएं
* 15 जनवरी - दक्षिणी कश्मीर के केलर इलाके के गाडरू जंगल क्षेत्र में पांच जैश के आतंकियों को सेना द्वारा एक मुठभेड़ में ढेर किया गया। मारे गए आतंकियों में से एक जैश कमांडर मोहम्मद तोइब था जो पाकिस्तान मुल्तान का रहने वाला था जबकि बाकी के चार स्थानीय आतंकी थे।
* 20 मार्च - जम्मू संभाग के कठुआ जिले के राजबाग पुलिस थाने पर सेना की वर्दी में फिदायीन हमला हुआ, जिसमें तीन जवान शहीद हुए। इसके अलावा एक स्थानीय नागरिक की भी इसमें मौत हुई। जवाबी कार्रवाई में दो आतंकियों को भी ढेर किया गया, जबकि 10 लोग इस हमले में घायल हुए थे।
* 21 मार्च - दो आतंकियों ने जम्मू संभाग के सांबा जिले में सेना के एक कैंप पर हमला किया। सुरक्षा बलों ने दोनों को ढेर कर दिया।
* 27 जुलाई - दस लोगों सहित एक एसपी उस समय शहीद हो गए जब हथियारों से लैस तीन आतंकियों ने गुरदासपुर के दीना नगर थाने पर धावा बोला। मरने वालों में तीन आतंकी, तीन स्थानीय नागरिक और चार पुलिस कर्मी थे।
* 04 अक्टूबर - दक्षिणी कश्मीर के हारी परिगाम ट्त्राल में जैश के दो विदेशी आतंकियों को सेना ने मुठभेड़ के दौरान ढेर किया। इनकी पहचान आदिल पठान और बर्मी के तौर पर हुई थी।
* 25, नवंबर - उत्तरी कश्मीर के टंगधार में सेना के कैंप पर हुए आत्मघाती हमले में एक स्थानीय नागरिक की मौत हुई, जबकि तीन आतंकियों को सेना द्वारा ढेर किया गया।
पाकिस्तानी सेना ने भारतीय कार्रवाई की तस्वीरें जारी की
- फोटो : Twitter
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अपना वजूद खो चुके आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को पंजाब में बड़े हमले कर अपना दम साबित करने का मौका दिया है।
खुफिया सूत्रों के मुताबिक जैश अपनी ताकत बढ़ाने के लिए बब्बर खालसा जैसे पंजाब में आतंकवाद के बचे हुए गुटों से भी मदद ले रहा है। साथ ही जैश गुरदासपुर-पाठनकोट-जम्मू सेक्टर के 553 किलोमीटर की फेंसिंग के कमजोर इलाकों को भी अपने सामरिक बढ़त के तौर पर देख रहा है।
भारत की संसद पर हमले के बाद अपनी खूंखार छवि बनाने वाले जैश के आईएसआई ने करीब दस साल पहले पर कतर दिए थे क्योंकि इसके प्रमुख मौलाना मसूद अजहर ने पाक सेना को ही चुनौती देना शुरू कर दिया था। गौरतलब है कि कांधार हाईजैंकिंग के सौदे में भारत के जेलों में बंद जिन तीन आतंकियों को छोड़ा गया था वे सभी जैश के थे।
जैश प्रमुख मसूद अजहर उन्हीं छोड़े गए आतंकियों में एक था। सूत्रों ने बताया कि जैश ए मोहम्मद लश्कर ए तैयबा से ज्यादा खतरनाक और जिद्दी संगठन है। आईएसआई की ओर से जैश में नयी जान फूंकना भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए नयी चुनौती खड़ी कर रहा है।