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B'Day Special: जितनी दिलचस्प है इंदिरा गांधी की लव स्टोरी की शुरुआत उतना ही दर्दनाक हुआ अंत

Tue, 29 Nov 2016 04:50 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का आज 100वां जन्मदिन है। इंदिरा गांधी को भारतीय राजनीति के इतिहास में एक बेहद मजबूत और दृढ़ इरादों वाली महिला राजनेता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अपनी दृढ़ता का परिचय सिर्फ अपने राजनीतिक फैसले लेकर ही नहीं दिया बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी वो उतनी ही मजबूत ‌इरादों वाली थीं।
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इसका परिचय लेखक बर्टिल फलक की हालिया प्रकाशित किताब 'Feroze the forgotten gandhi' में भी मिलता है। इस किताब में लेखक ने इंदिरा और फिरोज के संबंधों को लेकर कुछ ऐसे ‍खुलासे किए हैं, जिसने इन दोनों के संबंधों की एक नई परत खोलकर रख दी है।
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अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के लिए इस किताब का रिव्यू करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नटवर सिंह ने ‌लिखा है कि जब ‌इंदिरा गांधी महज 16 साल की थीं तब से ही फिरोज उनके प्यार में थे और उन्हें कई बार प्रपोज भी किया था।

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हालांकि इन दोनों का प्रेम तब परवान चढ़ा जब ये दोनों पेरिस के एक शहर में मिले और वहीं तय कर लिया ‌कि अब बाकी जीवन साथ में बिताएंगे।
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इस बीच वो दोनों लंदन के एक कॉलेज में साथ ही पढ़ाई भी कर रहे थे। हालांकि लेखक बर्टिल ने यहां एक दिलचस्प जानकारी ये भी दी है कि इंदिरा और फिरोज दोनों ही पढ़ने में बहुत अच्छे नहीं थे। यही कारण है कि दोनों को यूनिवर्सिटी की डिग्री भी नहीं मिल पाई थी।
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ये बात तो सब जानते हैं कि इंदिरा ने पिता के विरोध के बावजूद फिरोज से शादी की थी लेकिन इस किताब में लेखक एक नए तथ्य का खुलासा करते हैं। उन्होंने लिखा है कि दोनों की शादी पंडित लक्ष्मीधर शास्त्री ने करवाई थी।
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नटवर सिंह पंडित लक्ष्मीधर के बारे में बताते हैं कि वो सेंट स्टीफेंस में संस्कृत के प्रोफेसर थे और परंपराओं व रीति रिवाजों को लेकर उनकी कठोरता इसी बात से जाहिर होती है कि वो पहनावे को लेकर भी किसी तरह की छूट देने के पक्ष में नहीं थे।

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अपनी परंपराओं को इतनी शिद्दत से मानने वाले शख्स ने ही 1942 में इलाहाबाद में इन दो अलग-अलग धर्म के लोगों की शादी कराई थी।

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शादी के कुछ वर्षों बाद 1948 में ‌इंदिरा और फिरोज अपने दोनों बच्चों के साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री निवास तीन मूर्ति भवन में रहने लगे। फिरोज गांधी को घर जमाई बनना रास नहीं आया।

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जैसे ही वो लोकसभा के सदस्य चुने गए वो सांसदों को मिलने वाले क्वार्टर में शिफ्ट हो गए। जबकि इंदिरा अपने बच्चों के साथ तीन मूर्ति भवन में ही रहीं और यहीं से दोनों के बीच कभी न खत्म होने वाली दूरियां आ गईं।

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दोनों के बीच दूरियों का सीधा असर फिरोज गांधी के स्वास्थ्य और नेहरू परिवार से उनके संबंधों पर पड़ा। जहां एक ओर लोक सभा में उन्होंने कई ऐसे खुलासे किए जिससे जवाहरलाल नेहरू की छवि पर असर पड़ा वहीं उनका स्वास्थ्य भी दिन पर दिन गिरने लगा।

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डॉक्टरों के मना करने के बावजूद उन्होंने अपने खान-पान पर कोई परहेज नहीं रखा और दो हार्ट अटैक होने के बावजदू उनकी दिनचर्या बेहद अनियमित ही रही। नतीजा यह हुआ कि उन्हें तीसरी बार हार्ट अटैक पड़ा जिसने सिर्फ 48 साल की उम्र में उनकी जान ले ली।

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अपने जीवन के अंतिम दिनों में जब वो अपनी बीमा‌री से जूझ रहे थे तो वो अकेले थे। यहां तक कि जिस दिन विलिंगडन अस्पताल(अब राममनोहर लोहिया अस्पताल) में उन्होंने आखिरी सांस ली तब उनकी पत्नी इंदिरा गांधी केरला में थी।

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मौत के बाद फिरोज के शव को तीन मूर्ति भवन लाया गया। इंदिरा गांधी ने जब फिरोज के शव को देखा तो बेसुध हो गईं और शव के बगल में ही बैठकर अनवरत रोती रहीं और उन्हें एकटक निहारती रहीं।

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नेहरू और फिरोज यानी ससुर और दामाद के रिश्तों पर रोशनी डालते हुए नटवर सिंह ने एक बड़ी ही दिलचस्प बात बताई है। सब जानते हैं कि नेहरू और फिरोज के बीच संबंध अच्छे नहीं थे।
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लेकिन नेहरू ने फिरोज की मौत के बाद उन्हें देखने के लिए जुटी लोगों की भीड़ को देखकर नटवर सिंह से ये कहा था कि, मुझे उम्मीद नहीं थी कि फिरोज इतना लोक‌प्रिय शख्स था।
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