फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इतिहास में दर्ज ये तथ्य बताते हैं अगर अलाउद्दीन खिलजी ना होता तो ऐसी ना होती भारत की तस्वीर

Fri, 24 Nov 2017 10:00 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 10
aluddin khilji - फोटो : अमर उजाला
संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती के विवादों में घिरने के बाद इतिहास के वो किरदार फिर से सुर्खियों में आ गए हैं जो कहीं न कहीं भुला दिए गए थे। फिल्म में कुछ ऐतिहासिक किरदारों को लेकर देशभर में विवाद जारी है। इसी में अलाउद्दीन खिलजी का भी किरदार है जिसे फिल्म के साथ ही समाज में भी उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है। फिल्म में जिस तरह से खिलजी के किरदार को दिखाया गया है इतिहास के जानकार उससे इत्तेफाक नहीं रखते। खिलजी की नकारात्मक छवि के विपरीत इतिहासकार मानते हैं कि उसने ऐसे कई सुधार भी किए जो आज भी प्रासंगिक हैं। इस कड़ी में हम आपको अलाउद्दीन खिलजी के बारे में कुछ ऐसे ही सच बताने जा रहे हैं।
विज्ञापन

2 of 10
डेमो इमेज
आम आदमी के ‌इतिहासकार और 'दिल्लीः अननोन टेल्स ऑफ ए सिटी' व 'दिल्ली दैट नो वन नोज' जैसी ऐतिहासिक किताबों के लेखक आरवी स्मिथ बताते हैं कि अलाउद्दीन खिलजी वैसा नहीं था जैसा उसे फिल्म 'पद्मावती' में दिखाया गया है। फिल्म ने ऐसे बादशाह की छवि को बिगाड़ कर रख दिया है जो अगर ना होता तो शायद आज हिंदुस्तान की शक्ल कुछ और होती। खिलजी ने मंगोलों से हिंदुस्तान की रक्षा की थी।
विज्ञापन

3 of 10
padmavati
आरवी स्मिथ ये भी बताते हैं कि ‌अलाउद्दीन खिलजी ने अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए चित्तौड़ पर आक्रमण किया था ना कि पद्मावती को जीतने के लिए। लेकिन जब उसने पद्मावती के चर्चे सुने तो उत्सुकतावश उसे देखना चाहता था जिसके बाद रानी पद्मिनी एक बड़े आईने के सामने खड़ी हुई थीं जिसमें खिलजी ने सिर्फ उनका अक्स देखा था।

4 of 10
balban lal mahal - फोटो : सोशल मीड‌िया
अपने चाचा जलालुद्दीन खिलजी की हत्या कर गद्दी पाने वाले अलाउद्दीन के लिए उस वक्त एक सशक्त सेना और संतुष्ट जनता रखना सबसे बड़ी जरूरत थी। यही वजह है कि उसने ऐसे कई सुधार किए जो अर्थव्यवस्था और सेना के लिए आज भी उदाहरण माने जाते हैं। अलाउद्दीन खिलजी ने दिल्ली में स्थित बलबन के लाल महल में अपना राज्याभिषेक 22 अक्तूबर 1296 को सम्पन्न करवाया। (तस्वीर में बलबन लाल महल)
विज्ञापन

5 of 10
alauddin khilji - फोटो : अमर उजाला
प्रसिद्ध इतिहासकार बरनी ने भी बताया है कि अपने साम्राज्य को बढ़ाने के लिए सबसे पहले खिलजी ने ही धर्म और शासन को अलग किया। अलाउद्दीन ने ही दरबार और सेना में परिवार के लोगों की जगह योग्यता के आधार पर लोगों को भर्ती करना शुरू किया।
विज्ञापन

6 of 10
alauddin khilji
बाजार प्रणाली को नियंत्रित करने और लंबे समय तक महंगाई न बढ़ने देने के लिए भी खिलजी ने बहुत काम किया था। खिलजी की बनाई हुई मंडियों में अनाज तौलने के निश्चित बांट होते थे जिनकी हर साल जांच होती थी। मुनाफे की दर तय थी। मिलावट करने वालों को कड़ी सजा दी जाती थी। ये प्रणाली आज भी चल रही है।
विज्ञापन

7 of 10
alauddin khilji
खिलजी की सेना में सैनिकों को रखने की प्रक्रिया दिलचस्प थी। सैनिकों का हुलिया लिखकर उनकी सेना में भर्ती की जाती थी। यही नहीं सेना में जो घोड़े रखे जाते थे उन्हें भी दाग कर निशान लगाया जाता था। क्योंकि इससे पहले सैनिक अच्छी नस्ल के घोड़े ले जाते थे और बाद में अस्तबल में खराब नस्ल वाले घोड़े जमा करवा देते थे।

8 of 10
padmavati
खिलजी को ही स्थाई सेना को सालाना तन्ख्वाह पर रखने का श्रेय जाता है। इसके साथ ही वह जीत के बाद लूटते गए खजाने में से एक फिक्स हिस्सा सैनिकों में भी बांटता था। राशनिंग और डाक व्यवस्था की शुरुआत करने वाले खिलजी को दिल्ली के सीरी फोर्ट के लिए भी जाना जाता है।

9 of 10
qutub minar - फोटो : रतनदीप कपूर
1316 को ड्रॉप्सी, जलोदर के चलते खिलजी की मौत हो गई. खिलजी के करीबी माने जाने वाले मलिक काफूर ने इसके बाद गद्दी पर कब्जा कर लिया। इतिहासकारों के अनुसार दिल्ली के कुतुब मीनार से सटे परिसर में ही अलाउद्दीन खिलजी का मकबरा है।
विज्ञापन

10 of 10
qutub minar - फोटो : रतनदीप कपूर
हालांकि वहां लगे पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से एक पत्थर पर इसे 'अलाउद्दीन खिलजी का मदरसा' बताया गया है। उस पत्थर पर लिखा है, 'ये चतुर्भुजीय अहाता जो ऊंची दीवारों से घिरा है, यह मूल रूप से एक मदरसा था जिसका प्रवेश द्वार पश्चिम में है। इसका निर्माण पारंपरिक तालीम देने के लिए अलाउद्दीन खिलजी (ईसवी 1296 -1316 ईसवी) द्वारा करवाया गया था। अहाते के दक्षिणी हिस्से के बीच में शायद खिलजी का मकबरा है। मदरसे के साथ ही मकबरे के चलन का यह हिंदुस्तान में पहला नमूना है। यह शायद सलजुकियान रवायत से मुत्तासिर है।'
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें