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हादसे की इनसाइड स्टोरी: प्लेटफार्म से लेकर सीढ़ी पर हुई अफरा-तफरी, घुटने लगा दम, पैर रखने की भी न मिली जगह

Sun, 16 Feb 2025 02:29 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रेल के टॉयलेट में भी लोग खचाखच भरे हुए थे। कुछ ही दूरी पर खड़ी बिमला देवी बिलखते हुए बताती हैं कि उनके पति हार्ट के मरीज हैं। उन्हें आखिरी बार 10 बजे देखा था, उसके बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ है। 
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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन हादसा - फोटो : PTI
मैं अपने परिवार के साथ प्रयागराज जाने के लिए आया था। बेटा मेरे साथ है, लेकिन बेटी और पत्नी का कुछ पता नहीं है। समझ नहीं आ रहा है कहां जाऊं। हालत, बेहद खराब हैं। रेल प्रशासन भी कुछ मदद नहीं कर रहा है। यह कहते हुए योगेश मिश्रा के आंसू थम नहीं रहे हैं। वह रोते हुए बताते हैं कि उनकी ट्रेन प्लेटफार्म नंबर 15 में थी। एसी-2 की टिकट थी। लेकिन, भीड़ इतनी अधिक थी कि किसी भी बोगी में पैर रखने की जगह नहीं थी। सब लोग एक-दूसरे के ऊपर चढ़ रहे थे। 
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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन हादसा - फोटो : PTI
उन्होंने बताया कि रेल के टॉयलेट में भी लोग खचाखच भरे हुए थे। कुछ ही दूरी पर खड़ी बिमला देवी बिलखते हुए बताती हैं कि उनके पति हार्ट के मरीज हैं। उन्हें आखिरी बार 10 बजे देखा था, उसके बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि न पुलिस सहयोग कर रही है न ही रेल प्रशासन। उन्होंने कहा कि वह तीन से चार चक्कर अस्पताल से लेकर यहां तक काट चुकी हैं। वह घबराकर कहती हैं कि कोई उनकी मदद करें। 
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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन हादसा - फोटो : PTI
इसी तरह स्टेशन के बाहर अपने माता-पिता को खोज रहे मनोज रावत भटक रहे हैं। वह बताते हैं कि उनका इस भीड़ में फोन तक खो गया हैं। बस वह किसी तरह यहां से बचकर निकल आए हैं। उन्होंने बताया की जैसे ही भगदड़ हुई वैसे ही लोग उनके ऊपर चढ़ गए। इस दौरान वह बेहोश हो गए। उसके बाद उन्हें कुछ लोग अपने कंधों में बाहर लाए हैं। वह रोते हुए कहते हैं कि महादेव उनके माता-पिता को बचा लें। 

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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन हादसा - फोटो : PTI
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के बाहर 12 से अधिक एम्बुलेंस खड़ी हैं। बीच-बीच में कई एम्बुलेंस आ-जा रही हैं। आस-पास के इलाके को छावनी में बदल दिया है। मयूर विहार से अपनी बहन को प्रयागराज जाने वाली ट्रेन में बैठने आए अभिनव सिंह कहते हैं कि उनकी ट्रेन 10 बजे की थी। उन्हें बैठा दिया था। लेकिन, भीड़ बेकाबू थी। 
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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन हादसा - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि सीढ़ी पर बेतहाशा भीड़ थी। सांस लेना भी मुश्किल हो गया था। वह बताते हैं कि उन्होंने सबसे पहले एम्बुलेंस को कॉल किया। जिसके बाद कार्रवाई हुई। लेकिन, स्टेशन के अंदर किसी भी तरह के सुरक्षा के इन्तज़ाम नहीं थे। उन्होंने बताया कि वह 3-4 लोगों को अस्पताल लेकर गए। किसी का हाथ टूट गया था तो कोई बेहोश था।

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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन - फोटो : PTI
कुछ के परिवार के सदस्य हैं अब भी लापता
मेरे पिता मरीज हैं। वह तो ट्रेन में चढ़ गए हैं। लेकिन, बाकी लोग यहीं हैं। उन्हें ट्रेन के फर्श पर गिरा हुआ देखा था। उनका फोन भी नहीं लग रहा है। डर है कहीं कोई दुर्घटना नहीं हुई हो। स्टेशन के अंदर से रोते हुए बाहर आए रोहित यादव कहते हैं कि उनके बच्चे ट्रेन में थे। लेकिन, उन्हें ट्रेन से धक्का दे दिया गया। वह प्लेटफार्म पर गिर गए थे। उन्होंने कहा कि बच्चों का कुछ पता नहीं है। परिवार के लोग यहां आ रहे हैं। रेलवे कुछ मदद नहीं कर रहा है। 
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नई दिल्ली रेलवे हादसा - फोटो : PTI
सूझबुझ नहीं दिखाते तो काल के गाल में समा जाते
स्टेशन के बाहर अपने दोस्तों का इंतजार कर रहे प्रियांशु शर्मा घबराते हुए बताते हैं कि अगर वह सूझबुझ नहीं दिखाते तो काल के गाल में समा जाते। उन्होंने बताया कि उनकी ट्रेन रात 10:50 की थी। 12582 मारवाड़ी एक्सप्रेस में इतनी भीड़ थी की सांस भी नहीं ले पा रहे थे। यह घटना प्लेटफार्म नंबर 15 की है। देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई। किसी तरह जान बचाकर बाहर आए हैं। 

वहीं, बच्चे क्या, बुजुर्ग क्या। सब ट्रेन में चढ़ने के लिए आतुर थे। सब एक-दूसरे पर चढ़ रहे थे। यह बताते हुए निकेश राय रोने लगते हैं। वह कहते हैं कि उनके दो दोस्त अब भी लापता हैं। एक दोस्त का जूता मिला है, लेकिन जहां घटना घटी उस जगह को साफ कर दिया गया है।  घर से फोन आ रहे हैं। सब घबरा गए हैं।
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