प्रद्युम्न हत्याकांड मामले में बस कंडक्टर अशोक को मंगलवार को जमानत मिल गई। इस बीच अशोक के घरवालों ने गुरुग्राम पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसे स्कूल प्रधिकारियों और पुलिस द्वारा फंसाया गया था।
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- फोटो : सुदर्शन झा/अमर उजाला
अशोक के मामा ओम प्रकाश चोपड़ा का कहना है कि उसे थर्ड डिग्री टॉर्चर कर उससे जबरदस्ती गुनाह कबूल करवाया गया। लेकिन सीबीआई की जांच ने अशोक को राहत दी है।
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- फोटो : सुदर्शन झा
ओम प्रकाश चोपड़ा ने कहा,'हम उन लोगों का शुक्रिया अदा करते हैं जिन्होंने सीबीआई जांच की मांग की। इस जांच के कारण सच सामने आ सका।' वहीं अशोक के पिता अमीचंद ने सीबीआई के पास उसके खिलाफ कोई सबूत न होने की बात पर कहा कि,'हमने मंगलवार को आने वाले फैसले के लिए प्रार्थना की थी। बार-बार सुनवाई के लिए इतना सफर करना कठिन काम है। हर बार हम इसी उम्मीद के साथ आते थे कि शायद इस बार अशोक को जमानत मिल जाए। अशोक को बिना किसी कसूर के दो महीने से ज्यादा जेल में रखा गया।'
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चोपड़ा ने कहा कि अशोक के दोषी ठहराना आसान था क्योंकि वो गरीब है। उन्होंने बताया कि जब भी वो अशोक से मिलने जेल जाया करते थे अशोक उनको एक-एक बात बताता था। उन्होंने आगे बताया,'प्रद्युम्न की हत्या से ठीक पहले जब अशोक वॉशरूम में गया तो वहां पहले से ही दो सीनियर छात्र मौजूद थे। वो कराटे क्लास के लिए कपड़े बदल रहे थे।'
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- फोटो : सुदर्शन झा
वॉशरूम जाने के कुछ समय बाद माली हरपाल अशोक को बुला कर ले गया। माली ने टीचर के कहने पर अशोक से प्रद्युम्न को स्कूल वैन में बैठा देने को कहा। जब अशोक प्रद्युम्न को ले जा रहा था तब उसके कपड़ों पर खून के दाग भी नहीं थे।
अशोक के मामा ने पुलिस पर आरोप लगाया कि पुलिस ने ऐसा कहा था कि अशोक वॉशरूम में चाकू ले कर घुसा था। फॉरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक उस चाकू पर अशोक के उंगलियों के निशान नहीं थे। पुलिस ने बताया था कि चाकू आगरा से खरीदा गया है लेकिन, सीबीआई ने सोहना में वो दुकान ढूंढ निकाली जहां से चाकू खरीदा गया था।