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पकड़े बंदर हुआ बवंडर, मेनका गांधी तक पहुंची बात तो सुनाया ये फरमान

Thu, 14 Jun 2018 09:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
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monkey - फोटो : अमर उजाला
गाजियाबाद में बंदर पकड़ने को लेकर मंगलवार को बवंडर हो गया। नगर निगम के बंदर पकड़ने के अभियान की शुरूआत के साथ ही हंगामा हो गया। निगम के नामित ठेकेदार ने रेलवे स्टेशन से बंदरों को पकड़ा और उन्हें नंद्रगाम स्थित बारात घर में जाकर रखा तो वहां पीपुल्स फोर एनिमल (पीएफए) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर हंगामा किया।
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monkey - फोटो : अमर उजाला
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को अंदेशा था कि प्राइवेट लोग बंदर पकड़कर उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। पीएफए के सदस्य ने बंदरों को रखे जाने के तरीके पर भी सवाल खड़ा किया। बात केंद्रीय मंत्री महिला एवं बाल विकास मेनका गांधी तक पहुंची। मेनका गांधी ने फोन पर मेयर आशा शर्मा से बात की। बंदर और कुत्ते शहर की बड़ी समस्या बन गए हैं।
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monkey - फोटो : अमर उजाला
मेयर व नगर आयुक्त के पास जितनी शिकायतें आती हैं, उसमें अधिकांश बंदर व कुत्ते काटने की रहती हैं। इसी वजह से बंदर पकड़ने का मुद्दा नगर निगम सदन की बैठक में भी जोरशोर से उठा था। बाद में नगर निगम प्रशासन ने टेंडर निकालकर बंदर पकड़ने के लिए ठेकेदार को अधिकृत किया गया। ठेकेदार ने बंदर पकड़ने का काम शुरू किया तो हंगामा और विरोध झेलना पड़ा। ठेकेदार ने रेलवे स्टेशन और अन्य जगहों से 69 बंदर पकड़े थे। इन बंदरों को नंदग्राम स्थित रेत मंडी के पास बने बारात घर में रखा गया। बारात घर में बड़ा पिंजरा है।

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मंगलवार को जब इन बंदरों को बिजनौर के जंगलों में छोड़ने के लिए ले जाने लगा तो वहां पर बजरंग दल व पीएफए के सदस्यों ने हंगामा किया। हंगामे की सूचना पर अपर नगर आयुक्त आरएन पाण्डेय व  सिटी मजिस्ट्रेट एसके राय मौके पर पहुंचे। उन्होंने बजरंग दल और पीएफए के सदस्यों को समझाकर शांत कराया। कुछ देर बाद डीएफओ भी पहुंचीं। पिंजरे में 5-6 बंदर घायल हो गए थे। उन्हें उपचार के लिए पशु चिकित्सालय पहुंचाया गया। चेकअप के बाद बंदरों को वाहन में लादकर ब्रजघाट ले जाकर छोड़ दिया गया। हालांकि इस दौरान यह अफवाह उड़ी की चार-पांच बंदर मर गए हैं।
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कूलर
बंदरों के लिए लगेगा कूलर नगर आयुक्त सीपी सिंह का कहना है बंदरों को नियमों के अनुसार ही पकड़ा जाएगा। बीमार या चोटिल बंदरों का पहले उपचार होगा, फिर जिले की सीमा से बाहर भेजे जाएंगे। बंदर पकड़ने वाली टीम के साथ पीएफए और वन विभाग का एक -एक सदस्य भी रहेगा। इसके अलावा नगर निगम बारात घर में खाने-पीने के साथ गर्मी के लिए कूलर की भी व्यवस्था करेगा।
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maneka gandhi
मेनका गांधी बोलीं, बंदरों का कराएं डीएनए टेस्ट बंदर पकड़ने और उन पर ज्यादती की शिकायत केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी तक पहुंची। मेनका गांधी ने इस बारे में मेयर आशा शर्मा से फोन पर बात की। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बंदर अपने परिवार और झुंड के साथ ही रहते हैं। उनको एक ही पिंजरे में रखा जाए। अगर उसमें दूसरा बंदर आता है तो वह आपस में लडे़ंगे। अगर बंदर मिक्स हो जाते हैं तो पहले बंदरों का डीएनए टेस्ट कराया जाए। फिर ग्रुप बनाकर उन्हें जंगल में छोड़ा जाए। इस पर मेयर ने असमर्थता जताई।
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monkey
एक बंदर पकड़ने का 128 रुपया नगर निगम एक बंदर को पकड़ने के लिए 128 रुपये दे रहा है। पहला यह टेंडर 475 रुपये में छूटा था। बाद में नगर निगम के पास अन्य फर्में भी आई और अपना प्रपोजल रखा। निगम अधिकारियों ने फर्म से बातचीत करने के बाद 128 रुपये निर्धारित किए हैं।
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monkey - फोटो : अमर उजाला
बंदर रखने के लिए बनेगा बड़ा और छोटा जाल पीएफए की सदस्य आसीमा शर्मा का कहना है कि चूंकि बंदर अपने परिवार के साथ ही रहते हैं, इसलिए एक पिंजरे में चार-पांच बंदर ही रखे जाएं। बंदरों को एक  पिंजरे में झुंड में रखने पर वह आपस में लड़ेंगे और घायल होंगे। इस पर नगर नगम अधिकारियों ने अपनी सहमति जताई है।
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