आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास के खेमे ने इस बार आर-पार के संघर्ष के लिए कमर कस ली है। विश्वास खेमे की सीधी टक्कर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खेमे से है।
विज्ञापन
2 of 6
कुमार विश्वास
- फोटो : self
विश्वास समर्थकों का दावा है कि वह एक व्यक्ति की तानाशाही बर्दाश्त नहीं करेंगे। अगर कुमार विश्वास को टिकट नहीं मिलता है तो विरोधी गुट के साथ रहने का कोई तुक नहीं बनता।
विज्ञापन
3 of 6
kumar vishwas
नाम उजागर न करने की शर्त पर पार्टी ऑफिस पर प्रदर्शन कर रहे एक कार्यकर्ता ने बताया कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, कुमार विश्वास व संजय सिंह आप की वह बुनियाद हैं, जिस पर दिल्ली में सरकार बनी है।
4 of 6
आप कुमार विश्वास
- फोटो : SELF
वहीं, इन्हीं नेताओं के सहारे पार्टी को पूरे देश में भी पहचान मिली है। वहीं, केजरीवाल, सिसोदिया व विश्वास की पार्टी बनने से पहले की दोस्ती भी रही है, लेकिन सियासत में आने के बाद कुछ ऐसे लोग पार्टी से जुड़ गए, जिन्होंने न सिर्फ पुरानी दोस्ती में दरार डाली, बल्कि सियासी तौर एक-दूसरे के बीच दुश्मनी भी करा दी है।
विज्ञापन
5 of 6
Kumar vishwas
इसका सबसे ज्यादा नुकसान विश्वास को हुआ। पार्टी खड़ी करने में अहम भूमिका निभाने वाले संस्थापक सदस्य व तेज-तर्रार नेता विश्वास को हाशिये पर डालने की कोशिश हो रही है। आलम यह है विश्वास को राज्य सभा में भेजने लायक तक नहीं समझा जा रहा है।
इस सबके बीच विश्वास खेमे ने पार्टी दफ्तर में अपना डेरा जमा लिया है। टेंट लगाने के अलावा ठंड से बचने के लिए रजाई-गद्दे व खानसामा तक का इंतजाम प्रदर्शनकारियों ने किया है। वहीं, लाउडस्पीकर पर देश भक्ति की गीत भी गाये जा रहे हैं। हालांकि देर रात कुमार विश्वास की अपील के बाद वे पार्टी ऑफिस से हट गए।